पांच साल से धुएं में घुट रहा दादूपुर, सलेमपुर, सुमन नगर क्षैत्र! प्लास्टिक जलाकर रीसाइक्लिंग ‘गुल्ला’ बनाने वाली यूनिटों पर अब प्रशासन का शिकंजा—सीलिंग टूटी तो FIR…. दादुपुर गोविंदपुर, सलेमपुर, शिवगंगा विहार से सुमन नगर तक प्लास्टिक के धुएं और बदबू से परेशान लोग फिर पहुंचे डीएम दरबार—सीडीओ डॉ. ललित नारायण मिश्र ने दिए सख्त कार्रवाई के निर्देश…. प्रदूषण बोर्ड करेगा मौके पर जांच, अनधिकृत यूनिटें होंगी सील; सील तोड़कर दोबारा संचालन मिला तो मुकदमा, कमर्शियल बिजली कनेक्शन की भी होगी जांच

पांच साल से धुएं में घुट रहा दादूपुर, सलेमपुर, सुमन नगर क्षैत्र! प्लास्टिक जलाकर रीसाइक्लिंग ‘गुल्ला’ बनाने वाली यूनिटों पर अब प्रशासन का शिकंजा—सीलिंग टूटी तो FIR….
दादुपुर गोविंदपुर, सलेमपुर, शिवगंगा विहार से सुमन नगर तक प्लास्टिक के धुएं और बदबू से परेशान लोग फिर पहुंचे डीएम दरबार—सीडीओ डॉ. ललित नारायण मिश्र ने दिए सख्त कार्रवाई के निर्देश….
प्रदूषण बोर्ड करेगा मौके पर जांच, अनधिकृत यूनिटें होंगी सील; सील तोड़कर दोबारा संचालन मिला तो मुकदमा, कमर्शियल बिजली कनेक्शन की भी होगी जांच

हरिद्वार। ग्राम दादूपुर गोविंदपुर के शिवगंगा विहार क्षेत्र में प्लास्टिक जलाकर गुल्ला और प्लास्टिक दाना बनाने वाली कथित अनधिकृत यूनिटों को लेकर स्थानीय लोगों की पांच साल पुरानी शिकायत अब प्रशासन के सख्त एक्शन तक पहुंच गई है। शिवगंगा विहार, बालकुंज, सुमन नगर और आसपास के निवासियों का आरोप है कि आबादी क्षेत्र में प्लास्टिक जलाने और उसके प्रसंस्करण से निकलने वाला धुआं तथा दुर्गंध शाम के समय पूरे क्षेत्र में फैल जाती है।
स्थानीय लोगों का कहना है कि उन्होंने पिछले कई वर्षों में कई बार जिलाधिकारी कार्यालय और प्रदूषण नियंत्रण विभाग में शिकायतें दीं। शिकायतकर्ताओं के मुताबिक कुछ स्थानों पर कार्रवाई करते हुए यूनिटों को सील भी किया गया, लेकिन बाद में कथित तौर पर दोबारा काम शुरू हो गया।अब प्रशासन ने स्पष्ट किया है कि यदि सरकारी कार्रवाई के बावजूद सील तोड़कर दोबारा गतिविधियां शुरू की गईं तो संबंधित लोगों के खिलाफ कानूनी कार्रवाई की जाएगी।
कहां की है शिकायत और क्या है पूरा मामला?
शिकायत ग्राम दादूपुर गोविंदपुर के शिवगंगा विहार कॉलोनी, बालकुंज, सुमन नगर, सलेमपुर तथा धनोरी-सिडकुल मार्ग से लगे क्षेत्र को लेकर की गई है।शिकायतकर्ताओं का आरोप है कि इन इलाकों के आसपास प्लास्टिक को जलाकर और प्रसंस्करण के जरिए गुल्ले तथा प्लास्टिक दाने तैयार किए जाते हैं। उनका कहना है कि इस प्रक्रिया से निकलने वाला धुआं आवासीय क्षेत्र तक पहुंचता है।विशेषकर शाम के समय बदबू और धुएं की समस्या बढ़ने का दावा किया गया है। स्थानीय लोगों का कहना है कि इससे घरों में रहना और रात में सोना तक मुश्किल हो रहा है।
तेजपाल रावत निवासी शिवगंगा विहार दादुपुर गोविंदपुर बोले—पांच साल से शिकायत लेकर घूम रहे
शिवगंगा विहार बिहार कॉलोनी निवासी तेजपाल सिंह रावत ने बताया कि वह करीब पांच साल से इस समस्या को लेकर अधिकारियों के पास शिकायत कर रहे हैं।उनका आरोप है कि कई बार कार्रवाई हुई, कुछ यूनिटों को सील किया गया, लेकिन उसके बाद कथित तौर पर फिर से गतिविधियां शुरू हो गईं।रावत का कहना है कि अब एक बार फिर शिकायत करने पर एक सप्ताह के भीतर कार्रवाई का आश्वासन मिला है। उनका कहना है कि क्षेत्रवासियों को अब आश्वासन नहीं, स्थायी समाधान चाहिए।
सुरेश चंद्र निवासी शिव गंगा विहार कालोनी दादुपुर गोविंदपुर ने उठाया सीलिंग होने के बाद दोबारा संचालन का सवाल
स्थानीय निवासी सुरेश चंद्र ने बताया कि शिवगंगा विहार के साथ बालकुंज और सुमन नगर के लोग भी इस समस्या से प्रभावित हैं। उनके मुताबिक पिछले पांच वर्षों में कई बार शिकायतें की गई हैं।उन्होंने आरोप लगाया कि कार्रवाई के दौरान कुछ यूनिटों को सील किया गया, लेकिन बाद में कथित तौर पर सील खोलकर दोबारा संचालन शुरू कर दिया गया।स्थानीय लोगों की मांग है कि यदि जांच में सील तोड़कर दोबारा काम शुरू करने की पुष्टि होती है तो संबंधित लोगों के खिलाफ एफआईआर दर्ज की जाए।
सीडीओ डॉ. ललित नारायण मिश्र ने क्या कहा?
मामले में मुख्य विकास अधिकारी हरिद्वार डॉ. ललित नारायण मिश्र ने कहा कि यदि किसी इकाई के खिलाफ सरकारी कार्रवाई हो चुकी है और उसके बावजूद कोई व्यक्ति दोबारा कब्जा कर लेता है या सील तोड़कर पुरानी गतिविधियां शुरू करता है तो उसके खिलाफ एफआईआर का प्रावधान है।उन्होंने कहा कि ऐसी स्थिति में विभाग को सख्त कार्रवाई के निर्देश दिए गए हैं। सरकारी कार्रवाई के बावजूद यदि उसका अनुपालन नहीं किया गया तो प्रशासन अगले स्तर की कानूनी कार्रवाई करेगा।
सीडीओ डॉ. ललित नारायण मिश्र ने कहा कि सरकारी कार्रवाई के बाद यदि कोई सील तोड़कर दोबारा यूनिट संचालित करता है तो उसके खिलाफ एफआईआर दर्ज की जाएगी। प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड मौके पर जांच करेगा। अनधिकृत और प्रदूषण फैलाने वाली यूनिटें सील होंगी। कमर्शियल बिजली कनेक्शन की वैधता की भी जांच कर रिपोर्ट के आधार पर कार्रवाई होगी।
प्रदूषण बोर्ड करेगा मौके पर निरीक्षण
सीडीओ ने बताया कि क्षेत्रीय अधिकारी, प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड को मौके पर जाकर जांच करने के निर्देश दिए गए हैं।जांच में यह देखा जाएगा कि क्षेत्र में कौन-कौन सी इकाइयां संचालित हैं, उनके पास आवश्यक अनुमति है या नहीं और उनकी गतिविधियों से प्रदूषण या पर्यावरण को खतरा पैदा हो रहा है या नहीं।यदि कोई यूनिट अनधिकृत पाई जाती है और उससे प्रदूषण का खतरा सामने आता है तो उसे सील करने के साथ नियमानुसार कानूनी कार्रवाई की जाएगी।
कमर्शियल बिजली कनेक्शन भी जांच के दायरे में
मामले में बिजली कनेक्शन को लेकर भी जांच होगी। सीडीओ के अनुसार यह देखा जाएगा कि संबंधित इकाइयों को कमर्शियल बिजली कनेक्शन कैसे और किन दस्तावेजों के आधार पर मिला। सीडीओ ने बताया कि यह पूरा विषय क्षेत्रीय अधिकारी प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड को संदर्भित किया गया है। अधिकारी मौके पर जाकर सभी पहलुओं की जांच करेंगे और रिपोर्ट के आधार पर आगे की कार्रवाई की जाएगी।
5 अक्टूबर को डीएम कार्यालय में दर्ज हुई शिकायत
शिवगंगा विहार सोसायटी की ओर से 5 अक्टूबर 2026 को जनता मिलन कार्यक्रम में शिकायत दर्ज कराई गई। शिकायत का पंजीकरण नंबर 570 बताया गया है।शिकायत में प्लास्टिक जलाने, प्लास्टिक के प्रसंस्करण और उससे उत्पन्न प्रदूषण की जांच तथा प्रभावी कार्रवाई की मांग की गई है। जिलाधिकारी कार्यालय की ओर से क्षेत्रीय अधिकारी, उत्तराखंड पर्यावरण संरक्षण एवं प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड तथा उप जिलाधिकारी हरिद्वार को नियमानुसार कार्रवाई के निर्देश दिए गए हैं। कार्रवाई से आवेदक और कार्यालय को एक पक्ष के भीतर अवगत कराने का निर्देश भी दिया गया है।
पांच साल की शिकायत के बाद अब कार्रवाई का इंतजार
स्थानीय लोगों का कहना है कि लंबे समय से शिकायतें करने के बावजूद समस्या का स्थायी समाधान नहीं हुआ। उनका आरोप है कि प्लास्टिक जलाने से निकलने वाला धुआं और दुर्गंध आवासीय क्षेत्र में फैलती है, जिससे परिवार परेशान हैं। लोगों का कहना है कि यदि समस्या पर स्थायी रोक नहीं लगी तो कई परिवारों के सामने क्षेत्र से पलायन करने की स्थिति पैदा हो सकती है।
अब प्रशासन ने जांच और कार्रवाई की जिम्मेदारी प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड को सौंप दी है। स्थानीय लोगों की निगाह इस बात पर है कि मौके की जांच में क्या सामने आता है और अनधिकृत यूनिटों के खिलाफ कितनी सख्ती से कार्रवाई होती है। इस बार सबसे बड़ा सवाल यही है—पांच साल से शिकायत कर रहे लोगों को राहत मिलेगी या फिर प्लास्टिक के धुएं और ‘गुल्ला’ बनाने वाली यूनिटों का विवाद एक बार फिर कार्रवाई के बाद दोबारा खड़ा हो जाएगा?



