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हरिद्वार में ‘मगध साइबर गैंग’ का बड़ा खेल श्यामपुर पुलिस ने किया बेनकाब! एसएसपी नवनीत सिंह भुल्लर ने किया सिंडिकेट का खुलासा,, Swift कार की चेकिंग से खुला ₹2.75 करोड़ की संदिग्ध डिजिटल मनी ट्रेल का राज, 5 साइबर अपराधी गिरफ्तार—35 ATM कार्ड, 14 पासबुक, 17 SIM, 18 मोबाइल और 2 लैपटॉप बरामद

इस बड़ी कार्रवाई में SP City अभय सिंह, CO City शिशुपाल नेगी, CO साइबर क्राइम/भगवानपुर सुमित पाण्डे, थानाध्यक्ष नितेश शर्मा, SSI मनोज रावत, SI देवेंद्र तोमर, SI मोहन कठैत, SI गगन मैठाणी, ASI रविन्द्र गौड़, ASI देवेंद्र यादव, हेड कांस्टेबल नरेंद्र सिंह नेगी, हेड कांस्टेबल प्रमोद कुमार सहित कोतवाली श्यामपुर, साइबर क्राइम और SOG की टीम शामिल रही।

हरिद्वार में ‘मगध साइबर गैंग’ का बड़ा खेल श्यामपुर पुलिस ने किया बेनकाब! एसएसपी नवनीत सिंह भुल्लर ने किया सिंडिकेट का खुलासा,,

Swift कार की चेकिंग से खुला ₹2.75 करोड़ की संदिग्ध डिजिटल मनी ट्रेल का राज, 5 साइबर अपराधी गिरफ्तार—35 ATM कार्ड, 14 पासबुक, 17 SIM, 18 मोबाइल और 2 लैपटॉप बरामद

हरिद्वार। जामताड़ा के बाद अब बिहार के नालंदा और नवादा का ‘मगध साइबर गैंग’ साइबर ठगी के नए ठिकाने के रूप में सामने आता दिखाई दे रहा है। उत्तराखंड पुलिस मुख्यालय के साइबर क्राइम हॉटस्पॉट अभियान के बीच हरिद्वार पुलिस ने एक बड़े साइबर फ्रॉड नेटवर्क पर ऐसा शिकंजा कसा है, जिसने बैंक खातों, ATM कार्ड, SIM, UPI और डिजिटल लेन-देन के जरिए करोड़ों रुपये की संदिग्ध मनी ट्रेल खड़ी कर रखी थी।

वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक हरिद्वार नवनीत सिंह भुल्लर के निर्देशन में कोतवाली श्यामपुर पुलिस की टीम ने संदिग्ध Swift कार को रोककर पांच आरोपियों को गिरफ्तार किया। तलाशी के दौरान एक बैग से साइबर फ्रॉड का पूरा ‘सेटअप’ बरामद हुआ। प्रारंभिक बैंकिंग और डिजिटल जांच में ₹2.75 करोड़ से अधिक के संदिग्ध डिजिटल लेन-देन के सुराग मिलने के बाद पुलिस ने नेटवर्क की जड़ें खंगालनी शुरू कर दी हैं।

एक Swift कार रोकी और खुल गया करोड़ों का साइबर खेल

25/26 अगस्त 2026 की रात श्यामपुर पुलिस क्षेत्र में गश्त और संदिग्ध व्यक्तियों एवं वाहनों की चेकिंग कर रही थी। इसी दौरान सज्जनपुर पीली क्षेत्र में मुखबिर से सूचना मिली कि सफेद रंग की Swift कार में कुछ लोग साइबर फ्रॉड से जुड़े हुए हैं।

पुलिस टीम ने तत्काल रसियाबड़ सिंगल लाइन प्वाइंट पर चेकिंग शुरू की। कुछ ही देर बाद चिड़ियापुर की ओर से आती Swift कार संख्या UK-08AF-0560 को रोक लिया गया।

कार में पांच व्यक्ति सवार थे। पुलिस ने जब उनकी तलाशी ली और वाहन को खंगाला तो एक पिठ्ठू बैग से निकली सामग्री देखकर पुलिस के भी होश उड़ गए।

बैग में एक-दो नहीं बल्कि 35 ATM/Debit Cards, 14 Bank Passbooks, 17 SIM Cards, 18 Mobile Phones, 2 Laptops, Laptop Charger, 10 ATM Covers, PAN Cards और ₹37,500 नकद बरामद हुआ।

35 ATM कार्डों ने खोला कई बैंकों का कनेक्शन

बरामद ATM/Debit Cards में Union Bank, Bank of Maharashtra, Indian Overseas Bank, Uttarakhand Gramin Bank, Nainital Bank, Canara Bank, Punjab National Bank, Central Bank of India, Indian Bank, UCO Bank, Bank of Baroda, City Union Bank और HDFC Bank समेत कई बैंकों के कार्ड मिले।

पुलिस को आशंका है कि इन खातों और ATM कार्डों का इस्तेमाल साइबर ठगी से प्राप्त रकम को अलग-अलग खातों में घुमाने और बाद में नकदी निकालने के लिए किया जाता था।

14 पासबुकों ने सामने ला दिया बैंकिंग नेटवर्क

पुलिस के कब्जे से मिली 14 पासबुकों में Central Bank of India, Indian Overseas Bank, SBI, UCO Bank, Bank of Maharashtra, Indian Bank और The Nainital Bank Ltd. सहित कई बैंकों के खाते मिले।

इनमें ऋषिकेश, हरिद्वार, कनखल, देहरादून और आसपास के क्षेत्रों से जुड़े खातों की जानकारी सामने आई है।

पुलिस अब यह जांच कर रही है कि संबंधित खाताधारकों की भूमिका क्या है, खाते किसके इस्तेमाल में थे और इन खातों में साइबर अपराध से जुड़ी रकम कितनी पहुंची।

WhatsApp चैट में छिपे मिले साइबर नेटवर्क के सुराग

बरामद मोबाइल फोन की प्रारंभिक जांच में WhatsApp चैट के भीतर बैंक अकाउंट नंबर, खाताधारकों के नाम, QR Code और लेन-देन से जुड़ी बातचीत के महत्वपूर्ण सुराग मिले हैं।

मोबाइल फोन की गैलरी में विभिन्न बैंक पासबुक और बैंक खातों से संबंधित दस्तावेजों की तस्वीरें भी मिली हैं।

यानी पुलिस के हाथ अब केवल ATM और पासबुक ही नहीं, बल्कि डिजिटल दुनिया में फैले उस नेटवर्क के सुराग भी लगे हैं, जहां रकम के लेन-देन और खातों की जानकारी मोबाइल चैट के जरिए साझा की जा रही थी।

₹2.75 करोड़ की डिजिटल मनी ट्रेल ने मचाई सनसनी

पुलिस के प्रारंभिक बैंकिंग एवं डिजिटल विश्लेषण में ₹2.75 करोड़ से अधिक के संदिग्ध डिजिटल लेन-देन के सुराग सामने आए हैं।

हालांकि पुलिस ने साफ किया है कि यह प्रारंभिक जांच का आंकड़ा है। बैंक खातों की विस्तृत स्टेटमेंट, KYC, ट्रांजैक्शन हिस्ट्री और डिजिटल फॉरेंसिक जांच के बाद ही यह स्पष्ट होगा कि साइबर अपराध से जुड़ी वास्तविक रकम कितनी है।

फिलहाल करोड़ों रुपये की संदिग्ध डिजिटल मनी ट्रेल ने पूरे मामले को बेहद गंभीर बना दिया है।

म्यूल अकाउंट से UPI और फिर ATM—यही था कैश निकालने का खेल

पूछताछ में सामने आए प्रारंभिक तथ्यों के अनुसार आरोपी स्थानीय लोगों से बैंक खाते, पासबुक, ATM कार्ड और SIM हासिल करते थे। इसके बाद ATM PIN और UPI ID का एक्सेस अपने पास रखते थे।

साइबर फ्रॉड से रकम आने के बाद उसे एक खाते से दूसरे खाते में ट्रांसफर किया जाता था।

म्यूल अकाउंट → UPI ट्रांसफर → दूसरा बैंक अकाउंट → ATM/CDM → कैश

इस पूरी प्रक्रिया के बाद रकम नेटवर्क में शामिल लोगों के बीच कमीशन के रूप में बांटी जाती थी।

यानी साइबर ठगी का यह खेल किसी एक व्यक्ति का नहीं, बल्कि खाते उपलब्ध कराने से लेकर रकम निकालने तक कई स्तरों पर बंटे नेटवर्क के जरिए संचालित होने के संकेत मिले हैं।

नालंदा–नवादा से हरिद्वार तक पहुंचा नेटवर्क

गिरफ्तार आरोपियों में अधिकांश नालंदा और नवादा, बिहार के रहने वाले हैं। पूछताछ में बिहार क्षेत्र से जुड़े अन्य लोगों द्वारा बैंक खाते उपलब्ध कराने और साइबर फ्रॉड की रकम के संबंध में सूचना देने की बात सामने आई है।

पुलिस अब उन लोगों की तलाश में जुटी है जो इस नेटवर्क के पीछे रहकर बैंक खाते उपलब्ध कराने, रकम ट्रांसफर कराने और कैश निकालने का काम कर रहे थे।

पांच आरोपी गिरफ्तार

हरिद्वार पुलिस ने जिन पांच आरोपियों को गिरफ्तार किया है, उनकी पहचान इस प्रकार है—

कृष्णा पाण्डे, उम्र 24 वर्ष, निवासी नालंदा बिहार।
निरंजन कुमार, उम्र 24 वर्ष, निवासी नवादा बिहार।
सन्नी, उम्र 21 वर्ष, निवासी हरिद्वार।
चन्द्रमणि कुमार, उम्र 24 वर्ष, निवासी नवादा बिहार।
चन्दन पाण्डे, उम्र 20 वर्ष, निवासी हरिद्वार।

इन धाराओं में मुकदमा, अब मास्टरमाइंड की तलाश

आरोपियों के विरुद्ध धारा 318(4), 317(2), 3(5) BNS तथा धारा 66C, 66D IT Act के अंतर्गत वैधानिक कार्रवाई की गई है।

बरामद मोबाइल फोन और लैपटॉप का विस्तृत डिजिटल परीक्षण न्यायालय की अनुमति के बाद कराया जाएगा। बैंक खातों, KYC, ट्रांजैक्शन हिस्ट्री, मोबाइल चैट और अन्य डिजिटल साक्ष्यों के आधार पर पुलिस अब म्यूल अकाउंट धारकों, सहयोगियों और नेटवर्क के मुख्य संचालकों तक पहुंचने की कोशिश कर रही है।

SSP नवनीत सिंह भुल्लर का सख्त संदेश—साइबर अपराधियों की खैर नहीं

एसएसपी हरिद्वार नवनीत सिंह भुल्लर ने साफ संदेश दिया है कि साइबर अपराधी चाहे किसी भी राज्य में छिपकर नेटवर्क चला रहे हों, हरिद्वार पुलिस उनके नेटवर्क तक पहुंचेगी और उन्हें कानून के शिकंजे में लाएगी।

पुलिस की इस कार्रवाई से साफ है कि अब साइबर अपराध के खिलाफ सिर्फ ऑनलाइन शिकायतों तक कार्रवाई सीमित नहीं है, बल्कि बैंक खातों की मनी ट्रेल, डिजिटल चैट, ATM नेटवर्क और जमीनी स्तर पर संदिग्ध गतिविधियों को जोड़कर पूरे गिरोह तक पहुंचने की रणनीति पर काम किया जा रहा है।

बरामदगी एक नजर में

35 ATM/Debit Cards | 14 Bank Passbooks | 17 SIM Cards | 18 Mobile Phones | 02 Laptops | 01 Charger | 10 ATM Covers | PAN Cards | ₹37,500 नगद | ₹2.75 करोड़ से अधिक संदिग्ध डिजिटल मनी ट्रेल

पुलिस टीम की अहम भूमिका

इस बड़ी कार्रवाई में SP City अभय सिंह, CO City शिशुपाल नेगी, CO साइबर क्राइम/भगवानपुर सुमित पाण्डे, थानाध्यक्ष नितेश शर्मा, SSI मनोज रावत, SI देवेंद्र तोमर, SI मोहन कठैत, SI गगन मैठाणी, ASI रविन्द्र गौड़, ASI देवेंद्र यादव, हेड कांस्टेबल नरेंद्र सिंह नेगी, हेड कांस्टेबल प्रमोद कुमार सहित कोतवाली श्यामपुर, साइबर क्राइम और SOG की टीम शामिल रही।

हरिद्वार पुलिस की इस कार्रवाई ने साइबर अपराधियों को साफ चेतावनी दे दी है—बैंक खाते, ATM और मोबाइल के पीछे छिपकर करोड़ों का खेल खेलने वालों तक पुलिस अब डिजिटल सुरागों के जरिए पहुंच रही है।

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