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तालाब की जमीन पर कब्जे को लेकर गढ़ गांव में बढ़ा तनाव: 468 खसरे पर आमने-सामने आए दो पक्ष,, “एक-दूसरे पर अवैध कब्जे और प्रशासन को गुमराह करने के आरोप, गांव में बढ़ी हलचल” जिसके नाम खुद तालाब भूमि पर चल रहा 122-बी का मुकदमा, वही दूसरों पर लगा रहा कब्जे के संगीन आरोप;…  नफासत खान,, “डीएम से निष्पक्ष जांच और पैमाइश की मांग, सोशल मीडिया बयानबाजी से माहौल गरमाया”

इन्तजार रजा हरिद्वार “तालाब की जमीन पर कब्जे को लेकर गढ़ गांव में बढ़ा तनाव: 468 खसरे पर आमने-सामने आए दो पक्ष,,

“एक-दूसरे पर अवैध कब्जे और प्रशासन को गुमराह करने के आरोप, गांव में बढ़ी हलचल”

जिसके नाम खुद तालाब भूमि पर चल रहा 122-बी का मुकदमा, वही दूसरों पर लगा रहा कब्जे के संगीन आरोप;…  नफासत खान,,

“डीएम से निष्पक्ष जांच और पैमाइश की मांग, सोशल मीडिया बयानबाजी से माहौल गरमाया”

हरिद्वार के ग्राम गढ़ में तालाब और ग्राम समाज की भूमि को लेकर विवाद अब गांव में तनाव का कारण बनता जा रहा है। खसरा नंबर 468 को लेकर शुरू हुआ विवाद अब दो पक्षों के बीच खुले आरोप-प्रत्यारोप में बदल गया है। दोनों पक्ष एक-दूसरे पर तालाब की जमीन पर अवैध कब्जा करने और प्रशासन को गुमराह करने के आरोप लगा रहे हैं, जिससे गांव का माहौल लगातार गर्माता जा रहा है।

मामला उस समय चर्चा में आया जब गांव निवासी नसीम पुत्र जहांगीर ने जनता दरबार में शिकायत देकर आरोप लगाया कि नफासत खान और उनके परिवार द्वारा खसरा नंबर 468 स्थित तालाब की भूमि पर कब्जा करने और बाउंड्रीवाल निर्माण का प्रयास किया जा रहा है। शिकायत में रातों-रात जमीन घेरने का आरोप भी लगाया गया था।

अब इस मामले में नफासत खान और उनके परिवार ने जिलाधिकारी हरिद्वार को शिकायती प्रार्थना पत्र देकर पलटवार किया है। उनका कहना है कि उन पर लगाए गए आरोप पूरी तरह झूठे और बेबुनियाद हैं। प्रार्थीगण का दावा है कि मौके पर न तो कोई निर्माण कार्य हुआ है और न ही किसी प्रकार की बाउंड्री बनाई गई है। उन्होंने कहा कि अभी तक प्रशासन द्वारा जमीन का सीमांकन तक नहीं कराया गया है और बिना पैमाइश किसी पर कब्जे का आरोप लगाना उचित नहीं है।

नफासत खान ने आरोप लगाया कि शिकायतकर्ता नसीम खुद तालाब की भूमि पर अवैध कब्जे के मामले में प्रशासनिक कार्रवाई का सामना कर रहा है। उनके अनुसार खसरा नंबर 468 में कथित कब्जे को लेकर नसीम के खिलाफ धारा 122-बी के तहत मुकदमा चल रहा है और प्रशासन की ओर से उसे नोटिस भी जारी किया जा चुका है।प्रार्थना पत्र में यह भी आरोप लगाया गया कि नसीम का मकान और वर्तमान निवास कथित रूप से नाले और तालाब की भूमि पर बना हुआ है। नफासत खान का कहना है कि उन्होंने इससे जुड़े दस्तावेज, फोटो और नोटिस की प्रतियां भी जिलाधिकारी कार्यालय में जमा करा दी हैं।

वहीं दूसरी ओर, गांव में इस विवाद को लेकर चर्चाओं का दौर तेज हो गया है। सोशल मीडिया पर वायरल वीडियो और बयानबाजी ने मामले को और अधिक संवेदनशील बना दिया है। दोनों पक्ष एक-दूसरे पर झूठे आरोप लगाने और गांव में बदनामी फैलाने का आरोप लगा रहे हैं।नफासत खान ने कहा कि यदि वास्तव में किसी भी व्यक्ति द्वारा तालाब या ग्राम समाज की भूमि पर कब्जा किया गया है, तो प्रशासन निष्पक्ष तरीके से पैमाइश कराए और दोषियों के खिलाफ कार्रवाई करे। उन्होंने मांग की कि पटवारी, कानूनगो और तहसील प्रशासन मौके पर पहुंचकर जमीन की वास्तविक स्थिति स्पष्ट करें ताकि गांव में फैल रहे भ्रम और तनाव को समाप्त किया जा सके।

स्थानीय लोगों का कहना है कि यदि प्रशासन ने जल्द निष्पक्ष जांच नहीं कराई तो गांव में तनाव और बढ़ सकता है। लोगों की नजर अब जिलाधिकारी हरिद्वार की कार्रवाई पर टिकी है कि प्रशासन इस पूरे विवाद में क्या रुख अपनाता है और आखिर तालाब की जमीन पर असली कब्जाधारी कौन है।

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