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दादुपुर-गोविंदपुर से बहादराबाद तक यूपी सिंचाई विभाग की जमीनों पर दबंग कब्जों का जाल! क्या अब आर.एस. भाट जैसे सख्त और निडर अफसर की जरूरत ?…. यूपी सिंचाई विभाग की करोड़ों रुपये की भूमि पर वर्षों से जमे अतिक्रमणों और हाईकोर्ट स्टे की ढाल को लेकर लगातार बढ़ी चिंता; जनता पूछ रही— आखिर कब होगी निर्णायक कार्रवाई? प्रभावशाली कब्जाधारियों पर भी बिना दबाव कार्रवाई करने वाले अधिकारियों की याद हुई ताजा, सरकारी जमीन बचाने के लिए बड़े अभियान की मांग तेज

दादुपुर-गोविंदपुर से बहादराबाद तक यूपी सिंचाई विभाग की जमीनों पर दबंग कब्जों का जाल! क्या अब आर.एस. भाट जैसे सख्त और निडर अफसर की जरूरत ?….

यूपी सिंचाई विभाग की करोड़ों रुपये की भूमि पर वर्षों से जमे अतिक्रमणों और हाईकोर्ट स्टे की ढाल को लेकर लगातार बढ़ी चिंता; जनता पूछ रही— आखिर कब होगी निर्णायक कार्रवाई?

प्रभावशाली कब्जाधारियों पर भी बिना दबाव कार्रवाई करने वाले अधिकारियों की याद हुई ताजा, सरकारी जमीन बचाने के लिए बड़े अभियान की मांग तेज

हरिद्वार। दादुपुर-गोविंदपुर, बहादराबाद तथा आसपास के क्षेत्रों में यूपी सिंचाई विभाग की भूमि पर कथित अतिक्रमणों को लेकर एक बार फिर चर्चाएं तेज हो गई हैं। क्षेत्र के लोगों का कहना है कि करोड़ों रुपये मूल्य की सरकारी जमीन पर वर्षों से कब्जे होते रहे, लेकिन प्रभावी और लगातार कार्रवाई के अभाव में समस्या और गंभीर होती चली गई।

स्थानीय नागरिकों का मानना है कि सरकारी भूमि को अतिक्रमण मुक्त कराने के लिए केवल नोटिस और कागजी कार्रवाई पर्याप्त नहीं है। इसके लिए ऐसे सख्त, ईमानदार और निडर अधिकारियों की आवश्यकता है जो किसी भी दबाव में आए बिना सरकारी संपत्ति की रक्षा को प्राथमिकता दें। इसी कारण क्षेत्र में कई लोग पूर्व में अपनी सख्त कार्यशैली और बेखौफ कार्रवाई के लिए चर्चित रहे अधिकारियों का उदाहरण देते हुए कह रहे हैं कि आज फिर वैसी ही प्रशासनिक इच्छाशक्ति की जरूरत है।

लोगों का कहना है कि नहर पट्टियों, विभागीय भूमि और जल संसाधनों से जुड़ी संपत्तियों पर बढ़ते अतिक्रमण न केवल सरकारी भूमि को नुकसान पहुंचा रहे हैं, बल्कि भविष्य की विकास योजनाओं और सिंचाई व्यवस्था पर भी असर डाल रहे हैं। यदि समय रहते कठोर कदम नहीं उठाए गए तो स्थिति और जटिल हो सकती है।

क्षेत्रवासियों की मांग है कि राजस्व विभाग, प्रशासन और सिंचाई विभाग की संयुक्त टीम बनाकर पूरे क्षेत्र का ड्रोन सर्वे, सीमांकन और भौतिक सत्यापन कराया जाए। जहां भी अवैध कब्जे पाए जाएं, वहां बिना किसी भेदभाव के कार्रवाई सुनिश्चित की जाए।

दादुपुर-गोविंदपुर और बहादराबाद क्षेत्र में अब यह चर्चा आम हो गई है कि सरकारी भूमि बचाने के लिए केवल आदेश नहीं, बल्कि मैदान में उतरकर परिणाम देने वाले अधिकारियों की जरूरत है। लोगों का कहना है कि जब तक प्रशासन सख्त रुख नहीं अपनाएगा, तब तक सरकारी जमीनों पर कब्जों का सिलसिला रुकना मुश्किल होगा।

अब निगाहें जिला प्रशासन और सिंचाई विभाग पर टिकी हैं। जनता को उम्मीद है कि सरकारी भूमि की सुरक्षा के लिए जल्द ही व्यापक अभियान शुरू होगा और करोड़ों रुपये की सरकारी संपत्ति को अतिक्रमण मुक्त कराने की दिशा में ठोस कदम उठाए जाएंगे।

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