प्रधानमंत्री को भेजी गई शिकायत से सियासी हलचल: ‘आंदोलन की फंडिंग, हिंसा और राहुल गांधी की भूमिका’ की जांच की उठी मांग,, हरिद्वार के भदौरिया अधिवक्ताओं ने पीएमओ को भेजा ज्ञापन, विदेशी फंडिंग से लेकर सरकारी संपत्ति के नुकसान की रिकवरी तक उठाए 10 बड़े सवाल

प्रधानमंत्री को भेजी गई शिकायत से सियासी हलचल: ‘आंदोलन की फंडिंग, हिंसा और राहुल गांधी की भूमिका’ की जांच की उठी मांग,,
हरिद्वार के भदौरिया अधिवक्ताओं ने पीएमओ को भेजा ज्ञापन, विदेशी फंडिंग से लेकर सरकारी संपत्ति के नुकसान की रिकवरी तक उठाए 10 बड़े सवाल
हरिद्वार। राजधानी दिल्ली में हाल के आंदोलनों और प्रदर्शन के दौरान हुई हिंसा, कानून-व्यवस्था की स्थिति तथा कथित राजनीतिक फंडिंग को लेकर हरिद्वार के कुछ अधिवक्ताओं ने प्रधानमंत्री कार्यालय (पीएमओ) को विस्तृत शिकायत पत्र भेजकर व्यापक जांच की मांग की है। शिकायत में आंदोलन के दौरान हुई हिंसा, सरकारी संपत्ति को नुकसान, पुलिसकर्मियों पर हमले और कथित राजनीतिक संरक्षण जैसे गंभीर आरोप लगाए गए हैं। साथ ही केंद्र सरकार से पूरे मामले की निष्पक्ष जांच कर दोषियों के विरुद्ध कड़ी कार्रवाई करने का अनुरोध किया गया है।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को संबोधित इस प्रार्थना पत्र में अधिवक्ता अरुण भदौरिया, अधिवक्ता कमल भदौरिया तथा एलएलबी के छात्र चेतन भदौरिया ने आरोप लगाया है कि हाल के दिनों में विभिन्न आंदोलनों के दौरान कानून-व्यवस्था गंभीर रूप से प्रभावित हुई है। उनका कहना है कि कुछ प्रदर्शन शांतिपूर्ण न होकर हिंसक रूप ले चुके हैं, जिनमें सरकारी संपत्ति को नुकसान पहुंचाया गया तथा सुरक्षा बलों पर भी हमले किए गए।
शिकायतकर्ताओं ने अपने पत्र में दावा किया है कि आंदोलन की आड़ में कुछ असामाजिक तत्व सक्रिय रहे और उन्होंने बैरिकेडिंग तोड़ी, आगजनी की तथा पुलिसकर्मियों पर हमला किया। पत्र में यह भी आरोप लगाया गया है कि प्रदर्शन में शामिल सभी लोग वास्तविक छात्र नहीं थे, बल्कि कथित रूप से बाहरी तत्व भी मौजूद थे। हालांकि, इन आरोपों के समर्थन में शिकायतकर्ताओं ने सार्वजनिक रूप से कोई स्वतंत्र साक्ष्य प्रस्तुत नहीं किया है।
ज्ञापन में आंदोलन के लिए धन कहां से आया, इसका पूरा वित्तीय ऑडिट कराने की मांग की गई है। शिकायतकर्ताओं का कहना है कि टेंट, मंच, भोजन, परिवहन, प्रचार-प्रसार तथा अन्य व्यवस्थाओं पर हुए खर्च की जांच की जाए और यह पता लगाया जाए कि भुगतान नकद हुआ या बैंकिंग माध्यम से। यदि बैंकिंग माध्यम से भुगतान हुआ है तो संबंधित अभिलेखों और खातों का परीक्षण कराया जाए।
शिकायत में विदेशी फंडिंग की भी जांच कराने की मांग की गई है। प्रार्थना पत्र में आग्रह किया गया है कि यदि किसी प्रकार की विदेशी आर्थिक सहायता या अवैध स्रोत से धन मिलने के संकेत मिलते हैं तो सक्षम एजेंसियों से विस्तृत जांच कराई जाए। साथ ही यह भी मांग की गई है कि सरकारी संपत्ति को हुए नुकसान की भरपाई दोषी व्यक्तियों से कराई जाए और हिंसा में शामिल लोगों की पहचान कर उनके खिलाफ कानूनी कार्रवाई की जाए।
शिकायतकर्ताओं ने विपक्ष के नेता राहुल गांधी पर भी गंभीर आरोप लगाए हैं। पत्र में दावा किया गया है कि छात्रों का राजनीतिक उपयोग किया गया तथा हिंसक तत्वों को समर्थन मिला। इसी आधार पर राहुल गांधी के विरुद्ध मुकदमा दर्ज करने की मांग भी की गई है। इसके अतिरिक्त देश के सभी कॉलेजों में छात्रसंघ चुनाव तत्काल बंद कराने की मांग भी ज्ञापन में शामिल है।
प्रार्थना पत्र में कुल 10 प्रमुख मांगें रखी गई हैं, जिनमें आंदोलन की फंडिंग की जांच, खर्च का ऑडिट, विदेशी फंडिंग की पड़ताल, सरकारी संपत्ति के नुकसान की रिकवरी, हिंसा भड़काने वालों पर कार्रवाई, कथित गैर-छात्र उपद्रवियों की पहचान तथा उनके पीछे मौजूद संगठनों और राजनीतिक दलों की जांच शामिल है।
यह शिकायत पत्र 23 जुलाई 2026 को तैयार किया गया था, जिस पर प्रधानमंत्री कार्यालय की डाक अनुभाग की प्राप्ति मुहर 27 जुलाई 2026 की अंकित बताई गई है। इससे स्पष्ट है कि शिकायत प्रधानमंत्री कार्यालय तक पहुंच चुकी है। हालांकि, इस संबंध में प्रधानमंत्री कार्यालय अथवा किसी जांच एजेंसी की ओर से अभी तक कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया या कार्रवाई की सार्वजनिक पुष्टि नहीं हुई है।
उल्लेखनीय है कि शिकायत पत्र में लगाए गए आरोप शिकायतकर्ताओं के दावे हैं। इनकी स्वतंत्र रूप से आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है। संबंधित राजनीतिक दलों या जिन व्यक्तियों के विरुद्ध आरोप लगाए गए हैं, उनकी ओर से इस शिकायत पर कोई सार्वजनिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है। ऐसे मामलों में अंतिम निष्कर्ष सक्षम जांच एजेंसियों की जांच और उपलब्ध साक्ष्यों के आधार पर ही तय होगा।
अब निगाहें इस बात पर टिकी हैं कि केंद्र सरकार और संबंधित जांच एजेंसियां इस शिकायत पर क्या कदम उठाती हैं। यदि मामले में जांच के आदेश दिए जाते हैं तो आंदोलन की फंडिंग, हिंसा और कथित राजनीतिक भूमिका जैसे मुद्दों पर व्यापक पड़ताल संभव हो सकती है।



