उत्तराखंडएक्सक्लूसिव खबरें

उर्स से पहले दरगाह पिरान कलियर में फिर गरमाया कथित अवैध उगाही का मामला: मंत्री से लेकर डीएम तक पहुंची शिकायत, प्रशासन पर भी उठे सवाल,, पूर्व शिकायतों, सीसीटीवी फुटेज और कार्यालय आदेश का हवाला देकर कर्मचारी पर कार्रवाई की मांग, निष्पक्ष जांच व निलंबन की उठी मांग,, शिकायतकर्ताओं का आरोप—अगर समय रहते कार्रवाई नहीं हुई तो उर्स के दौरान दरगाह की गरिमा, श्रद्धालुओं के हित और सरकारी छवि को हो सकता है नुकसान

उर्स से पहले दरगाह पिरान कलियर में फिर गरमाया कथित अवैध उगाही का मामला: मंत्री से लेकर डीएम तक पहुंची शिकायत, प्रशासन पर भी उठे सवाल,,

पूर्व शिकायतों, सीसीटीवी फुटेज और कार्यालय आदेश का हवाला देकर कर्मचारी पर कार्रवाई की मांग, निष्पक्ष जांच व निलंबन की उठी मांग,,

शिकायतकर्ताओं का आरोप—अगर समय रहते कार्रवाई नहीं हुई तो उर्स के दौरान दरगाह की गरिमा, श्रद्धालुओं के हित और सरकारी छवि को हो सकता है नुकसान

हरिद्वार/पिरान कलियर। विश्व प्रसिद्ध दरगाह हजरत अलाउद्दीन अली अहमद साबिर पाक (रह.) पिरान कलियर में कथित अवैध उगाही का मामला एक बार फिर सुर्खियों में आ गया है। उर्स से ठीक पहले इस मामले ने नया मोड़ ले लिया है। अल्पसंख्यक कल्याण मंत्री, सचिव, उत्तराखंड वक्फ बोर्ड, जिलाधिकारी हरिद्वार, संयुक्त मजिस्ट्रेट रुड़की और दरगाह प्रबंधक सहित छह अधिकारियों को भेजी गई शिकायत में एक कर्मचारी पर श्रद्धालुओं से कथित अवैध उगाही करने के गंभीर आरोप लगाए गए हैं। साथ ही आरोप है कि पूर्व में शिकायतें और साक्ष्य उपलब्ध कराने के बावजूद प्रभावी कार्रवाई नहीं की गई।

शिकायत में कहा गया है कि संबंधित कर्मचारी का नाम वर्ष 2024 में दरगाह कार्यालय द्वारा जारी कार्यालय आदेश में भी शामिल था। उस समय कथित रूप से सीसीटीवी फुटेज के आधार पर कई कर्मचारियों से स्पष्टीकरण मांगा गया था और उन पर अनियमितताओं के आरोप लगाए गए थे। शिकायतकर्ताओं का दावा है कि इसके बावजूद संबंधित कर्मचारी वर्तमान में फिर से मुख्य स्थान पर ड्यूटी कर रहा है, जिससे श्रद्धालुओं से कथित अवैध वसूली की शिकायतें लगातार मिल रही हैं।

शिकायतकर्ताओं ने आरोप लगाया है कि पिछले कई महीनों में विभिन्न अधिकारियों को कई बार लिखित शिकायतें दी गईं, सीसीटीवी फुटेज, वीडियो और अन्य दस्तावेज भी उपलब्ध कराए गए, लेकिन मामला केवल जांच के नाम पर लंबित रखा गया। उनका आरोप है कि प्रभावी कार्रवाई नहीं होने से दोषियों के हौसले बुलंद हो रहे हैं और इससे दरगाह प्रशासन की कार्यप्रणाली पर भी सवाल उठ रहे हैं।

शिकायत में यह भी कहा गया है कि दरगाह अंतरराष्ट्रीय स्तर का धार्मिक एवं आध्यात्मिक केंद्र है, जहां देश-विदेश से लाखों जायरीन और श्रद्धालु पहुंचते हैं। ऐसे में यदि कथित शिकायतों पर समय रहते निष्पक्ष कार्रवाई नहीं होती है तो इससे दरगाह की गरिमा, श्रद्धालुओं का विश्वास और उत्तराखंड सरकार की छवि प्रभावित हो सकती है।

शिकायतकर्ताओं ने मांग की है कि संबंधित कर्मचारी के खिलाफ किसी स्वतंत्र एवं वरिष्ठ अधिकारी से निष्पक्ष जांच कराई जाए। जांच पूरी होने तक उसे तत्काल प्रभाव से ड्यूटी से हटाकर निलंबित किया जाए। पूर्व में उपलब्ध कराए गए सीसीटीवी फुटेज, वीडियो और सभी शिकायतों को जांच का अभिन्न हिस्सा बनाया जाए। यदि आरोप सही पाए जाते हैं तो सेवा नियमों और प्रचलित कानूनी प्रावधानों के तहत कठोर विभागीय एवं विधिक कार्रवाई की जाए।

इसके अलावा शिकायत में यह मांग भी की गई है कि जिन अधिकारियों ने पर्याप्त शिकायतों और साक्ष्यों के बावजूद प्रभावी कार्रवाई नहीं की, उनकी भूमिका की भी निष्पक्ष जांच कर जवाबदेही तय की जाए। साथ ही भविष्य में श्रद्धालुओं से किसी भी प्रकार की कथित अवैध उगाही रोकने के लिए मजबूत निगरानी व्यवस्था लागू करने की मांग की गई है।

अब यह मामला प्रशासन और वक्फ बोर्ड के लिए बड़ी परीक्षा बन गया है। उर्स शुरू होने से पहले इन शिकायतों पर क्या कार्रवाई होती है, इस पर श्रद्धालुओं, स्थानीय लोगों और दरगाह से जुड़े सभी पक्षों की निगाहें टिकी हुई हैं। हालांकि, इन शिकायतों में लगाए गए आरोप शिकायतकर्ताओं के हैं और संबंधित अधिकारियों या आरोपित कर्मचारी की ओर से इस संबंध में सार्वजनिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है। यदि उनका पक्ष प्राप्त होता है तो उसे भी प्रमुखता से प्रकाशित किया जाएगा।

Related Articles

Back to top button