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निर्जला एकादशी पर हरिद्वार में आस्था का महापर्व! गंगा घाटों पर उमड़ा श्रद्धालुओं का सैलाब, स्नान-दान से गूंज उठी धर्मनगरी,, सुबह से हरकी पैड़ी सहित प्रमुख घाटों पर श्रद्धालुओं की भारी भीड़, भगवान विष्णु की आराधना के साथ किया पुण्य स्नान और दान-पुण्य,, प्रशासन ने मेला क्षेत्र को 12 जोन और 40 सेक्टरों में बांटा, सुरक्षा और यातायात व्यवस्था के लिए व्यापक इंतजाम; श्रद्धालुओं से स्वच्छता बनाए रखने की अपील,,

निर्जला एकादशी पर हरिद्वार में आस्था का महापर्व! गंगा घाटों पर उमड़ा श्रद्धालुओं का सैलाब, स्नान-दान से गूंज उठी धर्मनगरी,,

सुबह से हरकी पैड़ी सहित प्रमुख घाटों पर श्रद्धालुओं की भारी भीड़, भगवान विष्णु की आराधना के साथ किया पुण्य स्नान और दान-पुण्य,,

प्रशासन ने मेला क्षेत्र को 12 जोन और 40 सेक्टरों में बांटा, सुरक्षा और यातायात व्यवस्था के लिए व्यापक इंतजाम; श्रद्धालुओं से स्वच्छता बनाए रखने की अपील,,

इन्तजार रजा, हरिद्वार।
निर्जला एकादशी के पावन अवसर पर बुधवार सुबह से ही धर्मनगरी हरिद्वार आस्था और श्रद्धा के रंग में रंगी नजर आई। हरकी पैड़ी सहित सभी प्रमुख गंगा घाटों पर हजारों श्रद्धालुओं ने मां गंगा में आस्था की डुबकी लगाकर भगवान विष्णु की पूजा-अर्चना की तथा फल, जल और अन्य आवश्यक वस्तुओं का दान कर धार्मिक परंपराओं का निर्वहन किया। घाटों पर सुबह से ही श्रद्धालुओं की लंबी कतारें दिखाई दीं और पूरा वातावरण “हर-हर गंगे” तथा “जय श्री हरि” के जयघोष से गूंज उठा।

सनातन धर्म में निर्जला एकादशी को वर्ष की सभी 24 एकादशियों में सबसे श्रेष्ठ और पुण्यदायी माना जाता है। धार्मिक मान्यता है कि इस दिन बिना जल ग्रहण किए भगवान विष्णु का व्रत और पूजा करने से पूरे वर्ष की सभी एकादशियों के समान पुण्य प्राप्त होता है। महर्षि वेदव्यास द्वारा महाभारत काल में भीमसेन को इस व्रत का महत्व बताए जाने की कथा भी इस पर्व से जुड़ी हुई है। इसी आस्था के चलते देश के विभिन्न राज्यों से बड़ी संख्या में श्रद्धालु हरिद्वार पहुंचे।

श्रद्धालुओं ने गंगा स्नान के बाद मंदिरों में दर्शन किए और जरूरतमंद लोगों को जल, फल, वस्त्र तथा अन्य सामग्री का दान किया। कई श्रद्धालुओं ने इसे आत्मिक शांति और परिवार की सुख-समृद्धि का माध्यम बताया। श्रद्धालुओं का कहना है कि मां गंगा में स्नान और भगवान विष्णु की आराधना से जीवन में सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है तथा पितरों की कृपा भी प्राप्त होती है।

श्रद्धालुओं की भारी भीड़ को देखते हुए जिला प्रशासन और पुलिस ने व्यापक सुरक्षा व्यवस्था की। अपर जिलाधिकारी जितेंद्र कुमार ने बताया कि निर्जला एकादशी स्नान पर्व को सकुशल संपन्न कराने के लिए मेला क्षेत्र को 12 जोन और 40 सेक्टरों में विभाजित किया गया है। प्रत्येक जोन और सेक्टर में मजिस्ट्रेट, पुलिस अधिकारी और अन्य कर्मचारियों की तैनाती की गई है ताकि श्रद्धालुओं को किसी प्रकार की असुविधा का सामना न करना पड़े। घाटों पर लगातार निगरानी रखी जा रही है तथा यातायात व्यवस्था को भी सुचारु बनाए रखने के लिए विशेष इंतजाम किए गए हैं।

अपर जिलाधिकारी ने श्रद्धालुओं से अपील की कि वे गंगा घाटों पर स्वच्छता बनाए रखें, प्रशासन के दिशा-निर्देशों का पालन करें तथा किसी भी अफवाह पर ध्यान न दें। प्रशासन का उद्देश्य है कि सभी श्रद्धालु सुरक्षित वातावरण में स्नान और पूजा-अर्चना कर सकें।

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