उर्स मेले से पहले दरगाह प्रबंधन पर उठे बड़े सवाल: दुकान नंबर-06 के ठेके के बाद जारी आदेश पर संदेह में घिरा दरगाह सिस्टम, पारदर्शिता को लेकर बढ़ीं चर्चाएं,, जिम्मेदारी पर चुप्पी क्यों,, दुकान नंबर-06 का ठेका होने के बाद ठेकेदार के पक्ष में कथित अतिरिक्त आदेश क्यों? ठेका निरस्त कर दोबारा विज्ञप्ति जारी करने की मांग तेज ,, दरगाह की लुटती संपत्ति, ठेका व्यवस्था और कथित ‘फ्रेंचाइजी मॉडल’ की निष्पक्ष जांच की मांग, उर्स मेले से पहले डीएम हरिद्वार से जिम्मेदारो से जवाबदेही सुनिश्चित करने की अपील,,

उर्स मेले से पहले दरगाह प्रबंधन पर उठे बड़े सवाल: दुकान नंबर-06 के ठेके के बाद जारी आदेश पर संदेह में घिरा दरगाह सिस्टम, पारदर्शिता को लेकर बढ़ीं चर्चाएं,, जिम्मेदारी पर चुप्पी क्यों,,
दुकान नंबर-06 का ठेका होने के बाद ठेकेदार के पक्ष में कथित अतिरिक्त आदेश क्यों? ठेका निरस्त कर दोबारा विज्ञप्ति जारी करने की मांग तेज ,,
दरगाह की लुटती संपत्ति, ठेका व्यवस्था और कथित ‘फ्रेंचाइजी मॉडल’ की निष्पक्ष जांच की मांग, उर्स मेले से पहले डीएम हरिद्वार से जिम्मेदारो से जवाबदेही सुनिश्चित करने की अपील,,
पिरान कलियर/हरिद्वार। विश्व प्रसिद्ध दरगाह हज़रत अलाउद्दीन अली अहमद साबिर पाक एक बार फिर चर्चा के केंद्र में है। उर्स मेले से पहले दरगाह की ठेका व्यवस्था, दुकान नंबर-06 के ठेके, उसके बाद जारी हुए कथित विवादित आदेशों और कथित “फ्रेंचाइजी मॉडल” को लेकर स्थानीय स्तर पर असंतोष बढ़ता दिखाई दे रहा है। व्यापारियों, सामाजिक संगठनों और स्थानीय लोगों का कहना है कि पूरे मामले में पारदर्शिता बनाए रखने के लिए निष्पक्ष जांच आवश्यक है, ताकि उठ रहे सवालों का तथ्यात्मक जवाब सामने आ सके।
स्थानीय लोगों के अनुसार, दुकान नंबर-06 का ठेका आवंटित किए जाने के बाद एक ऐसा आदेश भी जारी किया गया, जिसे कई लोग ठेकेदार के पक्ष में बताया जा रहा है। इसी को लेकर अब यह मांग उठ रही है कि यदि किसी आदेश से प्रतिस्पर्धा, समान अवसर या दरगाह की संपत्ति के हित प्रभावित हुए हैं तो उसकी स्वतंत्र समीक्षा कराई जाए। कुछ व्यापारियों ने यह भी मांग की है कि आवश्यकता पड़ने पर संबंधित ठेका निरस्त कर नई विज्ञप्ति जारी की जाए, ताकि सभी इच्छुक पक्षों को समान अवसर मिल सके।
स्थानीय व्यापारियों का कहना है कि यदि एक दुकान का ठेका पहले ही विधिवत हो चुका था, तो उसके बाद ऐसा कौन-सा प्रशासनिक आधार था, जिसके तहत कथित रूप से ठेकेदार के हित में अतिरिक्त आदेश जारी करने की आवश्यकता पड़ी। उनका कहना है कि इस संबंध में प्रशासन को सार्वजनिक रूप से स्थिति स्पष्ट करनी चाहिए ताकि भ्रम और विवाद समाप्त हो सके।
इसी के साथ दरगाह में कथित “फ्रेंचाइजी मॉडल” की चर्चाएं भी लगातार तेज हो रही हैं। स्थानीय लोगों का दावा है कि एक दुकान या एक ठेके की आड़ में अन्य स्थानों पर भी कारोबार संचालित होने जैसी बातें चर्चा का विषय बनी हुई हैं। हालांकि इन दावों की आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है, लेकिन लोगों का कहना है कि यदि ऐसी कोई व्यवस्था वास्तव में मौजूद है तो उसकी निष्पक्ष जांच कराई जानी चाहिए।
गरीब दुकानदारों और छोटे व्यापारियों में भी असंतोष देखा जा रहा है। उनका कहना है कि हाल के कुछ आदेशों से उनकी आजीविका प्रभावित हुई है। कई व्यापारी आरोप नहीं, बल्कि यह सवाल उठा रहे हैं कि क्या सभी को समान अवसर दिया गया? क्या निर्णय लेने से पहले सभी पक्षों की बात सुनी गई? और क्या दरगाह की संपत्ति से जुड़े फैसले पूरी पारदर्शिता के साथ लिए गए?
हलवा-पराठा, सोहन हलवा और शीरमाल से जुड़े पूर्व में सामने आए विवादित आदेशों को लेकर भी स्थानीय स्तर पर चर्चाएं जारी हैं। लोगों का कहना है कि इन मामलों पर भी जिम्मेदार अधिकारियों की ओर से स्पष्ट स्थिति सामने आनी चाहिए, जिससे भ्रम की स्थिति समाप्त हो और किसी भी प्रकार की अफवाहों पर विराम लगे। फिलहाल इन चर्चाओं की आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है।
दूसरी ओर हाल ही में नायब तहसीलदार यूसुफ अली द्वारा किए गए औचक निरीक्षण को स्थानीय लोग सकारात्मक कदम मान रहे हैं। निरीक्षण के दौरान उन्होंने फर्जी खादिमों, वीआईपी दर्शन के नाम पर कथित अवैध वसूली और जायरीनों के उत्पीड़न पर सख्त कार्रवाई का संदेश दिया। उन्होंने स्पष्ट किया कि श्रद्धालुओं के साथ किसी प्रकार की ब्लैकमेलिंग या अवैध वसूली बर्दाश्त नहीं की जाएगी। स्थानीय लोगों का कहना है कि यदि इसी गंभीरता से ठेका व्यवस्था और प्रशासनिक निर्णयों की भी समीक्षा हो तो व्यवस्था में लोगों का विश्वास और मजबूत होगा।
दरगाह की संपत्ति केवल आर्थिक संसाधन नहीं, बल्कि करोड़ों श्रद्धालुओं की आस्था से जुड़ी सार्वजनिक धरोहर है। इसलिए इससे जुड़े प्रत्येक ठेके, आदेश और वित्तीय निर्णय पूरी पारदर्शिता के साथ होने चाहिए। यदि कहीं कोई अनियमितता नहीं हुई है तो निष्पक्ष जांच से यह बात भी स्पष्ट हो जाएगी और यदि कहीं प्रक्रिया में कमी रही है तो संबंधित जिम्मेदार लोगों की जवाबदेही भी तय हो सकेगी।
स्थानीय स्तर पर यह चर्चा भी है कि कई लोगों ने पूरे मामले में उच्च अधिकारियों तक अपनी बात पहुंचाने का प्रयास किया, लेकिन उन्हें संतोषजनक जवाब नहीं मिला। हालांकि इस संबंध में प्रशासन की ओर से कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है। ऐसे में लोगों की अपेक्षा है कि जिला प्रशासन स्वयं संज्ञान लेकर पूरे मामले की वस्तुनिष्ठ समीक्षा करे।
उर्स मेला शुरू होने में अब अधिक समय नहीं बचा है और आने वाले दिनों में लाखों जायरीन दरगाह पहुंचेंगे। ऐसे में व्यवस्था की पारदर्शिता, ठेका प्रक्रिया की निष्पक्षता और व्यापारियों के हितों की सुरक्षा को लेकर उठ रहे सवालों का समय रहते समाधान होना आवश्यक माना जा रहा है। स्थानीय लोगों का कहना है कि यदि दुकान नंबर-06 के ठेके के बाद जारी कथित विवादित आदेशों, ठेका प्रक्रिया और कथित “फ्रेंचाइजी मॉडल” की निष्पक्ष जांच होती है तो इससे दरगाह की साख मजबूत होगी और जनता का भरोसा भी बढ़ेगा।
अब निगाहें हरिद्वार के जिलाधिकारी पर टिकी हैं। स्थानीय व्यापारियों, सामाजिक संगठनों और आम लोगों की मांग है कि पूरे मामले की पारदर्शी जांच कराई जाए, सभी तथ्यों को सार्वजनिक किया जाए और यदि किसी स्तर पर नियमों का उल्लंघन पाया जाता है तो नियमानुसार कार्रवाई सुनिश्चित की जाए। वहीं यदि सभी प्रक्रियाएं नियमों के अनुरूप हैं, तो प्रशासन को भी आधिकारिक रूप से स्थिति स्पष्ट करनी चाहिए, ताकि उर्स मेले से पहले किसी प्रकार की अनिश्चितता और विवाद की स्थिति समाप्त हो सके।



