सरकारी जमीन पर ‘डीएम का एक्शन मोड’, 12 विभागों को नोटिस… अब अतिक्रमणकारियों की खैर नहीं!…=== पॉलीगॉन मैपिंग में लापरवाही पर डॉ. आशीष चौहान सख्त, 100 से ज्यादा संपत्तियां लंबित मिलीं तो अफसरों पर गिरेगी गाज

सरकारी जमीन पर ‘डीएम का एक्शन मोड’, 12 विभागों को नोटिस… अब अतिक्रमणकारियों की खैर नहीं!…===
पॉलीगॉन मैपिंग में लापरवाही पर डॉ. आशीष चौहान सख्त, 100 से ज्यादा संपत्तियां लंबित मिलीं तो अफसरों पर गिरेगी गाज

देहरादून। सरकारी जमीन और सरकारी संपत्तियों पर नजर गड़ाए बैठे अतिक्रमणकारियों के लिए जिला प्रशासन ने अब ‘नो एंट्री’ का बोर्ड लगा दिया है। सरकारी परिसंपत्तियों की सीमाएं तय करने से लेकर अतिक्रमण हटाने तक प्रशासन ने पूरी कार्रवाई को डिजिटल ट्रैक पर लाने की तैयारी कर ली है। कलेक्ट्रेट सभागार में हुई समीक्षा बैठक में जिलाधिकारी डॉ. आशीष चौहान का रुख बेहद सख्त नजर आया। उन्होंने साफ कर दिया कि सरकारी जमीन की सुरक्षा में अब लापरवाही की कोई गुंजाइश नहीं होगी।
बैठक में सरकारी परिसंपत्तियों की सेटेलाइट पॉलीगॉन मैपिंग की विभागवार समीक्षा की गई। इसका उद्देश्य सरकारी जमीन की वास्तविक सीमा को डिजिटल तरीके से चिन्हित करना और उसकी जानकारी उत्तराखंड सरकारी परिसंपत्ति प्रणाली यानी यूके-जीएएमएस पोर्टल पर दर्ज करना है।
डीएम ने अधिकारियों को निर्देश दिए कि प्रत्येक विभाग अपनी परिसंपत्तियों की पॉलीगॉन मैपिंग जल्द पूरी करे और निर्धारित विवरण पोर्टल पर अनिवार्य रूप से अपलोड करे। पोर्टल पर किसी सरकारी संपत्ति पर अतिक्रमण प्रदर्शित होता है तो संबंधित विभाग तत्काल नियमानुसार कार्रवाई सुनिश्चित करेगा।
12 विभागों की फाइल खुली, सीधे कारण बताओ नोटिस का आदेश
समीक्षा के दौरान जब सामने आया कि 12 विभागों ने अभी तक पॉलीगॉन मैपिंग का काम शुरू ही नहीं किया, तो प्रशासन ने तत्काल एक्शन का फैसला लिया। जिलाधिकारी ने इन सभी विभागों को कारण बताओ नोटिस जारी करने के निर्देश दिए।
इनमें विजिलेंस, उच्च शिक्षा निदेशालय, शहरी विकास निदेशालय, सूचना प्रौद्योगिकी एजेंसी, राज्य संपदा विभाग और यूकॉस्ट समेत अन्य विभाग शामिल हैं।
डीएम ने यह भी स्पष्ट किया कि जिन विभागों की 100 से अधिक सरकारी परिसंपत्तियों की मैपिंग अभी लंबित है, उनके खिलाफ चेतावनी नोटिस जारी किया जाएगा। यानी अब लंबित फाइलों और अधूरे डिजिटल रिकॉर्ड पर भी प्रशासन की सीधी नजर रहेगी।
16 विभागों ने पूरा किया मिशन, 41 अभी एक्शन में
बैठक में बताया गया कि जिले के 16 विभागों ने अपनी परिसंपत्तियों की पॉलीगॉन मैपिंग का काम 100 प्रतिशत पूरा कर लिया है। वहीं 41 विभागों में मैपिंग का काम प्रगति पर है। शेष विभागों को भी लंबित कार्य युद्धस्तर पर पूरा करने के निर्देश दिए गए।
जिलाधिकारी ने कहा कि सरकारी जमीन और परिसंपत्तियों की सुरक्षा प्रशासन की प्राथमिकता है। माननीय उच्च न्यायालय और शासन के आदेशों का अनुपालन प्राथमिकता के आधार पर सुनिश्चित किया जाए। उन्होंने अधिकारियों को यह भी चेतावनी दी कि अपेक्षित प्रगति नहीं मिलने पर संबंधित विभागीय अधिकारियों की व्यक्तिगत जिम्मेदारी तय की जाएगी और लापरवाही मिलने पर कड़ी कार्रवाई होगी।
सरकारी जमीन पर कब्जे का डिजिटल हिसाब—अब हर सीमा कैमरे की नजर में
पॉलीगॉन मैपिंग के जरिए सरकारी संपत्तियों का डिजिटल रिकॉर्ड तैयार होने से भविष्य में उनकी सीमाओं की पहचान आसान होगी। प्रशासन का मकसद केवल रिकॉर्ड तैयार करना नहीं, बल्कि सरकारी जमीन को अतिक्रमण से सुरक्षित रखना भी है।
बैठक में अपर जिलाधिकारी प्रशासन स्मृता परमार, एमडीडीए संयुक्त सचिव गौरव चटवाल, जिला अर्थ एवं संख्या अधिकारी शशिकांत गिरी, लोनिवि अधिशासी अभियंता नीरज कुमार, जल संस्थान अधिशासी अभियंता राजेंद्र पाल, जिला क्रीड़ा अधिकारी एस. गुरंग, जिला शिक्षा अधिकारी प्रेमलाल भारती, डीपीओ जीतेंद्र कुमार, जिला प्रावेशन अधिकारी मीना बिष्ट समेत विभिन्न विभागों के अधिकारी मौजूद रहे।
अब तस्वीर साफ है—सरकारी जमीन की पहचान होगी, सीमा डिजिटल नक्शे पर दर्ज होगी और अतिक्रमण मिला तो कार्रवाई का रास्ता भी साफ होगा। प्रशासन का संदेश भी साफ है—सरकारी संपत्ति पर कब्जा नहीं, रिकॉर्ड में पारदर्शिता और कार्रवाई में तेजी।



