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संसद भवन के बाहर श्रीराम की तस्वीर के साथ कथित प्रदर्शन पर हरिद्वार से कानूनी नोटिस, पप्पू यादव, राहुल गांधी और अवधेश प्रसाद से मांगा जवाब,, एडवोकेट अरुण भदौरिया ने अधिवक्ता कमल भदौरिया के माध्यम से भेजा नोटिस, तीन दिन में सनातनियों से सार्वजनिक क्षमा याचना की मांग,, नोटिस में धार्मिक भावनाएं आहत करने, भगवा वस्त्र के कथित दुरुपयोग और संसद परिसर के बाहर प्रदर्शन को लेकर उठाए सवाल; जवाब न मिलने पर हरिद्वार न्यायालय में अभियोग दायर करने की चेतावनी

संसद भवन के बाहर श्रीराम की तस्वीर के साथ कथित प्रदर्शन पर हरिद्वार से कानूनी नोटिस, पप्पू यादव, राहुल गांधी और अवधेश प्रसाद से मांगा जवाब,,

एडवोकेट अरुण भदौरिया ने अधिवक्ता कमल भदौरिया के माध्यम से भेजा नोटिस, तीन दिन में सनातनियों से सार्वजनिक क्षमा याचना की मांग,,

नोटिस में धार्मिक भावनाएं आहत करने, भगवा वस्त्र के कथित दुरुपयोग और संसद परिसर के बाहर प्रदर्शन को लेकर उठाए सवाल; जवाब न मिलने पर हरिद्वार न्यायालय में अभियोग दायर करने की चेतावनी

हरिद्वार। हरिद्वार के अधिवक्ता अरुण भदौरिया ने सांसद पप्पू यादव, लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी तथा सांसद अवधेश प्रसाद को अधिवक्ता कमल भदौरिया के माध्यम से कानूनी नोटिस भेजा है। नोटिस में आरोप लगाया गया है कि 31 जुलाई 2026 को नई दिल्ली स्थित संसद भवन के सामने हुए एक कथित प्रदर्शन के दौरान भगवान श्रीराम की तस्वीर और भगवा वस्त्र का ऐसा उपयोग किया गया, जिससे करोड़ों सनातनियों की धार्मिक भावनाएं आहत हुई हैं।

नोटिस के अनुसार, अरुण भदौरिया ने बताया कि उन्होंने 31 जुलाई 2026 की शाम लगभग 7 बजे टीवी चैनलों के माध्यम से यह कार्यक्रम देखा। उनका आरोप है कि प्रदर्शन के दौरान भगवान श्रीराम की तस्वीर को जिस प्रकार प्रस्तुत किया गया, उससे स्वयं उनकी तथा अनेक श्रद्धालुओं की धार्मिक भावनाएं आहत हुईं और इसे भगवान श्रीराम के प्रति अनादर के रूप में देखा गया।

नोटिस में कहा गया है कि भारतीय संविधान प्रत्येक नागरिक को अपने धर्म का पालन करने और अन्य लोगों की धार्मिक आस्था एवं प्रतीकों का सम्मान करने का अधिकार देता है। ऐसे में सार्वजनिक जीवन से जुड़े जनप्रतिनिधियों से भी धार्मिक प्रतीकों के प्रति संवेदनशीलता और सम्मान की अपेक्षा की जाती है।

अधिवक्ता अरुण भदौरिया ने नोटिस में यह भी उल्लेख किया है कि प्रदर्शन के दौरान भगवा वस्त्र धारण कर भगवान श्रीराम की तस्वीर के साथ दान लेने का कथित नाटकीय प्रदर्शन किया गया। साथ ही आरोप लगाया गया कि अन्य दो सांसदों ने जूते पहने हुए दान देने का प्रदर्शन किया, जबकि सनातन परंपरा में दान सामान्यतः नंगे पैर या जूते उतारकर दिए जाने की मान्यता है। इसे भी धार्मिक परंपराओं के प्रति अनादर बताया गया है।

नोटिस में भगवा वस्त्र को साधु-संतों की परंपरा और सम्मान का प्रतीक बताते हुए उसके कथित दुरुपयोग का भी आरोप लगाया गया है। इसके अतिरिक्त संसद भवन को देश की लोकतांत्रिक गरिमा का प्रतीक बताते हुए कहा गया है कि उसके सामने इस प्रकार का प्रदर्शन संसद की गरिमा के विपरीत है।

नोटिस में यह भी कहा गया है कि तीनों नेताओं को नोटिस प्राप्त होने के तीन दिनों के भीतर सार्वजनिक रूप से हाथ जोड़कर सनातन समाज से क्षमा याचना करनी चाहिए। साथ ही उनसे यह स्पष्टीकरण भी मांगा गया है कि उनके विरुद्ध भारतीय न्याय संहिता (बीएनएस) की धारा 196, 299, 302 तथा 3(5) के अंतर्गत कार्रवाई क्यों न की जाए।अधिवक्ता अरुण भदौरिया ने कहा है कि यदि निर्धारित अवधि में नोटिस का संतोषजनक उत्तर प्राप्त नहीं होता है, तो हरिद्वार की सक्षम न्यायालय में विधिक कार्रवाई करते हुए अभियोग दायर किया जाएगा।

(नोट: यह समाचार अधिवक्ता अरुण भदौरिया द्वारा भेजे गए कानूनी नोटिस और उसमें लगाए गए आरोपों पर आधारित है। संबंधित सांसदों की ओर से इस संबंध में कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया प्राप्त नहीं हुई है। उनका पक्ष प्राप्त होने पर उसे भी प्रमुखता से प्रकाशित किया जाएगा।)

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