जश्न-ए-ईद मिलादुन्नबी ﷺ में डूबा पिरान कलियर, मदरसा दारुल उलूम कादरिया साबरिया बरकाते रज़ा से निकला जुलूस-ए-मोहम्मदी ﷺ,, नात-ओ-दरूद की सदाओं से गूंजा कलियर, दरगाह साबिर-ए-पाक पर अकीदतमंदों ने पेश की चादर; मुल्क में अमन-ओ-अमान और खुशहाली की मांगी दुआ

जश्न-ए-ईद मिलादुन्नबी ﷺ में डूबा पिरान कलियर, मदरसा दारुल उलूम कादरिया साबरिया बरकाते रज़ा से निकला जुलूस-ए-मोहम्मदी ﷺ,,
नात-ओ-दरूद की सदाओं से गूंजा कलियर, दरगाह साबिर-ए-पाक पर अकीदतमंदों ने पेश की चादर; मुल्क में अमन-ओ-अमान और खुशहाली की मांगी दुआ

पिरान कलियर। जश्न-ए-ईद मिलादुन्नबी ﷺ के मुबारक मौके पर पिरान कलियर की रुहानी फिजा में अकीदत, मोहब्बत और खुशियों के रंग नजर आए। इस मुबारक मौके पर मदरसा दारुल उलूम कादरिया साबरिया बरकाते रज़ा की जानिब से मदरसे के संचालक हजरत अल्लामा मौलाना गुलाम नबी नूरी साहब की सरपरस्ती में पुरनूर जुलूस-ए-मोहम्मदी ﷺ निकाला गया। जुलूस में मदरसे के तलबा, उलेमा-ए-किराम, असातिजा और बड़ी तादाद में अकीदतमंदों ने शिरकत की।
जुलूस के दौरान पूरी फिजा नात-ए-पाक, दरूद-ओ-सलाम और आशिकाने रसूल ﷺ की सदाओं से गूंजती रही। अकीदतमंदों के चेहरों पर जश्न-ए-मिलाद की खुशी और मोहब्बत-ए-रसूल ﷺ का जज्बा साफ नजर आया। जुलूस में शामिल लोगों ने सरकार-ए-दो-आलम हजरत मुहम्मद ﷺ की आमद की खुशी का इजहार करते हुए मोहब्बत, भाईचारे और अमन का पैगाम दिया।
मदरसा दारुल उलूम कादरिया साबरिया बरकाते रज़ा से हुआ जुलूस का आगाज
जुलूस-ए-मोहम्मदी ﷺ का आगाज मदरसा दारुल उलूम कादरिया साबरिया बरकाते रज़ा से हुआ। मदरसे के तलबा और अकीदतमंद नात-ए-पाक पढ़ते हुए जुलूस में आगे बढ़े। उलेमा-ए-किराम और असातिजा की मौजूदगी ने जुलूस की रौनक में और इजाफा किया।जुलूस में शामिल आशिकाने रसूल ﷺ ने दरूद-ओ-सलाम पढ़ते हुए सरकार-ए-मदीना ﷺ की आमद की खुशी का इजहार किया। तलबा ने भी अदब और एहतराम के साथ जुलूस में शिरकत की।
जुलूस जैसे-जैसे अपने मुकarrर रास्ते से आगे बढ़ा, रास्ते में लोगों ने अकीदतमंदों का इस्तकबाल किया। जगह-जगह जुलूस का खैरमकदम किया गया। इस दौरान अकीदतमंदों के लिए पानी आदि की व्यवस्थाएं भी की गईं।
नात-ए-पाक और दरूद-ओ-सलाम से महकी कलियर की फिजा
जुलूस के दौरान नातख्वानों ने नात-ए-पाक पेश की। अकीदतमंद दरूद-ओ-सलाम पढ़ते हुए आगे बढ़ते रहे। बच्चों, नौजवानों और बुजुर्गों में जश्न-ए-ईद मिलादुन्नबी ﷺ को लेकर खासा जोश नजर आया।उलेमा-ए-किराम ने कहा कि हुजूर-ए-अकरम ﷺ की सीरत-ए-मुबारका पूरी इंसानियत के लिए रहमत, मोहब्बत, इंसाफ और भाईचारे का पैगाम है। हमें आपकी तालीमात पर अमल करते हुए समाज में मोहब्बत और अमन को बढ़ावा देना चाहिए।उन्होंने कहा कि ईद मिलादुन्नबी ﷺ का मुबारक मौका हमें अपने नबी-ए-करीम ﷺ की सीरत को याद करने और उनकी पाक तालीमात को अपनी जिंदगी में उतारने का पैगाम देता है।
दरगाह साबिर-ए-पाक पहुंचा जुलूस, अकीदत के साथ पेश की चादर
मदरसे से शुरू हुआ जुलूस अपने मुकarrर रास्ते से होता हुआ दरगाह साबिर-ए-पाक पहुंचा। दरगाह पहुंचने पर अकीदतमंदों ने पूरी अकीदत और एहतराम के साथ चादरपोशी की। चादरपोशी के दौरान मुल्क की सलामती, अमन-ओ-अमान, खुशहाली और तरक्की के लिए दुआ की गई। इसके साथ ही कौम और समाज की खुशहाली, आपसी इत्तेहाद और भाईचारे के लिए भी खास दुआएं मांगी गईं।दरगाह परिसर में इस दौरान रुहानी माहौल नजर आया। अकीदतमंदों ने अदब-ओ-एहतराम के साथ दुआ में शिरकत की और मुल्क में अमन कायम रहने की दुआ की।
मोहब्बत, भाईचारे और अमन का दिया पैगाम
जुलूस-ए-मोहम्मदी ﷺ में शामिल उलेमा और अकीदतमंदों ने कहा कि हुजूर-ए-अकरम ﷺ की जिंदगी पूरी इंसानियत के लिए रहमत और मोहब्बत का पैगाम है। आपकी सीरत हमें गरीबों और जरूरतमंदों की मदद, पड़ोसियों के हक अदा करने, कमजोरों के साथ रहमदिली और समाज में भाईचारा कायम करने की तालीम देती है।उन्होंने कहा कि पिरान कलियर सूफियाना रवायत और मोहब्बत की सरजमीं है। यहां की फिजा हमेशा से आपसी भाईचारे और इंसानियत का पैगाम देती रही है। जुलूस-ए-मोहम्मदी ﷺ ने भी इसी मोहब्बत और अमन के पैगाम को आम किया।
चादरपोशी और दुआ के बाद मदरसे में हुआ जुलूस का समापन
दरगाह साबिर-ए-पाक पर चादरपोशी और दुआ के बाद जुलूस वापस मदरसा दारुल उलूम कादरिया साबरिया बरकाते रज़ा की जानिब रवाना हुआ। अपने मुकarrर रास्ते से होता हुआ जुलूस मदरसे पहुंचा, जहां इसका पुरवक़ार समापन किया गया।
मदरसे के जिम्मेदारों ने जुलूस में शिरकत करने वाले तमाम तलबा, उलेमा-ए-किराम, असातिजा और अकीदतमंदों का शुक्रिया अदा किया। साथ ही लोगों से आपसी मोहब्बत, भाईचारे और अमन-ओ-अमान को कायम रखने की अपील की गई।
जश्न-ए-ईद मिलादुन्नबी ﷺ के इस मुबारक मौके पर पिरान कलियर में देर तक नात-ए-पाक, दरूद-ओ-सलाम और मोहब्बत-ए-रसूल ﷺ की सदाएं गूंजती रहीं। मदरसा दारुल उलूम कादरिया साबरिया बरकाते रज़ा की जानिब से निकाले गए जुलूस-ए-मोहम्मदी ﷺ ने अकीदत और मोहब्बत के साथ-साथ अमन, भाईचारे और इंसानियत का पैगाम भी दिया।



