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सीएम पुष्कर सिंह धामी के यूसीसी मॉडल के बाद अब निकाह पर ‘कड़ा पहरा’! वक्फ बोर्ड अध्यक्ष शादाब शम्स की बड़ी कवायद—बनेगा नया निकाहनामा,, एक निकाह, अनिवार्य रजिस्ट्रेशन और यूसीसी की शर्तें होंगी शामिल; पंजीकृत मौलवी ही पढ़ा सकेंगे निकाह, दूसरे-तीसरे-चौथे निकाह के कॉलम होंगे खत्म—9 सितंबर को यूसीसी पैनल के सामने रखा जाएगा ड्राफ्ट

मौलाना-इमामों की जवाबदेही तय करने की तैयारी, निकाह से लेकर तलाक तक हर प्रक्रिया होगी यूसीसी के दायरे में; 9 सितंबर की बैठक में नए निकाहनामे के ड्राफ्ट पर होगा बड़ा मंथन

सीएम पुष्कर सिंह धामी के यूसीसी मॉडल के बाद अब निकाह पर ‘कड़ा पहरा’! वक्फ बोर्ड अध्यक्ष शादाब शम्स की बड़ी कवायद—बनेगा नया निकाहनामा,,

एक निकाह, अनिवार्य रजिस्ट्रेशन और यूसीसी की शर्तें होंगी शामिल; पंजीकृत मौलवी ही पढ़ा सकेंगे निकाह, दूसरे-तीसरे-चौथे निकाह के कॉलम होंगे खत्म—9 सितंबर को यूसीसी पैनल के सामने रखा जाएगा ड्राफ्ट

देहरादून। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी के नेतृत्व में उत्तराखंड में लागू समान नागरिक संहिता यानी यूसीसी को अब मुस्लिम समाज की निकाह प्रक्रिया में भी प्रभावी रूप से लागू करने की दिशा में बड़ी कवायद शुरू हो गई है। उत्तराखंड वक्फ बोर्ड के अध्यक्ष शादाब शम्स ने यूसीसी के अनुरूप नया निकाहनामा तैयार कराने की जानकारी दी है। प्रस्तावित निकाहनामे में विवाह, तलाक, रजिस्ट्रेशन और निकाह पढ़ाने वाले अधिकृत मौलवी से जुड़े प्रावधानों को स्पष्ट करने की तैयारी है।

शादाब शम्स के मुताबिक उत्तराखंड मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी के नेतृत्व में यूसीसी लागू करने वाला पहला राज्य बना है। अब वक्फ बोर्ड की कोशिश है कि मुस्लिम समाज में होने वाले निकाहों से संबंधित दस्तावेज और प्रक्रिया भी यूसीसी के अनुरूप हो, ताकि कानून का उल्लंघन जाने-अनजाने में भी न हो।

दूसरा, तीसरा और चौथा निकाह वाला कॉलम खत्म—अब सिर्फ एक विवाह

प्रस्तावित निकाहनामे में सबसे बड़ा बदलाव बहुविवाह से जुड़े प्रावधानों को लेकर होगा। शादाब शम्स के अनुसार पुराने निकाहनामे में दूसरे, तीसरे और चौथे विवाह के लिए मौजूद कॉलम हटाए जाएंगे और नए प्रारूप में केवल एक विवाह का प्रावधान रखा जाएगा।

यानी निकाहनामे के जरिए यह स्पष्ट किया जाएगा कि उत्तराखंड में लागू यूसीसी के तहत विवाह संबंधी कानूनी व्यवस्था का पालन करना अनिवार्य है। एक पत्नी के रहते दूसरा निकाह कराने वाले मौलवी या संबंधित व्यक्ति पर भी कानूनी कार्रवाई की बात सामने आई है।

अब हर मौलवी नहीं पढ़ा सकेगा निकाह, बनेगी यूनिक आईडी

नए निकाहनामे के साथ निकाह पढ़ाने वाले मौलानाओं और उलेमाओं की भूमिका भी बदलने की तैयारी है। प्रस्तावित व्यवस्था के अनुसार वक्फ बोर्ड की मस्जिद कमेटियों द्वारा अधिकृत और पंजीकृत मौलवी ही निकाह पढ़ा सकेंगे। ऐसे अधिकृत निकाह कराने वालों को विशेष/यूनिक पहचान संख्या दिए जाने का प्रस्ताव है।

इस व्यवस्था का उद्देश्य निकाह की प्रक्रिया को रिकॉर्ड में लाना और यह सुनिश्चित करना है कि विवाह कराने वाले व्यक्ति की पहचान और अधिकारिक स्थिति स्पष्ट रहे।

आधार, फोटो, एफिडेविट और गवाहों का रिकॉर्ड—कागजी कार्रवाई होगी मजबूत

प्रस्तावित प्रारूप में दूल्हा-दुल्हन के आधार कार्ड, फोटो, हस्ताक्षर और शपथपत्र जैसी जानकारियों को शामिल करने की तैयारी है। गवाहों का रिकॉर्ड भी रखा जाएगा। निकाह के बाद तैयार निकाहनामे को आधिकारिक व्यवस्था में दर्ज करने और विवाह रजिस्ट्रेशन की प्रक्रिया से जोड़ने की योजना बताई गई है।

इससे भविष्य में वैवाहिक विवाद होने पर निकाह से संबंधित दस्तावेज और संबंधित लोगों का रिकॉर्ड उपलब्ध रहने की उम्मीद है।

तीन तलाक पर सख्ती, व्हाट्सऐप तलाक जैसी मनमानी पर भी रोक

शादाब शम्स के मुताबिक यूसीसी के तहत तत्काल तलाक जैसी व्यवस्था कानून के अनुरूप नहीं है। प्रस्तावित निकाहनामे में इस संबंध में स्पष्ट प्रावधान और कानूनी जानकारी शामिल करने की तैयारी है। इसका मकसद लोगों को ऐसी किसी भी कार्रवाई से बचाना है, जो कानून का उल्लंघन मानी जाए।

यानी अब निकाहनामे को सिर्फ धार्मिक दस्तावेज के रूप में नहीं, बल्कि कानूनी अधिकारों और जिम्मेदारियों की जानकारी देने वाले दस्तावेज के रूप में विकसित करने की कवायद है।

हलाला पर भी प्रस्तावित सख्ती, इद्दत को लेकर ली जाएगी कानूनी राय

प्रस्तावित निकाहनामे में हलाला जैसी प्रथाओं पर रोक से जुड़े प्रावधान शामिल किए जाने की बात सामने आई है। इद्दत को लेकर भी कानूनी स्थिति और महिलाओं की इच्छा से जुड़े पहलुओं पर चर्चा की जा रही है। अंतिम स्वरूप यूसीसी के प्रावधानों और कानूनी राय के आधार पर तय किया जाएगा।

धर्मांतरण कर सिर्फ निकाह करने पर भी प्रस्तावित व्यवस्था में रोक

नए प्रारूप को लेकर सामने आई जानकारी के मुताबिक सिर्फ विवाह के उद्देश्य से धर्म परिवर्तन करने के मामलों को भी यूसीसी की व्यवस्था के अनुरूप नियंत्रित किए जाने की तैयारी है। ऐसे मामलों में लागू कानूनी प्रक्रिया का पालन करना होगा।

हालांकि इन सभी प्रावधानों का अंतिम स्वरूप यूसीसी से जुड़े विशेषज्ञों और संबंधित अधिकारियों के विचार-विमर्श के बाद ही तय होगा।

संपत्ति और महिलाओं के अधिकारों पर भी जोर

नए निकाहनामे में महिलाओं के अधिकारों और संपत्ति से जुड़े कानूनी प्रावधानों को लेकर भी चर्चा चल रही है। उद्देश्य यह बताया जा रहा है कि विवाह के बाद पति-पत्नी के अधिकार और जिम्मेदारियां स्पष्ट रहें तथा महिलाओं को अपने कानूनी अधिकारों की जानकारी हो।

9 सितंबर को बड़ा मंथन—यूसीसी ड्राफ्ट कमेटी के सामने पेश होगा प्रारूप

नए निकाहनामे को अंतिम रूप देने से पहले 9 सितंबर को यूसीसी से जुड़े विशेषज्ञों और ड्राफ्ट तैयार करने वाले सदस्यों के साथ महत्वपूर्ण बैठक प्रस्तावित है। रिपोर्टों के मुताबिक शादाब शम्स की ओर से तैयार किए जा रहे प्रारूप पर शत्रुघ्न सिंह, सुलेखा डंगवाल और मनु गौड़ सहित यूसीसी से जुड़े लोगों के साथ चर्चा की जा रही है।

बैठक में यह तय किया जाएगा कि प्रस्तावित निकाहनामे को किस स्वरूप में अंतिम मंजूरी दी जाए और इसे लागू करने की प्रक्रिया क्या होगी।

धामी सरकार के यूसीसी मॉडल को मुस्लिम विवाह व्यवस्था तक पहुंचाने की कोशिश

मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी की सरकार द्वारा उत्तराखंड में लागू किए गए यूसीसी के बाद वक्फ बोर्ड की यह कवायद अब बेहद महत्वपूर्ण मानी जा रही है। शादाब शम्स का दावा है कि इसका उद्देश्य किसी को परेशान करना नहीं, बल्कि मुस्लिम समाज को कानून की जानकारी देना और लोगों को जाने-अनजाने यूसीसी के उल्लंघन से बचाना है।

नया निकाहनामा लागू हुआ तो निकाह पढ़ाने वाले मौलवी, मस्जिद प्रबंधन समितियां और विवाह करने वाले पक्ष—सभी की जिम्मेदारियां पहले से अधिक स्पष्ट हो सकती हैं।

अब निगाह 9 सितंबर की बैठक पर टिकी है। इसी बैठक के बाद पता चलेगा कि यूसीसी के अनुरूप तैयार हो रहा यह नया निकाहनामा अंतिम रूप में कितना सख्त होता है और उत्तराखंड में मुस्लिम विवाह व्यवस्था पर इसका कितना व्यापक असर पड़ता है।

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