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मदरसों पर धामी का धुरंधर एक्शन जारी! रुड़की में मान्यता नहीं लेने वाले दो और मदरसे सील, उत्तराखंड में अब तक  और 13 मदरसों पर लगा दिया ताला; प्रशासन के सख्त रुख से मचा हड़कंप

मदरसों पर धामी का धुरंधर एक्शन जारी!

रुड़की में मान्यता नहीं लेने वाले दो और मदरसे सील, उत्तराखंड में अब तक  और 13 मदरसों पर लगा दिया ताला; प्रशासन के सख्त रुख से मचा हड़कंप

रुड़की/हरिद्वार। उत्तराखंड में मान्यता और नियमों को लेकर मदरसों पर सरकार का शिकंजा लगातार कसता जा रहा है। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी के सख्त रुख के बीच रुड़की क्षेत्र में मान्यता नहीं लेने वाले दो और मदरसों को सील किए जाने की कार्रवाई सामने आई है। ताजा कार्रवाई के बाद प्रदेश में अब तक कुल 13 मदरसों पर ताला लगाए जाने की बात सामने आई है। प्रशासन की इस कार्रवाई से उन संस्थानों में हड़कंप मचा हुआ है, जो निर्धारित नियम-कायदों और मान्यता प्रक्रिया से बाहर संचालित हो रहे थे।

मान्यता के बिना संचालन पर सीधा प्रहार, प्रशासन ने दिखाई सख्ती

मिली जानकारी के मुताबिक, रुड़की क्षेत्र में नियमों के दायरे में नहीं आने वाले मदरसों के खिलाफ कार्रवाई का सिलसिला जारी है। तस्वीरों में भी सील किए गए मदरसों के बाहर प्रशासनिक कार्रवाई के निशान साफ दिखाई दे रहे हैं। इससे यह संदेश साफ है कि सरकार अब केवल कागजी चेतावनियों तक सीमित रहने के बजाय जमीनी स्तर पर कार्रवाई के मूड में है।

बताया जा रहा है कि उत्तराखंड में मदरसा बोर्ड से मान्यता नहीं लेने वाले संस्थानों को लेकर पहले भी जांच और कार्रवाई की प्रक्रिया चलती रही है। अब दो और मदरसों को सील किए जाने से इस अभियान ने और जोर पकड़ लिया है।

सरकार का फोकस नियमों के अनुपालन पर है। सवाल यह है कि यदि कोई शिक्षण संस्थान संचालित हो रहा है तो क्या उसके पास आवश्यक मान्यता, दस्तावेज और निर्धारित मानकों का पालन है या नहीं? इसी सवाल के जवाब तलाशने के लिए प्रशासनिक स्तर पर जांच और कार्रवाई की जा रही है।

13 मदरसों पर ताला, आगे और बढ़ सकता है कार्रवाई का दायरा

ताजा कार्रवाई के बाद प्रदेश में सील किए गए मदरसों की संख्या 13 तक पहुंचने की बात सामने आई है। इससे साफ संकेत मिल रहे हैं कि प्रशासन अब ऐसे संस्थानों को लेकर किसी तरह की ढिलाई बरतने के मूड में नहीं है।

इस पूरे मामले में सबसे बड़ा सवाल यही है कि आखिर बिना निर्धारित मान्यता के शिक्षण संस्थान किस आधार पर संचालित हो रहे थे? यदि जांच में नियमों का उल्लंघन सामने आता है तो प्रशासन की कार्रवाई को उसी संदर्भ में देखा जा रहा है।

हालांकि, किसी भी मदरसे को लेकर अंतिम निष्कर्ष संबंधित जांच और आधिकारिक दस्तावेजों के आधार पर ही निकाला जाना चाहिए। केवल सील होने की कार्रवाई को किसी संस्था या वहां पढ़ने वाले बच्चों के खिलाफ सामान्य टिप्पणी के तौर पर नहीं देखा जा सकता।

फिलहाल धामी सरकार के सख्त रुख और प्रशासनिक कार्रवाई ने प्रदेशभर में यह संदेश जरूर दे दिया है कि शिक्षण संस्थानों के संचालन में नियमों और मान्यता की अनदेखी अब आसानी से नहीं चलेगी। रुड़की में दो और मदरसों पर हुई कार्रवाई इसी अभियान की अगली कड़ी मानी जा रही है। आने वाले दिनों में जांच का दायरा बढ़ता है या नहीं और कितने अन्य संस्थान प्रशासन की रडार पर आते हैं, इस पर सभी की नजरें टिकी हैं।

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