उत्तराखंड में निकाह के नियमों पर बड़ा बदलाव! शादाब शम्स बोले—‘गैर-मुस्लिम लड़की को मुस्लिम धर्म में दाखिल कराकर निकाह नहीं कराया जा सकेगा,, यूसीसी के अनुरूप नया निकाहनामा तैयार कर रहा वक्फ बोर्ड, एक ही निकाह का प्रावधान; हलाला और बहुविवाह पर भी सख्ती की तैयारी

उत्तराखंड में निकाह के नियमों पर बड़ा बदलाव! शादाब शम्स बोले—‘गैर-मुस्लिम लड़की को मुस्लिम धर्म में दाखिल कराकर निकाह नहीं कराया जा सकेगा,,
यूसीसी के अनुरूप नया निकाहनामा तैयार कर रहा वक्फ बोर्ड, एक ही निकाह का प्रावधान; हलाला और बहुविवाह पर भी सख्ती की तैयारी

देहरादून। उत्तराखंड में समान नागरिक संहिता (UCC) लागू होने के बाद मुस्लिम समुदाय में निकाह की प्रक्रिया को लेकर नई व्यवस्था तैयार की जा रही है। उत्तराखंड वक्फ बोर्ड के अध्यक्ष शादाब शम्स ने इस संबंध में बड़ा बयान दिया है। उन्होंने कहा है कि गैर-मुस्लिम लड़की का धर्म परिवर्तन कराकर उसके साथ निकाह कराने की व्यवस्था अब स्वीकार नहीं की जाएगी। धर्म परिवर्तन के बाद विवाह के इच्छुक लोगों को लागू कानूनी प्रावधानों के तहत आगे बढ़ना होगा।
यूसीसी के अनुरूप तैयार होगा नया निकाहनामा
वक्फ बोर्ड यूसीसी के प्रावधानों के अनुरूप नया निकाहनामा तैयार कर रहा है। शादाब शम्स के मुताबिक, इसके मसौदे में यूसीसी में मुस्लिम समुदाय के लिए किए गए प्रावधानों को शामिल किया जाएगा। मसौदे को यूसीसी तैयार करने से जुड़े विशेषज्ञों से विचार-विमर्श के बाद अंतिम रूप दिया जाना है।
एक ही निकाह का होगा प्रावधान
प्रस्तावित निकाहनामे में दूसरे, तीसरे और चौथे निकाह के लिए अलग-अलग कॉलम हटाए जाने की बात सामने आई है। यानी निकाहनामे में केवल एक विवाह का प्रावधान रखा जाएगा। वक्फ बोर्ड का कहना है कि यूसीसी के अनुरूप व्यवस्था को लागू करने के लिए निकाहनामे में आवश्यक बदलाव किए जा रहे हैं।
अधिकृत मौलवी ही करा सकेंगे निकाह
प्रस्तावित व्यवस्था में निकाह कराने वाले मौलवियों को लेकर भी नियम सख्त किए जा रहे हैं। रिपोर्टों के अनुसार, वक्फ बोर्ड की कमेटियों से अधिकृत अथवा पंजीकृत मौलवी ही निकाह पढ़ा सकेंगे। निकाह का पंजीकरण भी अनिवार्य व्यवस्था का हिस्सा होगा।
आधार कार्ड और शपथपत्र भी जरूरी होने की तैयारी
नए प्रारूप में दूल्हा-दुल्हन के आधार कार्ड तथा निकाह से पहले शपथपत्र जैसी औपचारिकताओं को शामिल किए जाने की जानकारी सामने आई है। कम उम्र में विवाह रोकने और विवाह संबंधी रिकॉर्ड को व्यवस्थित रखने पर भी जोर दिया जा रहा है।
हलाला जैसी प्रथाओं पर भी रोक का प्रस्ताव
शादाब शम्स ने यह भी कहा है कि प्रस्तावित निकाहनामे में हलाला जैसी प्रथाओं पर रोक का प्रावधान रखा जाएगा। इसके साथ ही मुस्लिम महिलाओं के संपत्ति अधिकारों और अन्य यूसीसी प्रावधानों को लेकर भी निकाहनामे में जागरूकता/प्रावधान शामिल किए जाने की बात सामने आई है।
अभी क्या स्थिति है?
महत्वपूर्ण बात यह है कि नया निकाहनामा अभी प्रस्ताव/मसौदा तैयार करने की प्रक्रिया में है। वक्फ बोर्ड इसे यूसीसी से जुड़े विशेषज्ञों के साथ विचार-विमर्श के बाद अंतिम रूप देने की तैयारी कर रहा है। हालिया रिपोर्ट के मुताबिक मसौदे पर यूसीसी पैनल के सदस्यों के साथ चर्चा प्रस्तावित है और अंतिम रूप दिए जाने के बाद इसे लागू करने की तैयारी है।
उत्तराखंड का आधिकारिक UCC पोर्टल भी बताता है कि राज्य में Uniform Civil Code, Uttarakhand Rules, 2025 लागू हैं और विवाह सहित व्यक्तिगत नागरिक मामलों के लिए एक समान कानूनी ढांचा उपलब्ध कराया गया है।
शादाब शम्स के बयान के बाद बहस तेज
शादाब शम्स के इस बयान से धर्मांतरण, निकाह और यूसीसी के प्रावधानों को लेकर राजनीतिक एवं सामाजिक चर्चा तेज हो गई है। हालांकि, प्रस्तावित निकाहनामे के अंतिम स्वरूप और उसके लागू होने के बाद ही यह स्पष्ट होगा कि व्यवहारिक स्तर पर कौन-कौन से नियम किस तरह लागू होंगे।
सवाल अब यह है—क्या नया निकाहनामा उत्तराखंड में मुस्लिम विवाह व्यवस्था का नया मॉडल बनने जा रहा है? आने वाले दिनों में वक्फ बोर्ड द्वारा इसके अंतिम प्रारूप के सामने आने के बाद तस्वीर और स्पष्ट होगी।



