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जनगणना 2027 की बड़ी तैयारी… हरिद्वार में अफसरों की ट्रेंनिंग ‘क्लास’, डिजिटल गणना से डेटा की होगी कड़ी निगरानी!…. डीएम मयूर दीक्षित ने दिए सख्त निर्देश—जनगणना सिर्फ आंकड़े नहीं, देश की विकास नीति का आधार; 16 नवंबर से स्वगणना और 1 दिसंबर से शुरू होगी जनसंख्या गणना

जनगणना 2027 की बड़ी तैयारी… हरिद्वार में अफसरों की ट्रेंनिंग ‘क्लास’, डिजिटल गणना से डेटा की होगी कड़ी निगरानी!….

डीएम मयूर दीक्षित ने दिए सख्त निर्देश—जनगणना सिर्फ आंकड़े नहीं, देश की विकास नीति का आधार; 16 नवंबर से स्वगणना और 1 दिसंबर से शुरू होगी जनसंख्या गणना

हरिद्वार, 18 सितंबर 2026।
कहीं मोबाइल एप पर दर्ज होगा परिवार का ब्यौरा, कहीं आंकड़ों का सत्यापन होगा और कहीं फील्ड में उतरकर अधिकारी यह सुनिश्चित करेंगे कि जनगणना का एक-एक आंकड़ा पूरी शुद्धता के साथ दर्ज हो। जनगणना 2027 के दूसरे चरण यानी जनसंख्या गणना को लेकर हरिद्वार में तैयारियों ने रफ्तार पकड़ ली है। शुक्रवार को जिला विकास भवन के ऑडिटोरियम में दो दिवसीय जिला स्तरीय प्रशिक्षण कार्यक्रम आयोजित किया गया, जिसमें चार्ज अधिकारियों, अतिरिक्त चार्ज अधिकारियों, जनगणना लिपिकों और तकनीकी सहायकों को जनगणना की बारीकियों से रूबरू कराया गया।

कार्यक्रम की अध्यक्षता प्रमुख जनगणना अधिकारी एवं जिलाधिकारी मयूर दीक्षित ने की। प्रशिक्षण के दौरान अधिकारियों को साफ संदेश दिया गया कि यह कोई सामान्य सरकारी काम नहीं, बल्कि राष्ट्रीय महत्व का कार्य है। इसलिए हर स्तर पर संवेदनशीलता, गंभीरता, पारदर्शिता और शत-प्रतिशत शुद्धता जरूरी है।

डीएम मयूर दीक्षित बोले—एक आंकड़ा भी गलत हुआ तो असर दूर तक जाएगा

जिलाधिकारी मयूर दीक्षित ने कहा कि जनगणना केवल लोगों की संख्या गिनने की प्रक्रिया नहीं है, बल्कि यह देश की विकास योजनाओं, संसाधनों के वितरण और नीति निर्माण की आधारशिला है। भविष्य में शिक्षा, स्वास्थ्य, आवास, सड़क, पेयजल, रोजगार सहित तमाम योजनाओं के निर्माण में जनगणना से प्राप्त आंकड़ों की महत्वपूर्ण भूमिका होगी।

उन्होंने अधिकारियों को निर्देश दिए कि प्रशिक्षण में बताई जा रही प्रत्येक प्रक्रिया को गंभीरता से समझें और फील्ड स्तर पर आने वाली संभावित समस्याओं का समाधान पहले से सुनिश्चित करें। उन्होंने कहा कि जनगणना कार्य को निर्धारित समय सीमा में पारदर्शी, व्यवस्थित और शत-प्रतिशत शुद्धता के साथ पूरा कराया जाना चाहिए।

वीसी से जुड़ीं मुख्य जनगणना अधिकारी, बोलीं—राष्ट्रीय कार्य को बनाएं मिशन

प्रशिक्षण कार्यक्रम के दौरान निदेशक एवं मुख्य प्रमुख जनगणना अधिकारी श्रीमती इवा आशीष श्रीवास्तव वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से अधिकारियों से जुड़ीं। उन्होंने कहा कि जनगणना देश का अत्यंत महत्वपूर्ण और राष्ट्रीय कार्य है। प्रथम चरण में आवास एवं उससे संबंधित गणना का कार्य अधिकारियों द्वारा बेहतर ढंग से किया गया है। अब दूसरे चरण में भी इसी गंभीरता और जिम्मेदारी के साथ कार्य करना होगा।

उन्होंने अधिकारियों से कहा कि जनगणना प्रक्रिया में पारदर्शिता और संवेदनशीलता को सर्वोच्च प्राथमिकता दी जाए तथा फील्ड में कार्य करने वाले कार्मिकों को भी सभी जरूरी जानकारी उपलब्ध कराई जाए।

डिजिटल एप से लेकर स्वगणना तक… प्रशिक्षण में खुली पूरी ‘किताब’

जनगणना कार्य निदेशालय, गृह मंत्रालय भारत सरकार एवं जनगणना निदेशालय उत्तराखंड, देहरादून से पहुंचे उप निदेशक परवीन कुमार ने अधिकारियों एवं कर्मचारियों को विस्तृत प्रशिक्षण दिया।

प्रशिक्षण में जनगणना के दूसरे चरण की कार्यप्रणाली को विस्तार से समझाया गया। अधिकारियों को बताया गया कि डिजिटल एप्लीकेशन का इस्तेमाल किस प्रकार किया जाएगा, Self Enumeration यानी स्वगणना की प्रक्रिया क्या होगी और फील्ड स्तर पर प्राप्त आंकड़ों के संग्रहण एवं सत्यापन को किस प्रकार व्यवस्थित किया जाएगा।

इसके अलावा तकनीकी प्रबंधन, डेटा की गुणवत्ता, समन्वय, अनुश्रवण और फील्ड में सामने आने वाली संभावित चुनौतियों से निपटने के तरीकों पर भी विस्तार से चर्चा हुई।

16 नवंबर से शुरू होगी स्वगणना, 1 दिसंबर से घर-घर पहुंचेगी गणना टीम

प्रशिक्षण में जनगणना 2027 के दूसरे चरण की प्रस्तावित समय-सारणी भी अधिकारियों के सामने रखी गई। इसके अनुसार स्वगणना की अवधि 16 नवंबर 2026 से 30 नवंबर 2026 तक निर्धारित की गई है।

इसके बाद 1 दिसंबर 2026 से 4 जनवरी 2027 तक जनसंख्या गणना का कार्य संचालित किया जाएगा। यानी आने वाले महीनों में हरिद्वार जिले में जनगणना से जुड़ी गतिविधियां और तेज होने वाली हैं।

अधिकारियों को निर्देश दिए गए कि दोनों चरणों की तैयारियां निर्धारित समय से पहले पूरी कर ली जाएं, ताकि फील्ड में किसी तरह की अव्यवस्था सामने न आए।

कंट्रोल रूम से फील्ड तक… हर स्तर पर निगरानी की तैयारी

प्रशिक्षण में इस बात पर विशेष जोर दिया गया कि जनगणना के दौरान केवल डेटा जुटाना ही पर्याप्त नहीं होगा, बल्कि उसकी गुणवत्ता, सत्यापन और तकनीकी शुद्धता पर भी लगातार नजर रखनी होगी। डिजिटल व्यवस्था के चलते डेटा संग्रहण की प्रक्रिया को अधिक व्यवस्थित बनाने पर जोर दिया गया।

अधिकारियों को संभावित तकनीकी दिक्कतों, फील्ड स्तर की चुनौतियों और समन्वय से जुड़े विषयों की जानकारी दी गई, ताकि जरूरत पड़ने पर तत्काल समाधान किया जा सके।

बड़े अफसरों से लेकर तकनीकी टीम तक… पूरी मशीनरी हुई सक्रिय

प्रशिक्षण कार्यक्रम में मुख्य विकास अधिकारी डॉ. ललित नारायण मिश्र, अपर जिलाधिकारी वित्त एवं राजस्व एवं जिला जनगणना अधिकारी वैभव गुप्ता, ज्वाइंट मजिस्ट्रेट रुड़की दीपक रामचन्द्र सेठ, उप जिलाधिकारी हरिद्वार योगेश मेहरा, उप जिलाधिकारी भगवानपुर देवेंद्र सिंह नेगी, तहसीलदार लक्सर दीवान सिंह राणा, जिला पंचायत राज अधिकारी एमएम खान, तहसीलदार रुड़की विकास अवस्थी, तहसीलदार शिवांगनी, अपर सांख्यिकी अधिकारी उत्तम सिंह, सांख्यिकी अन्वेषक ग्रेड-2 अमीर आलम एवं शिवम कुमार सहित जनगणना कार्य से जुड़े अधिकारी एवं कर्मचारी मौजूद रहे।

अब अगला पड़ाव फील्ड है। प्रशिक्षण पूरा होने के बाद जिम्मेदारियां तय होंगी और तय समय-सारणी के अनुसार तैयारियां जमीन पर उतरेंगी। जनगणना 2027 के दूसरे चरण में हरिद्वार प्रशासन के सामने सबसे बड़ी चुनौती यही होगी कि हर घर तक पहुंच, हर व्यक्ति का सही विवरण और हर आंकड़े की शुद्धता सुनिश्चित हो—क्योंकि यही आंकड़े आने वाले वर्षों में विकास की दिशा तय करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएंगे।

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