6 महीने से सिस्टम के चक्कर, जनता दरबार में पहुंची रिहाना तो 24 घंटे में पलटी बाजी! डीएम मयूर दीक्षित ने सुनी फरियाद, अफसरों को दौड़ाया—दिव्यांग महिला की 6 माह पुरानी परेशानी का 24 घंटे में समाधान… फरियाद पहुंची जनता दरबार, अंत्योदय गरीब परिवार की फरियाद पर डीएम मयूर दीक्षित का बड़ा एक्शन, 24 घंटे में बना राशन कार्ड

6 महीने से सिस्टम के चक्कर, जनता दरबार में पहुंची रिहाना तो 24 घंटे में पलटी बाजी!
डीएम मयूर दीक्षित ने सुनी फरियाद, अफसरों को दौड़ाया—दिव्यांग महिला की 6 माह पुरानी परेशानी का 24 घंटे में समाधान…
फरियाद पहुंची जनता दरबार, अंत्योदय गरीब परिवार की फरियाद पर डीएम मयूर दीक्षित का बड़ा एक्शन, 24 घंटे में बना राशन कार्ड

हरिद्वार। छह महीने से एक समस्या के साथ जूझ रही रिहाना… कभी इस दरवाजे तो कभी उस दफ्तर की चौखट। उम्मीद थी कि कहीं न कहीं उसकी फरियाद सुनी जाएगी। लेकिन जब महीनों की दौड़-भाग के बाद भी समाधान नहीं निकला तो रिहाना ने जनता दरबार का दरवाजा खटखटाया।
फिर कहानी ने अचानक टर्निंग प्वाइंट लिया।जनता दरबार में रिहाना ने जिलाधिकारी मयूर दीक्षित के सामने अपनी पूरी समस्या रखी। डीएम ने शिकायत सुनी, मामले की गंभीरता समझी और संबंधित अधिकारियों को तत्काल कार्रवाई के निर्देश दे दिए।इसके बाद जो हुआ, उसने रिहाना को भी राहत दे दी।
छह महीने से अटका मामला… और महज 24 घंटे में समाधान!
दिव्यांग और आर्थिक रूप से कमजोर परिवार से आने वाली रिहाना के लिए यह सिर्फ एक सरकारी कार्रवाई नहीं थी, बल्कि महीनों की परेशानी के बाद मिली बड़ी राहत थी। समस्या का समाधान होने के बाद परिवार ने राहत की सांस ली और प्रशासन की त्वरित कार्रवाई के प्रति आभार जताया।
जब डीएम ने सुनी फरियाद, सिस्टम भी दौड़ पड़ा!
जनता दरबार में शिकायत सुनने के बाद जिलाधिकारी ने अधिकारियों को साफ निर्देश दिए कि मामले को लंबित न रखा जाए और नियमानुसार जल्द से जल्द कार्रवाई की जाए। इसके बाद संबंधित स्तर पर तेजी से प्रक्रिया आगे बढ़ी और रिहाना की छह माह पुरानी समस्या का समाधान हो गया।
प्रशासन की इस कार्रवाई को इसलिए भी अहम माना जा रहा है क्योंकि मामला एक दिव्यांग और आर्थिक रूप से कमजोर परिवार से जुड़ा था। ऐसे मामलों में संवेदनशीलता और प्राथमिकता के साथ कार्रवाई की जरूरत होती है।रिहाना की कहानी अब एक संदेश भी दे रही है—फरियाद अगर सही जगह पहुंचे और प्रशासन गंभीरता दिखाए तो महीनों से बंद पड़ा समाधान का दरवाजा भी खुल सकता है।
जिलाधिकारी मयूर दीक्षित द्वारा जनता दरबार में लगातार शिकायतों पर तत्काल संज्ञान लिया जा रहा है। अधिकारियों को समयबद्ध कार्रवाई के निर्देश दिए जा रहे हैं, ताकि आम लोगों को छोटी-बड़ी समस्याओं के लिए लंबे समय तक सरकारी दफ्तरों के चक्कर न लगाने पड़ें।रिहाना के मामले में छह महीने का इंतजार और 24 घंटे का एक्शन प्रशासन की इसी कार्यशैली की तस्वीर पेश करता है।कहानी में परेशानी लंबी थी… लेकिन क्लाइमेक्स राहत वाला रहा।



