डीएम मयूर दीक्षित पैदल तो एआरटीओ निखिल शर्मा साइकिल से पहुंचे दफ्तर! हरिद्वार में अफसरशाही की बदली तस्वीर, राष्ट्रहित में दिया बड़ा संदेश,, “प्रधानमंत्री की अपील का दिखा असर — VIP संस्कृति छोड़ अफसरों ने अपनाई सादगी, ईंधन बचत और पर्यावरण संरक्षण की अनोखी पहल,, “हरिद्वार से उठी नई प्रशासनिक मुहिम — ‘छोटी दूरी, बिना गाड़ी’ अभियान को जनता का समर्थन, युवाओं को भी मिली प्रेरणा”

इन्तजार रजा हरिद्वार- डीएम मयूर दीक्षित पैदल तो एआरटीओ निखिल शर्मा साइकिल से पहुंचे दफ्तर! हरिद्वार में अफसरशाही की बदली तस्वीर, राष्ट्रहित में दिया बड़ा संदेश,,
“प्रधानमंत्री की अपील का दिखा असर — VIP संस्कृति छोड़ अफसरों ने अपनाई सादगी, ईंधन बचत और पर्यावरण संरक्षण की अनोखी पहल,,
“हरिद्वार से उठी नई प्रशासनिक मुहिम — ‘छोटी दूरी, बिना गाड़ी’ अभियान को जनता का समर्थन, युवाओं को भी मिली प्रेरणा”
हरिद्वार में इन दिनों प्रशासनिक अधिकारियों की कार्यशैली आमजन के बीच चर्चा का विषय बनी हुई है। प्रधानमंत्री द्वारा देशवासियों से ईंधन बचत और पर्यावरण संरक्षण को लेकर की गई अपील का असर अब ज़मीन पर दिखाई देने लगा है। पहले जिलाधिकारी मयूर दीक्षित अपने आवास से पैदल चलकर कार्यालय पहुंचे और अब एआरटीओ प्रशासन निखिल शर्मा साइकिल पर सवार होकर दफ्तर पहुंचे। दोनों अधिकारियों की यह पहल हरिद्वार में एक नई सोच और सकारात्मक बदलाव का प्रतीक बनती दिखाई दे रही है।
आमतौर पर सरकारी अधिकारियों के बड़े काफिले, चमचमाती गाड़ियां और VIP संस्कृति चर्चा में रहती है, लेकिन हरिद्वार में इस बार तस्वीर बिल्कुल अलग नजर आई। डीएम मयूर दीक्षित ने पैदल चलकर यह संदेश दिया कि छोटी दूरी के लिए वाहन का उपयोग कम किया जा सकता है, वहीं एआरटीओ निखिल शर्मा ने साइकिल से कार्यालय पहुंचकर पर्यावरण संरक्षण और ईंधन बचत की दिशा में प्रेरणादायक उदाहरण पेश किया।
जब एआरटीओ निखिल शर्मा साइकिल चलाते हुए सड़कों पर दिखाई दिए तो राह चलते लोग भी उन्हें देखकर रुक गए। लोगों के बीच चर्चा शुरू हो गई कि यदि प्रशासनिक अधिकारी स्वयं इस तरह की पहल कर सकते हैं तो आम नागरिक क्यों नहीं। कई लोगों ने उनकी सादगी की सराहना करते हुए इसे “जमीन से जुड़े अफसर” की पहचान बताया।
एआरटीओ निखिल शर्मा ने कहा कि देश में लगातार बढ़ती पेट्रोल और डीजल की खपत चिंता का विषय है। इससे न केवल आम जनता की जेब पर असर पड़ता है बल्कि पर्यावरण प्रदूषण भी तेजी से बढ़ता है। उन्होंने कहा कि यदि लोग छोटी दूरी के लिए पैदल चलना, साइकिल अपनाना या सार्वजनिक परिवहन का इस्तेमाल करना शुरू करें तो इससे देश को बड़ा लाभ मिल सकता है।
उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री का संदेश केवल सरकारी अभियान नहीं बल्कि राष्ट्रहित से जुड़ा एक सामाजिक दायित्व है। हर नागरिक की जिम्मेदारी है कि वह ईंधन बचत में अपनी भूमिका निभाए। उन्होंने युवाओं से भी अपील की कि अनावश्यक रूप से बाइक और कार का इस्तेमाल कम करें तथा पर्यावरण को सुरक्षित रखने में सहयोग दें।
इससे पहले जिलाधिकारी मयूर दीक्षित ने पैदल दफ्तर पहुंचकर लोगों को बड़ा संदेश दिया था। डीएम की इस पहल को आम जनता और सामाजिक संगठनों ने खूब सराहा था। अब एआरटीओ निखिल शर्मा की साइकिल यात्रा ने इस मुहिम को और मजबूती दे दी है। शहर में चर्चा है कि यदि प्रशासनिक अधिकारी खुद मैदान में उतरकर उदाहरण पेश करेंगे तो समाज में जागरूकता तेजी से बढ़ेगी।
विशेषज्ञों का मानना है कि भारत जैसे विकासशील देश में ईंधन की बढ़ती खपत अर्थव्यवस्था पर भारी दबाव डालती है। पेट्रोल और डीजल की कीमतों में वृद्धि का सीधा असर आम आदमी के घरेलू बजट पर पड़ता है। ऐसे में यदि ईंधन की बचत की जाए तो देश की आर्थिक स्थिति मजबूत होने के साथ-साथ विदेशी मुद्रा पर भी दबाव कम होगा पर्यावरण विशेषज्ञों का कहना है कि वाहनों से निकलने वाला धुआं वायु प्रदूषण का सबसे बड़ा कारण बनता जा रहा है। यदि लोग छोटी दूरी के लिए वाहन छोड़कर पैदल चलना या साइकिल अपनाना शुरू करें तो इससे प्रदूषण स्तर में कमी लाई जा सकती है। यही कारण है कि दुनिया के कई बड़े शहर अब “ग्रीन ट्रांसपोर्ट” को बढ़ावा दे रहे हैं।
हरिद्वार में अधिकारियों की यह पहल अब एक सामाजिक अभियान का रूप लेती दिखाई दे रही है। कई स्थानीय नागरिकों और सामाजिक संगठनों ने प्रशासन की इस सोच की प्रशंसा की है। लोगों का कहना है कि यदि अफसर खुद सादगी अपनाएंगे तो समाज में भी सकारात्मक संदेश जाएगा। खासकर युवा पीढ़ी इससे प्रेरणा लेकर स्वस्थ जीवनशैली और पर्यावरण संरक्षण की दिशा में आगे बढ़ सकती है।
स्थानीय व्यापारियों और नागरिकों ने भी कहा कि अक्सर लोग बदलाव की शुरुआत सरकार से चाहते हैं, लेकिन असली बदलाव तब आता है जब समाज का हर व्यक्ति खुद जिम्मेदारी निभाता है। डीएम मयूर दीक्षित और एआरटीओ निखिल शर्मा ने यह साबित कर दिया कि छोटी-सी पहल भी बड़ा संदेश दे सकती है।
अब हरिद्वार में यह चर्चा तेज हो गई है कि आने वाले समय में अन्य विभागों के अधिकारी भी इसी तरह की पहल करते दिखाई दे सकते हैं। यदि ऐसा होता है तो यह केवल ईंधन बचत तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि यह एक बड़े सामाजिक और पर्यावरणीय आंदोलन का रूप ले सकता है। हरिद्वार से निकली यह तस्वीर साफ संकेत दे रही है कि राष्ट्रहित केवल भाषणों से नहीं बल्कि व्यवहारिक कदमों से मजबूत होता है। पैदल चलना, साइकिल अपनाना और अनावश्यक वाहन प्रयोग कम करना आज समय की सबसे बड़ी जरूरत बन चुका है। प्रशासनिक अधिकारियों की यह नई सोच अब आम जनता के लिए प्रेरणा बनती दिखाई दे रही है।


