दरगाह पिरान कलियर में ‘मौखिक आदेश’ का खेल? सुपरवाइजर सिकंदर के ब्यान से उठे बड़े सवाल!,, “मौ. रफी की नियुक्ति पर घिरा दरगाह प्रशासन — वायरल वीडियो में सुपरवाइजर सिकंदर बोला: ‘ऊपर से मौखिक ऑर्डर हैं’” “आखिर कौन है वो ‘साहब’ जिसने बिना लिखित आदेश के दिला दी मौ रफी को एंट्री? अवैध कब्जों, संरक्षण और सुपरवाइजरी सिस्टम पर फिर उठी उंगलियां” प्रशासनिक चुप्पी भी लोगों के बीच चर्चा का विषय बनी कहीं लखटकिया तो नहीं मौ रफी की नाव, कलियर टु रुड़की मौ रफी की दुधारू नाव को सुपरवाइजरी सिस्टम की पतवार
“दरगाह कलियर में मौखिक फरमानों का खेल! मौ. रफी की नियुक्ति पर गहराया विवाद, सुपरवाइजरी सिस्टम पर बड़े रसूखदार अफसर के संरक्षण और लाखों की बरसात की चर्चाएं तेज”

इन्तजार रजा हरिद्वार- दरगाह पिरान कलियर में ‘मौखिक आदेश’ का खेल? सुपरवाइजर सिकंदर के ब्यान से उठे बड़े सवाल!,,
“मौ. रफी की नियुक्ति पर घिरा दरगाह प्रशासन — वायरल वीडियो में सुपरवाइजर सिकंदर बोला: ‘ऊपर से मौखिक ऑर्डर हैं’”
“आखिर कौन है वो ‘साहब’ जिसने बिना लिखित आदेश के दिला दी मौ रफी को एंट्री? अवैध कब्जों, संरक्षण और सुपरवाइजरी सिस्टम पर फिर उठी उंगलियां”
प्रशासनिक चुप्पी भी लोगों के बीच चर्चा का विषय बनी कहीं लखटकिया तो नहीं मौ रफी की नाव,
कलियर टु रुड़की मौ रफी की दुधारू नाव को सुपरवाइजरी सिस्टम की पतवार
की संपत्तियों और प्रशासनिक कार्यप्रणाली को लेकर विवाद लगातार गहराता जा रहा है। अब पूरे मामले में नया मोड़ तब आया जब एक वायरल वीडियो में दरगाह के सुपरवाइजर सिकंदर कथित तौर पर यह कहते सुनाई दे रहे हैं कि “मौ रफी को लेकर ऊपर से मौखिक आदेश हैं।” इस बयान के सामने आने के बाद दरगाह प्रशासन, सुपरवाइजरी सिस्टम और जिम्मेदार अधिकारियों की भूमिका पर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं।
सूत्रों के अनुसार, मौ रफी नाम का व्यक्ति अचानक कुछ समय से दरगाह परिसर के अंदर कार्य करता दिखाई दे रहा है। आरोप है कि उसकी नियुक्ति या कार्य से संबंधित कोई स्पष्ट लिखित आदेश सार्वजनिक नहीं किया गया, बावजूद इसके उसे लगातार संरक्षण मिलता रहा। अब सवाल यह उठ रहा है कि आखिर वह कौन “साहब” हैं जिन्होंने सुपरवाइजर सिकंदर को मौखिक निर्देश देकर नियमों से अलग व्यवस्था लागू करवाई?
दरगाह क्षेत्र में पहले से ही संपत्तियों पर अवैध कब्जों, बाहरी लोगों की दखलअंदाजी और कथित संरक्षण तंत्र को लेकर चर्चाएं तेज हैं। स्थानीय लोगों का कहना है कि यदि किसी व्यक्ति की नियुक्ति या जिम्मेदारी तय की जाती है तो उसका लिखित रिकॉर्ड होना चाहिए, लेकिन यहां मौखिक आदेशों के नाम पर पूरा सिस्टम चलाए जाने के आरोप लग रहे हैं।
मामले को लेकर प्रशासनिक चुप्पी भी लोगों के बीच चर्चा का विषय बनी हुई है। सवाल यह भी उठ रहा है कि क्या दरगाह की व्यवस्थाओं में नियम-कायदों से ज्यादा “मौखिक फरमान” प्रभावी हो चुके हैं? यदि ऐसा है तो फिर जवाबदेही किसकी तय होगी?
प्रदेश में मुख्यमंत्री द्वारा चलाए जा रहे भ्रष्टाचार और अवैध कब्जों के खिलाफ अभियान के बीच दरगाह पिरान कलियर का यह मामला और अधिक संवेदनशील माना जा रहा है। लोगों का कहना है कि आस्था से जुड़ी संस्थाओं में पारदर्शिता और जवाबदेही सबसे जरूरी है, लेकिन यहां लगातार सामने आ रहे विवाद प्रशासनिक व्यवस्था पर सवालिया निशान लगा रहे हैं।
अब स्थानीय लोगों ने मांग उठाई है कि मौ रफी की नियुक्ति, उसके अधिकार, कार्यकाल और उसे मिले कथित मौखिक आदेशों की पूरी जांच सार्वजनिक की जाए। साथ ही यह भी स्पष्ट किया जाए कि बिना लिखित आदेश के आखिर किस आधार पर उसे दरगाह परिसर में जिम्मेदारियां दी गईं।



