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नार्को टेस्ट पर अफवाहों का खेल खत्म! SSP नवनीत सिंह भुल्लर की दो-टूक चेतावनी, भ्रामक खबरें फैलाने वालों पर होगी कार्रवाई!….. उर्मिला सनावर की गिरफ्तारी को नार्को टेस्ट से जोड़ने वाले दावों पर हरिद्वार पुलिस का स्पष्टीकरण, SSP बोले—कानूनी प्रक्रिया के तहत न्यायालय की अनुमति से ही हो सकता है टेस्ट; 14 दिन की न्यायिक हिरासत के बाद अफवाहों पर पुलिस की नजर

नार्को टेस्ट पर अफवाहों का खेल खत्म! SSP नवनीत सिंह भुल्लर की दो-टूक चेतावनी, भ्रामक खबरें फैलाने वालों पर होगी कार्रवाई!…..

उर्मिला सनावर की गिरफ्तारी को नार्को टेस्ट से जोड़ने वाले दावों पर हरिद्वार पुलिस का स्पष्टीकरण, SSP बोले—कानूनी प्रक्रिया के तहत न्यायालय की अनुमति से ही हो सकता है टेस्ट; 14 दिन की न्यायिक हिरासत के बाद अफवाहों पर पुलिस की नजर

हरिद्वार। अभिनेत्री उर्मिला सनावर की गिरफ्तारी के बाद नार्को टेस्ट को लेकर सोशल मीडिया पर छिड़ी चर्चाओं ने नया मोड़ ले लिया है। कहीं गिरफ्तारी को नार्को टेस्ट से बचाने की कार्रवाई बताया जा रहा है, तो कहीं इस पूरे घटनाक्रम को अंकिता भंडारी प्रकरण की सीबीआई जांच से जोड़कर दावे किए जा रहे हैं। वायरल खबरों और आरोपों के बीच अब हरिद्वार पुलिस ने खुलकर अपना पक्ष सामने रखा है। एसएसपी नवनीत सिंह भुल्लर ने इन दावों को भ्रामक बताते हुए साफ संदेश दिया है कि तथ्यों की पुष्टि किए बिना खबरें प्रसारित करना भारी पड़ सकता है। पुलिस ने स्पष्ट किया है कि उर्मिला सनावर की गिरफ्तारी को नार्को टेस्ट से जोड़कर पेश करना सही नहीं है और झूठी अथवा भ्रामक सूचनाएं फैलाने वालों के खिलाफ नियमानुसार कानूनी कार्रवाई की जा सकती है।

गिरफ्तारी, नार्को टेस्ट और सोशल मीडिया का शोर—पुलिस ने तोड़ी चुप्पी

उर्मिला सनावर की गिरफ्तारी के बाद से ही सोशल मीडिया पर तरह-तरह के दावे प्रसारित हो रहे थे। कुछ पोस्ट और खबरों में यह आरोप लगाया जा रहा था कि उन्हें नार्को टेस्ट से बचाने के लिए गिरफ्तार किया गया है। इसी दावे पर हरिद्वार पुलिस ने आपत्ति जताते हुए स्थिति स्पष्ट की है।

एसएसपी नवनीत सिंह भुल्लर के मुताबिक, गिरफ्तारी की कार्रवाई और नार्को टेस्ट की संभावित प्रक्रिया को आपस में जोड़कर प्रस्तुत करना भ्रामक है। पुलिस का कहना है कि किसी भी मामले में जांच की दिशा, आवश्यक कार्रवाई और संबंधित परीक्षण का निर्णय कानून के दायरे में ही होता है। सोशल मीडिया पर चल रही चर्चाओं को आधिकारिक तथ्य मान लेना उचित नहीं है।

पुलिस की इस सफाई के बाद अब सवाल उन दावों पर उठ रहे हैं, जिनमें गिरफ्तारी के पीछे नार्को टेस्ट से बचाने की मंशा बताई जा रही थी। हालांकि, पुलिस ने अपने बयान में ऐसे दावों को खारिज किया है, लेकिन किसी भी व्यक्ति या मंच की जिम्मेदारी तथ्यों की जांच किए बिना निष्कर्ष निकालने की नहीं हो सकती।

24 अक्टूबर को सहारनपुर से गिरफ्तारी, अदालत ने भेजा जेल

पुलिस के अनुसार, 24 अक्टूबर 2026 को हरिद्वार की कोतवाली रानीपुर पुलिस ने उर्मिला सनावर को सहारनपुर स्थित उनके घर से गिरफ्तार किया था। इसके बाद उन्हें न्यायालय में पेश किया गया, जहां से उन्हें 14 दिन की न्यायिक हिरासत में जेल भेज दिया गया।

यह कार्रवाई कोतवाली रानीपुर में दर्ज मुकदमा अपराध संख्या 387/26 से संबंधित है। पुलिस के मुताबिक, मामले में भारतीय न्याय संहिता (BNS) की विभिन्न धाराओं और स्त्री अशिष्ट रूपण अधिनियम, 1986 के प्रावधानों के तहत मुकदमा दर्ज किया गया है।

गिरफ्तारी और न्यायिक हिरासत की कार्रवाई के बाद सोशल मीडिया पर मामले को लेकर चर्चाएं तेज हो गईं। इसी बीच नार्को टेस्ट से जुड़े दावों ने विवाद को और हवा दी। अब पुलिस ने स्पष्ट किया है कि गिरफ्तारी को किसी संभावित नार्को टेस्ट से जोड़कर देखने का आधार उसके अनुसार सही नहीं है।

अंकिता भंडारी प्रकरण पर सीबीआई स्वतंत्र, न्यायालय की अनुमति से हो सकती है प्रक्रिया

इस पूरे विवाद का सबसे अहम पहलू अंकिता भंडारी प्रकरण की सीबीआई जांच है। एसएसपी नवनीत सिंह भुल्लर ने स्पष्ट किया कि इस प्रकरण में जांच कर रही संबंधित एजेंसी कानूनी प्रक्रिया के तहत न्यायालय से अनुमति लेकर नार्को टेस्ट कराने के संबंध में आगे बढ़ सकती है।

पुलिस के मुताबिक, जांच एजेंसी अपनी जांच की जरूरतों के अनुरूप कानून के दायरे में कार्रवाई करने के लिए स्वतंत्र है। ऐसे में उर्मिला सनावर की गिरफ्तारी को नार्को टेस्ट रोकने या उससे बचाने की कार्रवाई बताना उचित नहीं है।

हालांकि, नार्को टेस्ट कोई सामान्य प्रक्रिया नहीं है। इसे कराने के लिए लागू कानूनी प्रावधानों और न्यायिक प्रक्रिया का पालन जरूरी होता है। इसलिए इस संबंध में अंतिम निर्णय या किसी संभावित कार्रवाई को लेकर केवल आधिकारिक और सत्यापित जानकारी पर ही भरोसा किया जाना चाहिए।

अफवाहों पर पुलिस का अलर्ट—खबर चलाने से पहले तथ्यों की जांच जरूरी

एसएसपी की चेतावनी केवल सोशल मीडिया उपयोगकर्ताओं तक सीमित नहीं है। पुलिस ने समाचार पोर्टलों और अन्य डिजिटल मंचों पर भी झूठी अथवा भ्रामक खबरें प्रसारित करने वालों के खिलाफ कानूनी कार्रवाई की बात कही है।

आज सोशल मीडिया पर कुछ ही मिनटों में कोई भी दावा हजारों लोगों तक पहुंच जाता है। लेकिन वायरल होने वाली हर पोस्ट सच नहीं होती। किसी गंभीर आपराधिक मामले में बिना पुष्टि के लगाए गए आरोप न केवल जांच को लेकर भ्रम पैदा कर सकते हैं, बल्कि संबंधित व्यक्तियों की प्रतिष्ठा और आम जनता के बीच भरोसे को भी प्रभावित कर सकते हैं।पुलिस का संदेश साफ है—खबर की रफ्तार से ज्यादा जरूरी उसकी सच्चाई है। किसी दावे को प्रकाशित या साझा करने से पहले उसके स्रोत, आधिकारिक पुष्टि और कानूनी स्थिति की जांच की जानी चाहिए। यदि कोई सामग्री जानबूझकर झूठी या भ्रामक पाई जाती है, तो संबंधित कानून के तहत कार्रवाई हो सकती है।

फैसला, और अपील—अब तथ्यों के आधार पर ही बनेगी तस्वीर

उर्मिला सनावर की गिरफ्तारी के बाद उठे विवाद में हरिद्वार पुलिस ने अपना पक्ष सार्वजनिक कर दिया है। पुलिस ने गिरफ्तारी को नार्को टेस्ट से जोड़ने वाले दावों को भ्रामक बताया है और स्पष्ट किया है कि अंकिता भंडारी प्रकरण में सीबीआई कानून के मुताबिक न्यायालय से अनुमति लेकर आगे की प्रक्रिया अपना सकती है। पुलिस की अपील है कि लोग अपुष्ट खबरों पर भरोसा न करें और न ही उन्हें आगे प्रसारित करें। वहीं, मीडिया संस्थानों से भी अपेक्षा है कि वे किसी संवेदनशील प्रकरण में सनसनीखेज दावों के बजाय प्रमाणित तथ्यों को प्राथमिकता दें।

फिलहाल पुलिस की सफाई के बाद इस विवाद का केंद्र एक बार फिर तथ्य और अफवाह के बीच की रेखा बन गया है। गिरफ्तारी की कार्रवाई अपनी कानूनी प्रक्रिया के तहत हुई है, जबकि नार्को टेस्ट को लेकर किसी भी संभावित कदम का निर्धारण संबंधित जांच एजेंसी और न्यायालय की प्रक्रिया के अनुसार होगा। अब निगाहें आगे की आधिकारिक कार्रवाई पर रहेंगी।

यह समाचार हरिद्वार पुलिस की ओर से उपलब्ध कराए गए विवरण और एसएसपी के कथित आधिकारिक पक्ष पर आधारित है। नार्को टेस्ट कराए जाने की कोई पुष्टि इस खबर में नहीं की जा रही है। गिरफ्तारी या न्यायिक हिरासत को दोषसिद्धि नहीं माना जाना चाहिए। किसी भी व्यक्ति के विरुद्ध आरोपों का अंतिम निर्धारण सक्षम न्यायालय द्वारा किया जाता है।

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