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होमस्टे की आड़ में होटल और हुड़दंग: डीएम का बड़ा एक्शन,, 🟠 17 होमस्टे का पंजीकरण निरस्त, पर्यटन वेबसाइट से हटाने की प्रक्रिया शुरू,, 🟢 अवैध गतिविधियों, सुरक्षा खामियों और नियम उल्लंघन पर प्रशासन सख्त

इन्तजार रजा हरिद्वार 🔴 होमस्टे की आड़ में होटल और हुड़दंग: डीएम का बड़ा एक्शन,,
🟠 17 होमस्टे का पंजीकरण निरस्त, पर्यटन वेबसाइट से हटाने की प्रक्रिया शुरू,,
🟢 अवैध गतिविधियों, सुरक्षा खामियों और नियम उल्लंघन पर प्रशासन सख्त

देहरादून। जनपद में कानून-व्यवस्था को मजबूत बनाने और आमजन की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए जिला प्रशासन ने सख्त रुख अपनाते हुए होमस्टे के नाम पर चल रहे अवैध कारोबार पर बड़ी कार्रवाई की है। जिलाधिकारी सविन बंसल के निर्देश पर चलाए जा रहे विशेष अभियान के तहत प्रथम चरण में 17 होमस्टे का पंजीकरण निरस्त कर दिया गया है। साथ ही इन होमस्टे को पर्यटन विभाग की वेबसाइट से विलोपित करने की प्रक्रिया भी शुरू कर दी गई है।

जिला प्रशासन द्वारा चलाए जा रहे “ऑपरेशन सफाई” के तहत यह कार्रवाई महज 7 दिनों के भीतर की गई है। इसके लिए मजिस्ट्रेट स्तर की 5 अलग-अलग टीमों का गठन कर सहसपुर और रायपुर विकासखंड के नगरीय क्षेत्रों में व्यापक जांच अभियान चलाया गया। जांच के दौरान सामने आया कि कई होमस्टे नियमों की अनदेखी कर होटल की तरह संचालित हो रहे थे, जिससे न केवल अव्यवस्था बढ़ रही थी बल्कि कानून-व्यवस्था के लिए भी गंभीर खतरा उत्पन्न हो रहा था।

🔍 होमस्टे में बार, डीजे और अवैध गतिविधियों का खुलासा
निरीक्षण में कई चौंकाने वाले तथ्य सामने आए। कई होमस्टे में रातभर बार संचालन, तेज आवाज में डीजे और नशे से जुड़ी गतिविधियां संचालित हो रही थीं। ये स्थान उपद्रवी तत्वों के अड्डे बनते जा रहे थे, जहां से शहर में हुड़दंग, ओवरस्पीड ड्राइविंग और यहां तक कि हथियारों से फायरिंग जैसी घटनाएं भी सामने आई हैं। प्रशासन ने इसे आमजन की सुरक्षा के लिए गंभीर खतरा मानते हुए कड़ा रुख अपनाया है।

⚠️ सुरक्षा मानकों की अनदेखी, लाइसेंस भी नहीं
जांच में यह भी पाया गया कि कई होमस्टे बिना अग्निशमन उपकरण, बिना फूड लाइसेंस और बिना बुनियादी सुरक्षा इंतजामों के संचालित हो रहे थे। कई स्थानों पर रसोई व्यवस्था तक नहीं थी, जबकि होमस्टे योजना के तहत स्थानीय खान-पान और संस्कृति को बढ़ावा देना अनिवार्य होता है। कुछ होमस्टे में अग्निशमन उपकरण या तो मौजूद नहीं थे या उनकी वैधता समाप्त हो चुकी थी।

🏠 होमस्टे नहीं, बन गए व्यावसायिक केंद्र
प्रशासन की जांच में यह भी सामने आया कि कई होमस्टे पूरी तरह व्यावसायिक गतिविधियों के केंद्र बन चुके थे। कहीं बारात घर के रूप में उपयोग किया जा रहा था तो कहीं कमरों की संख्या निर्धारित सीमा से अधिक बढ़ा दी गई थी। कई होमस्टे लीज या किराये पर चलाए जा रहे थे, जबकि नियमों के अनुसार स्वामी का उसी परिसर में निवास होना जरूरी है।

🌍 विदेशी पर्यटकों के नियमों की भी अनदेखी
कुछ मामलों में विदेशी नागरिकों के ठहरने की सूचना भी नियमानुसार उपलब्ध नहीं कराई गई, जो सुरक्षा दृष्टि से गंभीर लापरवाही मानी जाती है। निरंजनपुर और बल्लूपुर जैसे क्षेत्रों में ऐसे मामले सामने आए जहां या तो सी-फॉर्म नहीं भरा गया या निर्धारित क्षमता से अधिक लोगों को ठहराया गया।

⚖️ डीएम का सख्त संदेश—कानून से ऊपर कोई नहीं
जिलाधिकारी सविन बंसल ने स्पष्ट शब्दों में कहा कि होमस्टे योजना का उद्देश्य स्थानीय लोगों को रोजगार देना और सांस्कृतिक विरासत को बढ़ावा देना है, लेकिन यदि इसका दुरुपयोग कर अवैध गतिविधियों को बढ़ावा दिया जाएगा तो इसे किसी भी सूरत में बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। उन्होंने कहा कि “आमजन की सुरक्षा सर्वोपरि है और कानून से ऊपर कोई नहीं है। नियमों का उल्लंघन करने वालों पर सख्त से सख्त कार्रवाई जारी रहेगी।”

🚨 आगे भी जारी रहेगा अभियान
प्रशासन ने साफ कर दिया है कि यह कार्रवाई केवल शुरुआत है। आने वाले दिनों में अन्य क्षेत्रों में भी इसी तरह की जांच और कार्रवाई जारी रहेगी। सभी होमस्टे संचालकों को निर्देश दिए गए हैं कि वे उत्तराखंड होमस्टे नियमावली का सख्ती से पालन करें, अन्यथा उनके खिलाफ भी कड़ी कार्रवाई की जाएगी। इस सख्त कार्रवाई से जहां एक ओर अवैध गतिविधियों पर लगाम लगने की उम्मीद है, वहीं दूसरी ओर सही तरीके से होमस्टे संचालित करने वालों को भी राहत मिलेगी। जिला प्रशासन का यह कदम पर्यटन व्यवस्था को पारदर्शी और सुरक्षित बनाने की दिशा में एक बड़ा कदम माना जा रहा है।

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