उत्तराखंड विधानसभा में नारी शक्ति वंदन अधिनियम पर गूंजा सदन, निंदा प्रस्ताव पारित,, 🟠 विपक्ष के विरोध के बीच महिलाओं के अधिकारों की रक्षा का लिया गया संकल्प,, 🟢 मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने कहा—नारी शक्ति ही विकसित भारत की आधारशिला

इन्तजार रजा हरिद्वार 🔴 उत्तराखंड विधानसभा में नारी शक्ति वंदन अधिनियम पर गूंजा सदन, निंदा प्रस्ताव पारित,,
🟠 विपक्ष के विरोध के बीच महिलाओं के अधिकारों की रक्षा का लिया गया संकल्प,,
🟢 मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने कहा—नारी शक्ति ही विकसित भारत की आधारशिला

देहरादून। उत्तराखंड विधानसभा में आज महिलाओं के अधिकारों और सम्मान से जुड़े एक अहम मुद्दे पर जोरदार चर्चा देखने को मिली। सदन में नारी शक्ति वंदन अधिनियम को लेकर विपक्ष द्वारा उठाए गए सवालों और इसे निरस्त करने के प्रयासों के विरोध में सत्तापक्ष की ओर से निंदा प्रस्ताव प्रस्तुत किया गया, जिसे बहुमत से पारित कर दिया गया। इस प्रस्ताव के माध्यम से न केवल विपक्ष की मंशा की आलोचना की गई, बल्कि यह भी स्पष्ट किया गया कि राज्य सरकार महिलाओं के अधिकारों की रक्षा के लिए पूरी तरह प्रतिबद्ध है।

सदन की कार्यवाही के दौरान सत्तापक्ष के विधायकों ने एक स्वर में कहा कि नारी शक्ति वंदन अधिनियम देश की महिलाओं को राजनीतिक रूप से सशक्त बनाने की दिशा में एक ऐतिहासिक कदम है। उनका कहना था कि यह अधिनियम महिलाओं को निर्णय लेने की प्रक्रिया में भागीदारी सुनिश्चित करता है और उन्हें नेतृत्व के अवसर प्रदान करता है। इस दौरान कई विधायकों ने अपने संबोधन में कहा कि आज का दिन महिला सशक्तिकरण की दिशा में एक महत्वपूर्ण संदेश देने वाला है।

मुख्यमंत्री Pushkar Singh Dhami ने सदन को संबोधित करते हुए कहा कि राज्य सरकार महिलाओं के सम्मान और अधिकारों को सर्वोच्च प्राथमिकता देती है। उन्होंने कहा कि नारी शक्ति के बिना विकसित भारत की कल्पना अधूरी है और यह अधिनियम उसी दिशा में एक ठोस कदम है। मुख्यमंत्री ने विपक्ष पर निशाना साधते हुए कहा कि कुछ राजनीतिक दल इस ऐतिहासिक पहल को कमजोर करने का प्रयास कर रहे हैं, जो बेहद दुर्भाग्यपूर्ण है।
इस अवसर पर प्रधानमंत्री Narendra Modi के नेतृत्व का भी उल्लेख किया गया। सत्तापक्ष के नेताओं ने कहा कि केंद्र सरकार ने नारी शक्ति वंदन अधिनियम के माध्यम से देश की महिलाओं को नई दिशा और नई ताकत देने का काम किया है। उन्होंने कहा कि यह कानून महिलाओं को राजनीतिक प्रतिनिधित्व बढ़ाने में मदद करेगा और समाज में उनकी भूमिका को और मजबूत करेगा।
वहीं, विपक्षी दलों ने इस प्रस्ताव का विरोध करते हुए अपनी अलग राय रखी। उनका कहना था कि अधिनियम को लेकर कुछ बिंदुओं पर पुनर्विचार की आवश्यकता है। हालांकि, सत्तापक्ष ने इन तर्कों को खारिज करते हुए कहा कि यह विरोध केवल राजनीतिक लाभ के लिए किया जा रहा है और इसका महिलाओं के हितों से कोई लेना-देना नहीं है।
सदन में चर्चा के दौरान यह भी कहा गया कि उत्तराखंड की धरती से आज एक स्पष्ट संदेश देशभर में गया है कि यहां महिलाओं के अधिकारों के साथ कोई समझौता नहीं किया जाएगा। सरकार ने यह भरोसा दिलाया कि महिलाओं को हर क्षेत्र में आगे बढ़ाने के लिए ठोस कदम उठाए जाएंगे और उन्हें बराबरी का अवसर दिया जाएगा।
निंदा प्रस्ताव पारित होने के बाद सत्तापक्ष के विधायकों ने इसे महिलाओं के सम्मान की जीत बताया। उनका कहना था कि यह प्रस्ताव उन सभी शक्तियों के खिलाफ एक मजबूत आवाज है, जो महिलाओं को उनका अधिकार मिलने से रोकना चाहती हैं। साथ ही यह भी कहा गया कि आने वाले समय में महिला सशक्तिकरण को और गति देने के लिए कई नई योजनाएं और नीतियां लागू की जाएंगी।
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि यह मुद्दा केवल एक कानून तक सीमित नहीं है, बल्कि यह देश की सामाजिक और राजनीतिक दिशा को भी दर्शाता है। नारी शक्ति वंदन अधिनियम को लेकर जिस तरह से पक्ष और विपक्ष आमने-सामने आए, उससे यह स्पष्ट है कि महिला सशक्तिकरण अब राजनीतिक विमर्श का एक प्रमुख विषय बन चुका है।
अंत में, मुख्यमंत्री ने अपने संबोधन में कहा कि “नारी शक्ति ही राष्ट्र शक्ति है” और इस शक्ति का सम्मान करना ही सच्चे राष्ट्र निर्माण की नींव है। उन्होंने सभी दलों से आग्रह किया कि राजनीति से ऊपर उठकर महिलाओं के हित में एकजुट होकर काम करें।
इस पूरे घटनाक्रम के बाद यह साफ हो गया है कि उत्तराखंड सरकार महिलाओं के अधिकारों और सम्मान को लेकर कोई समझौता नहीं करने वाली है। निंदा प्रस्ताव के माध्यम से यह संदेश देने का प्रयास किया गया है कि राज्य में नारी शक्ति को सशक्त बनाने की दिशा में हर संभव कदम उठाए जाएंगे और विकसित भारत के निर्माण में उनकी भागीदारी सुनिश्चित की जाएगी।



