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हरिद्वार में ‘न्याय की नई फौज’ तैयार! तीन दिवसीय प्रशिक्षण के बाद अधिकार मित्रों को मिला मिशन — अब गांव-गांव पहुंचेगी कानूनी जागरूकता,, “जिला विधिक सेवा प्राधिकरण का बड़ा अभियान: अंतिम पंक्ति में खड़े व्यक्ति तक न्याय पहुंचाने की तैयारी, डीएम मयूर दीक्षित और प्राधिकरण सचिव सिमरनजीत कौर न्यायिक अधिकारियों ने दिए अहम संदेश” “जाति-वर्ग से ऊपर उठकर समाज सेवा का आह्वान, अधिकार मित्रों को सौंपा जिम्मा — ‘कानून को किताबों से निकालकर जनता तक पहुंचाइए’”

इन्तजार रजा हरिद्वार- हरिद्वार में ‘न्याय की नई फौज’ तैयार! तीन दिवसीय प्रशिक्षण के बाद अधिकार मित्रों को मिला मिशन — अब गांव-गांव पहुंचेगी कानूनी जागरूकता,,

“जिला विधिक सेवा प्राधिकरण का बड़ा अभियान: अंतिम पंक्ति में खड़े व्यक्ति तक न्याय पहुंचाने की तैयारी, डीएम मयूर दीक्षित और प्राधिकरण सचिव सिमरनजीत कौर न्यायिक अधिकारियों ने दिए अहम संदेश”

“जाति-वर्ग से ऊपर उठकर समाज सेवा का आह्वान, अधिकार मित्रों को सौंपा जिम्मा — ‘कानून को किताबों से निकालकर जनता तक पहुंचाइए’”

हरिद्वार में न्याय व्यवस्था को आमजन तक पहुंचाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण और प्रभावी पहल के तहत जिला विधिक सेवा प्राधिकरण (DLSA), हरिद्वार द्वारा आयोजित पी.एल.वी. (पैरा लीगल वॉलंटियर्स) एवं अधिकार मित्रों का तीन दिवसीय प्रशिक्षण कार्यक्रम शनिवार को विकास भवन सभागार में भव्य रूप से संपन्न हो गया। इस कार्यक्रम ने केवल प्रशिक्षण का कार्य नहीं किया, बल्कि समाज के बीच कानूनी जागरूकता की एक नई श्रृंखला तैयार करने की मजबूत नींव भी रखी।

समापन समारोह में मुख्य अतिथि के रूप में माननीय जनपद न्यायाधीश एवं जिला विधिक सेवा प्राधिकरण के अध्यक्ष श्री नरेंद्र दत्त उपस्थित रहे, जबकि विशिष्ट अतिथि के रूप में जिलाधिकारी हरिद्वार मयूर दीक्षित ने कार्यक्रम की गरिमा बढ़ाई। कार्यक्रम में न्यायिक एवं प्रशासनिक क्षेत्र से जुड़े कई वरिष्ठ अधिकारी मौजूद रहे, जिन्होंने अधिकार मित्रों की भूमिका को समाज के लिए बेहद महत्वपूर्ण बताया।

तीन दिनों तक चले इस प्रशिक्षण कार्यक्रम में विभिन्न विभागों के विशेषज्ञ वक्ताओं ने प्रशिक्षणार्थियों को सरकार की जनकल्याणकारी योजनाओं, कानूनी अधिकारों, न्यायिक प्रक्रियाओं और सामाजिक दायित्वों की गहन जानकारी दी। प्रशिक्षण का उद्देश्य केवल कानून की धाराएं बताना नहीं था, बल्कि ऐसे प्रशिक्षित स्वयंसेवक तैयार करना था जो समाज और न्याय प्रणाली के बीच एक मजबूत सेतु बन सकें।

समापन अवसर पर जिलाधिकारी मयूर दीक्षित ने बेहद स्पष्ट और सशक्त संदेश देते हुए कहा कि अधिकार मित्रों का दायित्व केवल जानकारी बांटना नहीं, बल्कि समाज के प्रत्येक व्यक्ति तक बिना किसी जाति, धर्म, वर्ग या भेदभाव के कानूनी सहायता और जागरूकता पहुंचाना है। उन्होंने कहा कि न्याय व्यवस्था तभी मजबूत मानी जाएगी जब समाज के अंतिम व्यक्ति को भी अपने अधिकारों और कानूनी विकल्पों की जानकारी होगी।

मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट संदीप कुमार ने अपने संबोधन में कहा कि पी.एल.वी. और अधिकार मित्रों की सबसे बड़ी जिम्मेदारी यह है कि वे जटिल कानूनी प्रक्रियाओं को बेहद सरल भाषा में आम लोगों तक पहुंचाएं। उन्होंने कहा कि अक्सर जानकारी के अभाव में लोग अपने अधिकारों से वंचित रह जाते हैं, ऐसे में अधिकार मित्रों की भूमिका अत्यंत महत्वपूर्ण हो जाती है।

स्थायी लोक अदालत की अध्यक्षा श्रीमती नीतू जोशी ने कहा कि आज भी समाज का एक बड़ा वर्ग न्यायिक प्रक्रियाओं और कानूनी अधिकारों की बारीकियों से पूरी तरह अनभिज्ञ है। ऐसे में अधिकार मित्रों का दायित्व केवल सूचना देना नहीं, बल्कि न्याय को समाज की अंतिम पंक्ति तक पहुंचाने का भी है।वहीं प्रथम अपर जिला जज श्रीमती नीलम रात्रा ने अधिकार मित्रों की भूमिका को अदालत और जनता के बीच पुल बताते हुए कहा कि कई दीवानी और पारिवारिक विवाद न्यायालय पहुंचने से पहले ही आपसी समझ और मध्यस्थता से सुलझाए जा सकते हैं। उन्होंने कहा कि यदि अधिकार मित्र सक्रियता से कार्य करें तो समाज में मुकदमों की संख्या कम करने में भी मदद मिल सकती है।

कार्यक्रम के अंतिम चरण में मुख्य अतिथि माननीय जनपद न्यायाधीश नरेंद्र दत्त ने सभी प्रशिक्षणार्थियों को शुभकामनाएं देते हुए कहा कि तीन दिनों में अर्जित ज्ञान तभी सार्थक होगा जब उसे समाज के हित में पूरी ईमानदारी और जिम्मेदारी के साथ लागू किया जाए। उन्होंने विश्वास जताया कि प्रशिक्षित अधिकार मित्र न्याय और जागरूकता का संदेश घर-घर पहुंचाएंगे।

इस अवसर पर प्रशिक्षित अधिकार मित्रों को प्रशस्ति पत्र, पहचान पत्र एवं आवश्यक टूल किट भी वितरित किए गए। यह पल प्रशिक्षणार्थियों के लिए सम्मान और जिम्मेदारी दोनों का प्रतीक बन गया।

कार्यक्रम के अंत में जिला विधिक सेवा प्राधिकरण की सचिव श्रीमती सिमरनजीत कौर ने सभी अतिथियों का आभार व्यक्त करते हुए कहा कि इस पूरे अभियान का उद्देश्य केवल प्रशिक्षण नहीं, बल्कि न्याय को समाज के अंतिम व्यक्ति तक पहुंचाना है।अब सबसे महत्वपूर्ण सवाल यह है कि क्या ये प्रशिक्षित अधिकार मित्र आने वाले समय में गांवों, कस्बों और जरूरतमंद लोगों तक न्याय की रोशनी पहुंचाने में सफल होंगे? हरिद्वार में शुरू हुई यह पहल आने वाले समय में कानूनी जागरूकता का बड़ा मॉडल बन सकती है।

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