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कलियर में ‘ऑपरेशन प्रहार’ का तांत्रिकों पर प्रहार! श्मशान घाट से तीन ‘बाबा’ हिरासत में—धर्म की आड़ में खेल पर पुलिस का शिकंजा….. लेकिन बड़ा सवाल—दरगाह की संपत्तियों में अवैध रूप से जमे बताए जा रहे मौ रफी जैसे ‘बहुरूपियों’ तक ऑपरेशन कालनेमी/प्रहार की पकड़ पहुंच में क्यों नहीं? अगर कार्रवाई सच में निष्पक्ष है तो हर भेष, हर कब्जे और हर संदिग्ध गतिविधि की जांच कब होगी?

कलियर में ‘ऑपरेशन प्रहार’ का तांत्रिकों पर प्रहार! श्मशान घाट से तीन ‘बाबा’ हिरासत में—धर्म की आड़ में खेल पर पुलिस का शिकंजा…..

लेकिन बड़ा सवाल—दरगाह की संपत्तियों में अवैध रूप से जमे बताए जा रहे मौ रफी जैसे ‘बहुरूपियों’ तक ऑपरेशन कालनेमी/प्रहार की पकड़ पहुंच में क्यों नहीं? अगर कार्रवाई सच में निष्पक्ष है तो हर भेष, हर कब्जे और हर संदिग्ध गतिविधि की जांच कब होगी?

हरिद्वार/पिरान कलियर… कलियर शरीफ की सरजमीं पर एक बार फिर पुलिस का ‘ऑपरेशन प्रहार’ सुर्खियों में है। इस बार निशाने पर हथियारबंद बदमाश नहीं, बल्कि धर्म और तंत्र-मंत्र की आड़ में लोगों को कथित तौर पर भ्रमित करने वाले भेषधारी हैं। पुलिस ने ग्राम मेहवड़कला स्थित श्मशान घाट से तीन ऐसे व्यक्तियों को हिरासत में लिया है, जो पुलिस के मुताबिक तांत्रिक/बाबा का भेष धारण किए हुए थे।

पुलिस की कार्रवाई भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता की धारा 170 के तहत की गई है। पूछताछ और अग्रिम विधिक कार्रवाई जारी है। लेकिन इस कार्रवाई ने कलियर में एक बड़ा सवाल भी खड़ा कर दिया है—क्या ‘ऑपरेशन कालनेमी’ केवल छोटे स्तर पर घूम रहे भेषधारियों तक सीमित रहेगा या धर्म की आड़ में प्रभाव, संपत्ति और व्यवस्था पर सवाल खड़े करने वाले बड़े नामों तक भी पहुंचेगा?

श्मशान घाट में पुलिस की एंट्री और खुलने लगी ‘तंत्र-मंत्र’ की परत!

पुलिस के अनुसार वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक हरिद्वार के निर्देश पर ऐसे लोगों के खिलाफ अभियान चलाया जा रहा है, जो साधु-संतों का भेष धारण कर विशेषकर महिलाओं और युवाओं को उनकी व्यक्तिगत अथवा घरेलू समस्याओं का समाधान करने का प्रलोभन देकर कथित रूप से गुमराह कर सकते हैं।

इसी अभियान के तहत 3 अक्टूबर को पिरान कलियर पुलिस टीम मेहवड़कला श्मशान घाट पहुंची। यहां से तीन व्यक्तियों को हिरासत में लिया गया।

पुलिस ने जिन तीन व्यक्तियों को हिरासत में लिया है, उनकी पहचान इरशाद पुत्र याकूब निवासी रामपुर चुंगी, रुड़की, उम्र 34 वर्ष; उस्मान मलिक पुत्र जुल्फुकार निवासी हसन कॉलोनी, रामपुर चुंगी, रुड़की, उम्र 34 वर्ष; और उस्मान पुत्र फुरकान निवासी रामपुर चुंगी, रुड़की, उम्र 32 वर्ष के रूप में बताई है।

पुलिस का कहना है कि इनसे विस्तृत पूछताछ की जा रही है और अग्रिम कानूनी कार्रवाई जारी है।

‘बाबा’ का भेष या लोगों की आस्था से खिलवाड़? पुलिस का अभियान क्यों जरूरी

कलियर शरीफ और उसके आसपास धार्मिक आस्था से जुड़े स्थानों पर देश के अलग-अलग हिस्सों से श्रद्धालु पहुंचते हैं। ऐसे माहौल में यदि कोई व्यक्ति तंत्र-मंत्र, चमत्कार, घरेलू समस्या का समाधान या किसी विशेष शक्ति का दावा करके लोगों को प्रभावित करता है तो उसकी गतिविधियों की जांच बेहद महत्वपूर्ण हो जाती है।

पुलिस ने इसी कथित प्रवृत्ति के खिलाफ ‘ऑपरेशन कालनेमी/ऑपरेशन प्रहार’ के तहत कार्रवाई की है।

फिल्मी अंदाज में कहें तो कहानी का पहला सीन सामने आ चुका है—
श्मशान घाट, भेषधारी बाबा और अचानक पुलिस की एंट्री।

लेकिन असली सवाल अभी बाकी है।

एक्शन तो शुरू हुआ, अब ‘बड़े किरदारों’ की बारी कब?

कलियर में तीन भेषधारियों पर कार्रवाई के बाद पुलिस की मुहिम की चर्चा तेज है। मगर इसी के साथ स्थानीय स्तर पर यह सवाल भी उठ रहा है कि यदि अभियान का उद्देश्य धर्म की आड़ में गलत लाभ उठाने वाले हर संदिग्ध व्यक्ति पर कार्रवाई करना है, तो फिर दरगाह की संपत्तियों में अवैध रूप से जमे होने के आरोपों से जुड़े लोगों और कथित बहुरूपियों की भी निष्पक्ष जांच क्यों नहीं होनी चाहिए?

मौ रफी को लेकर भी स्थानीय स्तर पर संपत्तियों में कथित रूप से अवैध रूप से जमे होने और प्रभाव का इस्तेमाल करने जैसे सवाल उठते रहे हैं। हालांकि इन आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि और कानूनी स्थिति स्पष्ट होना जरूरी है। यही वजह है कि अब सबसे बड़ा सवाल पुलिस और संबंधित प्रशासनिक तंत्र से है—

क्या ‘ऑपरेशन प्रहार’ की जांच का दायरा केवल श्मशान घाट में बैठे तीन कथित तांत्रिकों तक रहेगा, या दरगाह की संपत्तियों, वहां कथित कब्जों और प्रभावशाली बहुरूपियों से जुड़े आरोपों की भी उसी सख्ती से जांच होगी?

अगर कोई व्यक्ति वास्तव में अवैध कब्जे में शामिल है तो उसकी पहचान, भूमिका और कानूनी स्थिति जांच का विषय होनी चाहिए। वहीं यदि आरोप निराधार हैं तो जांच के बाद स्थिति भी साफ होनी चाहिए।

क्योंकि कानून का असली मतलब तभी साबित होगा जब कार्रवाई चेहरे देखकर नहीं, बल्कि सबूत देखकर होगी।

पुलिस टीम ने संभाला मोर्चा

इस कार्रवाई में उपनिरीक्षक विनोद कुमार गोला, हेड कांस्टेबल 322 रविंद्र बालियान और हेड कांस्टेबल 305 जमशेद अली शामिल रहे।

पुलिस की कार्रवाई से साफ है कि कलियर में अब धार्मिक पहचान या भेष को कार्रवाई से बचने की ढाल नहीं माना जाएगा। लेकिन जनता की निगाहें अब अगले कदम पर हैं।

तीन भेषधारी हिरासत में लिए जा चुके हैं।

अब देखना यह है कि ऑपरेशन प्रहार का कैमरा सिर्फ छोटे किरदारों पर फोकस रहता है या कहानी के उन बड़े चेहरों तक भी पहुंचता है, जिन पर वर्षों से सवाल उठते रहे हैं।क्योंकि कलियर की कहानी में असली क्लाइमेक्स तभी आएगा, जब हर आरोप की जांच होगी, हर संदिग्ध गतिविधि का सच सामने आएगा और कानून की कार्रवाई में न छोटा बच पाएगा, न बड़ा।

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