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SIR पर मनोज धनगर का बड़ा हमला—‘सत्यापन के बाद भी जिंदा मतदाताओं को मृत बता रही आपत्तियां,, 52 मतदाताओं के नाम पर आपत्ति का दावा, कांग्रेस नेता बोले—‘झूठी आपत्तियों की जांच हो, दोषियों पर हो कड़ी कार्रवाई’

SIR पर मनोज धनगर का बड़ा हमला—‘सत्यापन के बाद भी जिंदा मतदाताओं को मृत बता रही आपत्तियां,,

52 मतदाताओं के नाम पर आपत्ति का दावा, कांग्रेस नेता बोले—‘झूठी आपत्तियों की जांच हो, दोषियों पर हो कड़ी कार्रवाई’

हरिद्वार। विशेष गहन पुनरीक्षण यानी SIR को लेकर कांग्रेस नेता एवं धनगर समाज महासभा उत्तराखंड के प्रदेश अध्यक्ष मनोज धनगर ने गंभीर सवाल खड़े किए हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि बूथ स्तर पर बीएलओ द्वारा मतदाताओं के सत्यापन के बावजूद कुछ लोगों की ओर से फॉर्म-7 के जरिए गलत और भ्रामक आपत्तियां दर्ज कराई जा रही हैं। धनगर का कहना है कि इससे आम नागरिकों को अनावश्यक रूप से कागजी प्रक्रिया में उलझना पड़ रहा है।

मनोज धनगर ने कहा कि वह एसआईआर की प्रक्रिया पर लगातार नजर बनाए हुए हैं और बूथ लेवल पर होने वाले सत्यापन कार्य को बारीकी से देख रहे हैं। उन्होंने दावा किया कि कई ऐसे मामले सामने आए हैं, जिनमें बीएलओ मौके पर जाकर संबंधित मतदाता के जीवित होने और उसी स्थान पर रहने का सत्यापन कर चुका है, लेकिन बाद में उसी व्यक्ति के खिलाफ आपत्ति दर्ज कर दी गई।

उन्होंने उदाहरण देते हुए कहा कि मनोज धनगर नाम के एक मतदाता का हाल ही में बीएलओ द्वारा सत्यापन किया गया था। वह मौके पर मौजूद हैं और जीवित हैं। इसके बावजूद फॉर्म-7 के माध्यम से उनके बारे में स्थायी रूप से पलायन कर जाने या अन्य आपत्ति लगाए जाने की बात सामने आई। धनगर ने सवाल उठाया कि जब बीएलओ स्वयं मौके पर जाकर सत्यापन कर चुका है तो फिर किसी ऐसे व्यक्ति को आपत्ति लगाने का आधार क्या है, जो संबंधित मतदाता की वास्तविक स्थिति से परिचित भी नहीं है।

एक परिवार के 52 मतदाताओं पर आपत्ति का दावा

मनोज धनगर ने दावा किया कि एक गांव में एक ही परिवार के करीब 52 मतदाताओं के नाम पर आपत्ति दर्ज कराई गई। उनका आरोप है कि इनमें कुछ जीवित लोगों को मृत तक बताया गया। उन्होंने इसे गंभीर मामला बताते हुए कहा कि मतदाता सूची में सुधार के नाम पर वास्तविक मतदाताओं को परेशान नहीं किया जाना चाहिए।

उन्होंने कहा कि एसआईआर का उद्देश्य मतदाता सूची को अधिक सटीक और पारदर्शी बनाना होना चाहिए, न कि नागरिकों को दस्तावेजों और आपत्तियों के फेर में उलझाना। यदि किसी मतदाता के संबंध में वास्तविक शिकायत है तो उसका सत्यापन स्थानीय स्तर पर कराया जाना चाहिए।

एआरओ और डीएम से मिले, कार्रवाई की मांग

धनगर ने बताया कि इन मामलों को लेकर उन्होंने एआरओ और हरिद्वार के जिलाधिकारी से मुलाकात की है। उनके साथ उन लोगों को भी अधिकारियों के समक्ष ले जाया गया, जिनके नाम पर कथित तौर पर गलत आपत्तियां दर्ज कराई गई थीं। उन्होंने प्रशासन से मांग की कि प्रत्येक शिकायत की निष्पक्ष जांच कराई जाए।

उन्होंने कहा कि यदि जांच में यह साबित होता है कि किसी ने जानबूझकर गलत जानकारी देकर किसी जीवित व्यक्ति को मृत या किसी मतदाता को स्थायी रूप से पलायन कर चुका बताया है, तो ऐसे मामलों में नियमानुसार कार्रवाई होनी चाहिए।

‘SIR के नाम पर चुनाव प्रभावित करने की कोशिश’ का लगाया आरोप

कांग्रेस नेता ने एसआईआर की प्रक्रिया को लेकर राजनीतिक सवाल भी उठाए। उन्होंने आरोप लगाया कि विपक्षी दलों को आशंका है कि एसआईआर के माध्यम से मतदाता सूची में हेरफेर कर चुनावी समीकरणों को प्रभावित करने का प्रयास किया जा सकता है। उन्होंने दावा किया कि कुछ स्थानों पर राजनीतिक दलों के कार्यालयों से तैयार फॉर्म निकलने और दूसरे लोगों के नाम से आपत्तियां लगाए जाने की शिकायतें भी सामने आ रही हैं।

मनोज धनगर ने कहा कि इन आरोपों की निष्पक्ष जांच जरूरी है। उन्होंने प्रशासन से मांग की कि एसआईआर प्रक्रिया पूरी तरह पारदर्शी रखी जाए और किसी भी वास्तविक मतदाता का नाम गलत तरीके से प्रभावित न होने दिया जाए।

उन्होंने कहा कि लोकतंत्र में मतदाता सबसे महत्वपूर्ण है और उसकी पहचान तथा मतदान के अधिकार से जुड़े मामलों में किसी भी तरह की लापरवाही या जानबूझकर की गई गलत शिकायत को गंभीरता से लिया जाना चाहिए।

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