उत्तराखंड के छह नन्हे जांबाजों को मिला पहला मुख्यमंत्री राज्य बाल वीरता पुरस्कार! अमित शाह और CM धामी ने किया सम्मानित, प्रत्येक बच्चे को ₹51 हजार की सम्मान राशि… भालू के हमले से भिड़कर बचाई जान, उफनती नदी में कूदकर बचाई बच्ची, आपदा के बीच 17 लोगों को किया सतर्क; अदम्य साहस की मिसाल बने छह नन्हे वीर…

देहरादून। उत्तराखंड की धरती ने एक बार फिर साबित कर दिया है कि वीरता उम्र की मोहताज नहीं होती। प्रदेश के छह नन्हे जांबाजों ने विपरीत परिस्थितियों में अद्भुत साहस, सूझबूझ और मानवता का परिचय देकर न केवल कई जिंदगियां बचाईं, बल्कि पूरे राज्य का मान भी बढ़ाया है। इन असाधारण उपलब्धियों के लिए छह बच्चों को प्रदेश के प्रथम मुख्यमंत्री राज्य बाल वीरता पुरस्कार से सम्मानित किया गया।
शुक्रवार, 6 नवंबर को देहरादून के परेड ग्राउंड में आयोजित भव्य समारोह में केंद्रीय गृह एवं सहकारिता मंत्री अमित शाह और मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने इन बच्चों को पदक एवं प्रशस्ति पत्र प्रदान कर सम्मानित किया। प्रत्येक पुरस्कार विजेता को ₹51 हजार की सम्मान राशि भी डीबीटी के माध्यम से उनके बैंक खातों में हस्तांतरित की गई।
महिला सशक्तिकरण एवं बाल विकास विभाग की ओर से वित्तीय वर्ष 2026-27 में पहली बार शुरू की गई इस पुरस्कार योजना के लिए राज्यभर से प्राप्त आवेदनों में से छह बच्चों का चयन किया गया। इन बच्चों की बहादुरी की कहानियां किसी फिल्मी पटकथा से कम नहीं हैं।
भालू के हमले के सामने नहीं डिगे हौसले, तीन बच्चों ने दिखाई अद्भुत वीरता
चमोली जनपद के दिव्या, दीपिका और आरव सिंह को विद्यालय परिसर में भालू के हमले के दौरान असाधारण साहस दिखाने के लिए सम्मानित किया गया।
22 दिसंबर 2025 को जीआईसी यूपीएस हरिशंकर के विद्यालय परिसर में अचानक भालू घुस आया और उसने कक्षा छह के छात्र आरव सिंह पर हमला कर दिया। संकट की इस घड़ी में आरव ने भी हिम्मत नहीं हारी और खुद को बचाने का प्रयास किया।
वहीं कक्षा आठ की छात्रा दिव्या ने साहस दिखाते हुए भालू का पीछा किया और आरव को सुरक्षित विद्यालय तक पहुंचाने में मदद की। दूसरी ओर दीपिका ने तत्काल सूझबूझ दिखाते हुए नौ अन्य विद्यार्थियों को कमरे के भीतर पहुंचाकर सुरक्षित किया। तीनों बच्चों की बहादुरी और तत्परता ने एक बड़े हादसे को टालने में अहम भूमिका निभाई।
उफनती नदी में कूदकर बचाई मासूम की जिंदगी
चम्पावत जनपद की माया ने भी अपनी जान की परवाह किए बिना मानवता और साहस की मिसाल पेश की। नदी के तेज बहाव में एक बालिका के फंसने पर माया ने उसे बचाने के लिए जोखिम उठाया और उसकी जान बचाई। उनकी इस बहादुरी को राज्य सरकार ने मुख्यमंत्री राज्य बाल वीरता पुरस्कार के लिए चुना।
बादल फटने की आपदा में 17 लोगों को किया सतर्क
देहरादून की आराध्या ने 2 जून 2026 को बादल फटने की घटना के दौरान असाधारण सूझबूझ का परिचय दिया। भारी बारिश और मलबे-पानी के अचानक बढ़ते खतरे को भांपते हुए उन्होंने घर में मौजूद 17 लोगों को समय रहते सतर्क किया और सुरक्षित स्थान पर पहुंचने में मदद की। इस दौरान उन्होंने तीन वर्षीय बच्ची को भी तेज बहाव से बचाया। उनकी सतर्कता ने कई लोगों की जिंदगी सुरक्षित करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।
तेज रफ्तार वाहन के सामने बुजुर्ग के लिए बनीं सुरक्षा कवच
टिहरी गढ़वाल की श्वेता ने 30 जनवरी 2025 को सड़क पर एक बुजुर्ग को तेज रफ्तार वाहन की चपेट में आने से बचाकर अपनी बहादुरी का परिचय दिया था। खतरे को भांपते हुए उन्होंने तत्काल बुजुर्ग का हाथ पकड़कर उन्हें सड़क किनारे सुरक्षित पहुंचा दिया। उनकी इस तत्परता ने संभावित दुर्घटना को टाल दिया।
बच्चों के साहस को सम्मान, अन्य के लिए बनेगी प्रेरणा
मुख्यमंत्री राज्य बाल वीरता पुरस्कार शुरू करने के पीछे सरकार का उद्देश्य उन बच्चों को पहचान और प्रोत्साहन देना है, जिन्होंने विपरीत परिस्थितियों में अपनी जान की परवाह किए बिना दूसरों की मदद की और असाधारण साहस का परिचय दिया।
पहले ही वर्ष छह बच्चों का इस प्रतिष्ठित सम्मान के लिए चयन होना प्रदेश के लिए गौरव की बात है। इन बच्चों की कहानियां समाज को यह संदेश देती हैं कि साहस केवल शारीरिक शक्ति का नाम नहीं, बल्कि कठिन समय में सही निर्णय लेने, दूसरों की मदद करने और मानवता के लिए आगे आने का नाम है।
अमित शाह और मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी के हाथों सम्मानित हुए इन नन्हे वीरों ने साबित कर दिया कि उम्र छोटी हो सकती है, लेकिन हौसले और हिम्मत की कोई सीमा नहीं होती।
डेली लाइव उत्तराखंड की ओर से सभी छह नन्हे जांबाजों को हार्दिक बधाई एवं उज्ज्वल भविष्य की शुभकामनाएं।




