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“चोरी-छिपे पोस्टमार्टम!”—परिजनों का आरोप, साजिश की बू तेज,, 🟡 “आत्महत्या नहीं, सच दबाने की कोशिश?”—7 महीने की प्रताड़ना पर सवाल,, 🔴 “पहले कहा गया कल होगा पोस्टमार्टम… और फिर चोरी-चुपके आज ही आनन फानन में पोस्टमार्टम को लेकर!”—परिजनों का बड़ा आरोप,, 🟡 “शॉर्टकट में हुई प्रक्रिया?”—डॉक्टरों की भूमिका पर उठे गंभीर सवाल,, 🟢 “दुबारा पोस्टमार्टम की मांग”—न्याय नहीं मिला तो आंदोलन की चेतावनी

इन्तजार रजा हरिद्वार 🔴 “चोरी-छिपे पोस्टमार्टम!”—परिजनों का आरोप, साजिश की बू तेज,,
🟡 “आत्महत्या नहीं, सच दबाने की कोशिश?”—7 महीने की प्रताड़ना पर सवाल,,
🔴 “पहले कहा गया कल होगा पोस्टमार्टम… और फिर चोरी-चुपके आज ही आनन फानन में पोस्टमार्टम को लेकर!”—परिजनों का बड़ा आरोप,,
🟡 “शॉर्टकट में हुई प्रक्रिया?”—डॉक्टरों की भूमिका पर उठे गंभीर सवाल,,
🟢 “दुबारा पोस्टमार्टम की मांग”—न्याय नहीं मिला तो आंदोलन की चेतावनी

कलियर थाना क्षेत्र में महिला की संदिग्ध मौत का मामला अब और ज्यादा पेचीदा होता जा रहा है। ताजा घटनाक्रम ने पूरे मामले को नया और गंभीर मोड़ दे दिया है। मृतका के परिजनों ने आरोप लगाया है कि पोस्टमार्टम प्रक्रिया में भारी लापरवाही और जल्दबाजी बरती गई, जिससे सच्चाई पर पर्दा डालने की आशंका और गहरा गई है।

परिजनों के अनुसार, अस्पताल में मौजूद डॉक्टरों ने पहले स्पष्ट रूप से कहा था कि पोस्टमार्टम अगले दिन किया जाएगा। इस आश्वासन के बाद परिवार के लोग अपने घर लौट गए। लेकिन आरोप है कि जैसे ही परिजन वहां से हटे, तुरंत महिला के शव का पोस्टमार्टम कर दिया गया। इस घटनाक्रम ने परिजनों को झकझोर कर रख दिया है और अब वे इसे “चोरी-चुपके” की गई कार्रवाई बता रहे हैं।

परिवार का कहना है कि पोस्टमार्टम जैसे संवेदनशील और कानूनी प्रक्रिया में पारदर्शिता बेहद जरूरी होती है, लेकिन यहां पूरी प्रक्रिया को जल्दबाजी और कथित “शॉर्टकट” के जरिए निपटा दिया गया। इसी वजह से अब परिजनों को पोस्टमार्टम रिपोर्ट की निष्पक्षता पर गंभीर संदेह हो गया है।

इतना ही नहीं, परिजनों का आरोप है कि इस तरह की जल्दबाजी कहीं न कहीं पूरे मामले को दबाने या सच्चाई छिपाने की कोशिश का संकेत देती है। उनका कहना है कि यदि सब कुछ नियमों के अनुसार होता, तो परिवार को विश्वास में लिया जाता और उनकी मौजूदगी में प्रक्रिया पूरी की जाती।

इसी के चलते अब मृतका के परिजनों ने दोबारा पोस्टमार्टम (री-पोस्टमार्टम) कराने की मांग उठाई है। उनका कहना है कि जब तक निष्पक्ष और पारदर्शी तरीके से दोबारा जांच नहीं होगी, तब तक उन्हें न्याय मिलने की उम्मीद नहीं है।

इससे पहले भी परिजन महिला की मौत को आत्महत्या नहीं, बल्कि हत्या बताते हुए आरोपियों के खिलाफ कार्रवाई की मांग कर चुके हैं। अब पोस्टमार्टम प्रक्रिया पर उठे सवालों ने मामले को और गंभीर बना दिया है।

इधर पुलिस और स्वास्थ्य विभाग की ओर से आधिकारिक बयान का इंतजार किया जा रहा है। सूत्रों के मुताबिक, यदि परिजन लिखित रूप से मांग करते हैं और उच्च अधिकारियों द्वारा अनुमति दी जाती है, तो मामले में दोबारा पोस्टमार्टम की प्रक्रिया अपनाई जा सकती है।

स्थानीय स्तर पर इस पूरे मामले को लेकर आक्रोश बढ़ता जा रहा है। परिजनों का कहना है कि यदि जांच में पारदर्शिता नहीं रही, तो यह मामला और ज्यादा तूल पकड़ सकता है।

अब देखना यह होगा कि प्रशासन परिजनों की मांग पर क्या कदम उठाता है—क्या दोबारा पोस्टमार्टम होगा या फिर यही रिपोर्ट अंतिम मानी जाएगी? फिलहाल, सवाल कई हैं और जवाब का इंतजार परिजनों सहित पूरे इलाके को है।

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