राजपुर में टिहरी बांध पुनर्वास परियोजना की “जमीन हो गई खाली, लेकिन अब जिम्मेदारी किसकी?”—टिहरी बांध की इस भूमि को स्थायी रूप से सुरक्षित रखने की चुनौती और सवाल बाकी ?,, 🟡 10-12 बीघा अतिक्रमण मुक्त जमीन की, अब निगरानी, सीमांकन और संरक्षण पर टिकी निगाहें 🟢 सवाल कई—प्रभुत्व कौन संभालेगा, राजस्व करेगा निगरानी या फिर लौटेगा खेती-बाड़ी के नाम पर अतिक्रमण?

इन्तजार रजा हरिद्वार 🔴 राजपुर में टिहरी बांध पुनर्वास परियोजना की “जमीन हो गई खाली, लेकिन अब जिम्मेदारी किसकी?”—टिहरी बांध की इस भूमि को स्थायी रूप से सुरक्षित रखने की चुनौती और सवाल बाकी ?,,
🟡 10-12 बीघा अतिक्रमण मुक्त जमीन की, अब निगरानी, सीमांकन और संरक्षण पर टिकी निगाहें
🟢 सवाल कई—प्रभुत्व कौन संभालेगा, राजस्व करेगा निगरानी या फिर लौटेगा खेती-बाड़ी के नाम पर अतिक्रमण?
हरिद्वार जनपद के पंचपुरी गढ़ मीरपुर के राजपुर क्षेत्र में टिहरी बांध परियोजना की जमीन से अवैध धार्मिक संरचना हटाए जाने और करीब 10 से 12 बीघा भूमि को अतिक्रमण से मुक्त कराने के बाद अब पूरा फोकस इस बात पर आ गया है कि इस जमीन को स्थायी रूप से सुरक्षित कैसे रखा जाएगा।
कार्रवाई के बाद भले ही जमीन फिलहाल खाली नजर आ रही हो, लेकिन असली चुनौती अब शुरू होती है—इस भूमि पर दोबारा कब्जा न हो, इसके लिए किस स्तर पर और कैसे निगरानी की जाएगी।
“अब अगला कदम—सुरक्षा और नियंत्रण”
मौजूदा स्थिति में सबसे बड़ा सवाल यही है कि राजपुर सुमन नगर में इस जमीन की जिम्मेदारी किसके पास होगी। टिहरी बांध परियोजना से जुड़ी होने के कारण यह भूमि संबंधित विभाग के अधीन आती है, लेकिन स्थानीय स्तर पर इसकी निगरानी और देखरेख में राजस्व विभाग की भूमिका भी महत्वपूर्ण मानी जाती है।
विशेषज्ञों के अनुसार, ऐसी जमीनों को सुरक्षित रखने के लिए तीन स्तर पर काम जरूरी होता है—स्पष्ट सीमांकन, भौतिक सुरक्षा (जैसे फेंसिंग या चिन्हांकन) और नियमित निरीक्षण। यदि इन तीनों पर ध्यान दिया गया, तो जमीन को दोबारा अतिक्रमण के चंगुल में जाने से रोका जा सकता है।
“प्रभुत्व का सवाल—कौन रखेगा नियंत्रण?”
कार्रवाई के बाद अब यह भी अहम मुद्दा बन गया है कि इस जमीन पर प्रशासनिक रूप से प्रभुत्व किसका रहेगा। क्या इसे सीधे परियोजना प्रबंधन के अधीन रखा जाएगा, या राजस्व विभाग इसकी निगरानी करेगा?
सामान्यतः ऐसी सरकारी भूमि पर अंतिम अधिकार संबंधित परियोजना या विभाग का होता है, जबकि स्थानीय स्तर पर तहसील प्रशासन और राजस्व टीम उसकी निगरानी सुनिश्चित करती है। ऐसे में समन्वय बनाकर काम करना जरूरी होगा, ताकि जमीन पर किसी भी प्रकार की अवैध गतिविधि दोबारा शुरू न हो सके। और नही ही कोई स्थानीय निवासी खेती बाड़ी के नाम पर अतिक्रमण और कब्जा कर सके
“क्या फिर लौटेगा दबंगई के साथ अतिक्रमण?”
सबसे बड़ी चिंता यही है कि जिस जमीन पर पहले खेती-बाड़ी तक शुरू हो चुकी थी, क्या वहां फिर से वही स्थिति पैदा हो सकती है?
यदि जमीन को खुला छोड़ दिया गया और उस पर कोई स्पष्ट नियंत्रण या निगरानी नहीं रखी गई, तो अतिक्रमणकारियों द्वारा दोबारा खेती या अन्य गतिविधियां शुरू करने की संभावना से इनकार नहीं किया जा सकता। यही कारण है कि शुरुआती कुछ महीने इस जमीन के लिए बेहद अहम माने जा रहे हैं।
“निगरानी कैसे होगी?”
प्रशासन के सामने अब यह जरूरी हो जाता है कि—
- जमीन का स्पष्ट सीमांकन कराया जाए
- आवश्यकतानुसार चेतावनी बोर्ड या चिन्ह लगाए जाएं
- समय-समय पर राजस्व और संबंधित विभाग की संयुक्त टीम निरीक्षण करे
- किसी भी नई गतिविधि पर तुरंत कार्रवाई सुनिश्चित की जाए
- अब तरीके से खेती-बाड़ी का अतिक्रमण करने वालों के खिलाफ निगरानी की जाए
इन उपायों से जमीन को व्यवस्थित रूप से सुरक्षित रखा जा सकता है और भविष्य में अतिक्रमण की संभावना को काफी हद तक कम किया जा सकता है।
“फिलहाल स्थिति—राजपुर में खाली हो गई टिहरी बांध पुनर्वास परियोजना की जमीन, लेकिन सवाल कायम”
वर्तमान में जमीन खाली है, लेकिन स्थिति पूरी तरह स्थिर नहीं मानी जा सकती। जब तक इस भूमि पर स्पष्ट नियंत्रण, निगरानी और संरक्षण की व्यवस्था नहीं होती, तब तक अतिक्रमण की आशंका बनी रह सकती है।
अवैध संरचना हटाकर जमीन को खाली कराना एक महत्वपूर्ण कदम है, लेकिन अब असली जिम्मेदारी इस जमीन को लंबे समय तक अतिक्रमण से मुक्त और सुरक्षित बनाए रखने की है। आने वाले समय में प्रशासन की निगरानी व्यवस्था और समन्वित प्रयास ही तय करेंगे कि यह जमीन वास्तव में सुरक्षित रह पाएगी या नहीं।



