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अवैध अल्ट्रासाउंड पर बड़ा एक्शन: हरिद्वार में PCPNDT कानून उल्लंघन पर केस दर्ज की संस्तुति,, 🟢 जिलाधिकारी मयूर दीक्षित के अनुमोदन के बाद दो आरोपियों पर शिकंजा कसने की तैयारी,, 🔵 मुखबिर योजना के तहत छापे में खुलासा—बिना पंजीकरण बेची गई अल्ट्रासाउंड मशीन

इन्तजार रजा हरिद्वार 🔴 अवैध अल्ट्रासाउंड पर बड़ा एक्शन: हरिद्वार में PCPNDT कानून उल्लंघन पर केस दर्ज की संस्तुति,,

🟢 जिलाधिकारी मयूर दीक्षित के अनुमोदन के बाद दो आरोपियों पर शिकंजा कसने की तैयारी,,

🔵 मुखबिर योजना के तहत छापे में खुलासा—बिना पंजीकरण बेची गई अल्ट्रासाउंड मशीन

हरिद्वार। जनपद में अवैध गतिविधियों पर सख्त रुख अपनाते हुए स्वास्थ्य विभाग ने पीसीपीएनडीटी अधिनियम 1994 के उल्लंघन के मामले में बड़ी कार्रवाई की है। मुख्य चिकित्सा अधिकारी डॉ. आर.के. सिंह के निर्देशन में की गई जांच के बाद जिलाधिकारी मयूर दीक्षित के अनुमोदन पर दो व्यक्तियों के खिलाफ आपराधिक मुकदमा दर्ज किए जाने की संस्तुति की गई है। यह कार्रवाई जिले में भ्रूण लिंग जांच जैसे गंभीर अपराधों पर रोक लगाने की दिशा में अहम कदम मानी जा रही है।

स्वास्थ्य विभाग से मिली जानकारी के अनुसार, पीसीपीएनडीटी अधिनियम के अंतर्गत संचालित मुखबिर योजना के तहत पिरान कलियर क्षेत्र में एक संदिग्ध गतिविधि की गुप्त सूचना प्राप्त हुई थी। सूचना को गंभीरता से लेते हुए मुख्य चिकित्सा अधिकारी ने तत्काल कार्रवाई के निर्देश दिए और डॉ. अनिल वर्मा, अपर मुख्य चिकित्सा अधिकारी के नेतृत्व में एक विशेष टीम का गठन किया गया।

टीम द्वारा पिरान कलियर स्थित सिटी हेल्थकेयर सेंटर का औचक निरीक्षण किया गया। निरीक्षण के दौरान केंद्र में स्थापित बताई जा रही अल्ट्रासाउंड मशीन मौके पर नहीं पाई गई। जब टीम ने केंद्र स्वामी डॉ. बिलाल रिजवी से इस संबंध में पूछताछ की, तो उन्होंने बताया कि उक्त मशीन को मंगलौर निवासी राजा अली को बेच दिया गया है। पूछताछ के दौरान मशीन की बिक्री से जुड़े कुछ दस्तावेज भी केंद्र से बरामद किए गए, जिसने पूरे मामले को और गंभीर बना दिया।

जांच में यह तथ्य सामने आया कि पीसीपीएनडीटी अधिनियम 1994 के तहत बिना वैध पंजीकरण के कोई भी व्यक्ति या संस्थान अल्ट्रासाउंड मशीन न तो खरीद सकता है और न ही उसका संचालन कर सकता है। इस प्रकार की गतिविधि न केवल कानून का उल्लंघन है, बल्कि इससे भ्रूण के लिंग निर्धारण जैसे अवैध कार्यों को बढ़ावा मिलने का खतरा भी रहता है, जो समाज में लिंगानुपात असंतुलन का प्रमुख कारण बन सकता है।

डॉ. अनिल वर्मा द्वारा तैयार की गई विस्तृत जांच रिपोर्ट मुख्य चिकित्सा अधिकारी को सौंपी गई, जिसे बाद में जिलाधिकारी के समक्ष प्रस्तुत किया गया। पूरे प्रकरण का संज्ञान लेते हुए जिलाधिकारी मयूर दीक्षित ने सख्त रुख अपनाते हुए केंद्र संचालक डॉ. बिलाल रिजवी और अल्ट्रासाउंड मशीन खरीदने वाले राजा अली के खिलाफ पीसीपीएनडीटी अधिनियम 1994 के अंतर्गत आपराधिक परिवाद दर्ज करने की अनुमति प्रदान कर दी है।

इस कार्रवाई के बाद स्वास्थ्य विभाग और प्रशासन की सक्रियता साफ तौर पर दिखाई दे रही है। अधिकारियों का कहना है कि जिले में इस तरह की अवैध गतिविधियों को किसी भी सूरत में बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। साथ ही, यह भी स्पष्ट किया गया कि आगे भी मुखबिर योजना के तहत लगातार निगरानी और छापेमारी की जाएगी, ताकि भ्रूण लिंग जांच जैसे अपराधों पर पूरी तरह से अंकुश लगाया जा सके।

विशेषज्ञों के अनुसार, पीसीपीएनडीटी अधिनियम 1994 देश में लिंग चयन और भ्रूण हत्या पर रोक लगाने के लिए एक सशक्त कानून है। इसके तहत दोषी पाए जाने पर कठोर दंड और सजा का प्रावधान है। ऐसे में हरिद्वार में की गई यह कार्रवाई न केवल कानून के पालन को सुनिश्चित करती है, बल्कि समाज में एक सख्त संदेश भी देती है कि महिला भ्रूण हत्या जैसे अपराधों के खिलाफ प्रशासन पूरी तरह सतर्क और प्रतिबद्ध है।

फिलहाल, दोनों आरोपियों के खिलाफ मुकदमा दर्ज करने की प्रक्रिया शुरू कर दी गई है और आगे की जांच के आधार पर अन्य संबंधित व्यक्तियों की भूमिका भी खंगाली जा सकती है। प्रशासन की इस सख्ती से अवैध अल्ट्रासाउंड संचालन करने वालों में हड़कंप मच गया है।

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