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अतिक्रमण पर चला प्रशासन का डंडा,,  🟡 दरगाह क्षेत्र हुआ साफ, अवैध कब्जों पर सख्त कार्रवाई,, ⚫ गोलक गबन कांड की फाइल ठंडी, सिस्टम पर सवाल बरकरार 

इन्तजार रजा हरिद्वार 🔴 अतिक्रमण पर चला प्रशासन का डंडा,, 

🟡 दरगाह क्षेत्र हुआ साफ, अवैध कब्जों पर सख्त कार्रवाई,,

⚫ गोलक गबन कांड की फाइल ठंडी, सिस्टम पर सवाल बरकरार 

पिरान कलियर। दरगाह क्षेत्र को अतिक्रमण मुक्त बनाने के लिए प्रशासन ने शुक्रवार को बड़ा अभियान चलाते हुए सख्त रुख का प्रदर्शन किया। तहसीलदार एवं दरगाह प्रबंधक विकास अवस्थी के नेतृत्व में पुलिस बल और दरगाह कर्मियों की संयुक्त टीम ने बाजारों, सड़कों और नालों पर किए गए अवैध कब्जों को हटवाया। अभियान के दौरान कई जगहों पर बुलडोज़र चलाकर अस्थायी ढांचे ध्वस्त किए गए, जिससे पूरे क्षेत्र में हड़कंप की स्थिति बन गई।

कार्रवाई के तहत टीम ने साबरी गेस्ट हाउस, वीआईपी रोड, पीपल चौक और जीरो जोन समेत प्रमुख स्थानों को चिन्हित करते हुए अतिक्रमण हटाया। खासतौर पर नालों के ऊपर बनाए गए अवैध निर्माणों को तोड़ा गया, जो लंबे समय से जल निकासी व्यवस्था को प्रभावित कर रहे थे। प्रशासन का कहना है कि बरसात के मौसम को देखते हुए यह कदम बेहद जरूरी था, ताकि जलभराव की समस्या से निपटा जा सके और जायरीनों को किसी तरह की परेशानी न हो।

अभियान के दौरान कई दुकानदारों को मौके पर ही अतिक्रमण हटाने की सख्त चेतावनी दी गई, जबकि नियमों का उल्लंघन करने वालों के चालान भी काटे गए। अधिकारियों ने स्पष्ट किया कि यदि भविष्य में दोबारा अतिक्रमण किया गया तो और भी कड़ी कार्रवाई की जाएगी, जिसमें सीलिंग और कानूनी कार्यवाही भी शामिल होगी।

तहसीलदार विकास अवस्थी ने कहा कि दरगाह क्षेत्र में अवैध कब्जों को किसी भी कीमत पर बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। उन्होंने बताया कि प्रशासन का मुख्य उद्देश्य जायरीनों को बेहतर सुविधाएं देना, यातायात को सुचारु बनाना और क्षेत्र में स्वच्छता व्यवस्था बनाए रखना है। इसी के तहत विशेष रूप से जीरो जोन और नालों पर फोकस किया जा रहा है। उन्होंने यह भी कहा कि यह अभियान एक दिन का नहीं बल्कि लगातार चलने वाली प्रक्रिया है।

हालांकि, जहां एक ओर प्रशासन अतिक्रमण के खिलाफ सख्त कार्रवाई करता नजर आ रहा है, वहीं दूसरी ओर दरगाह से जुड़े एक गंभीर मामले—गोलक (दानपात्र) गबन कांड—को लेकर सवाल खड़े हो रहे हैं। बताया जा रहा है कि इस मामले की जांच अचानक धीमी पड़ गई है और फाइल आगे नहीं बढ़ पा रही है। इससे सिस्टम की कार्यशैली पर सवाल उठने लगे हैं।

सूत्रों के अनुसार, जायरीनों द्वारा दी जाने वाली चढ़ावे की रकम में गड़बड़ी की शिकायतें पहले भी सामने आई थीं, जिसके बाद जांच शुरू की गई थी। लेकिन अब तक न तो किसी आरोपी की स्पष्ट पहचान हो पाई है और न ही किसी के खिलाफ ठोस कार्रवाई सामने आई है। इस पूरे मामले में आरोप-प्रत्यारोप का दौर जारी है, जिससे स्थिति और भी उलझती जा रही है।

स्थानीय लोगों का कहना है कि जब प्रशासन छोटे-छोटे अतिक्रमणों पर इतनी सख्ती दिखा सकता है, तो फिर जायरीनों के दान से जुड़े बड़े मामले में ढिलाई क्यों? क्या सिस्टम किसी दबाव में है या फिर जांच में ही कोई खामी है—ये सवाल अब आम चर्चा का विषय बन चुके हैं।

दरगाह में आने वाले जायरीन भी इस मुद्दे को लेकर चिंतित नजर आ रहे हैं। उनका कहना है कि वे आस्था और विश्वास के साथ दान करते हैं, लेकिन यदि उसी में पारदर्शिता नहीं होगी तो यह विश्वास कमजोर पड़ सकता है। ऐसे में प्रशासन और दरगाह प्रबंधन की जिम्मेदारी और भी बढ़ जाती है कि वे इस मामले में जल्द से जल्द सच्चाई सामने लाएं।

मौके पर एसएसआई देवेंद्र सिंह तोमर, सुपरवाइजर इंतखाब आलम, असलम कुरैशी, अफजाल, लेखाकार शादाम अली, हेड कांस्टेबल जमशेद अली, कांस्टेबल जितेंद्र सिंह और नीरज राणा सहित कई कर्मचारी मौजूद रहे।

फिलहाल, अतिक्रमण के खिलाफ चल रही सख्त कार्रवाई से जहां प्रशासन की सक्रियता साफ नजर आ रही है, वहीं गोलक गबन कांड की धीमी पड़ती जांच सिस्टम की पारदर्शिता और जवाबदेही पर बड़े सवाल खड़े कर रही है।

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