सरकारी भवन पर ‘प्राइवेट कब्जे’ का आरोप: कलियर में सभासदों का स्वास्थ्य विभाग के खिलाफ मोर्चा,, “पुराने स्वास्थ्य केंद्र भवन को निजी व्यक्ति को देने पर उठे सवाल,, नगर पंचायत कार्यालय और जन्म-मृत्यु केंद्र खोलने की मांग तेज,, “‘जनहित की जमीन जनता को मिले’ — सभासदों ने CMO को भेजा पत्र, चेतावनी: सरकारी संपत्ति का निजी इस्तेमाल बर्दाश्त नहीं”

इन्तजार रजा हरिद्वार-“सरकारी भवन पर ‘प्राइवेट कब्जे’ का आरोप: कलियर में सभासदों का स्वास्थ्य विभाग के खिलाफ मोर्चा,,
“पुराने स्वास्थ्य केंद्र भवन को निजी व्यक्ति को देने पर उठे सवाल,, नगर पंचायत कार्यालय और जन्म-मृत्यु केंद्र खोलने की मांग तेज,,
“‘जनहित की जमीन जनता को मिले’ — सभासदों ने CMO को भेजा पत्र, चेतावनी: सरकारी संपत्ति का निजी इस्तेमाल बर्दाश्त नहीं”

पिरान कलियर में सरकारी संपत्ति को लेकर नया विवाद खड़ा हो गया है। नगर पंचायत पिरान कलियर के सभासदों ने प्रा० स्वास्थ्य केन्द्र पिरान कलियर के पुराने भवन को कथित रूप से निजी व्यक्ति को दिए जाने के मामले पर तीखा विरोध जताया है। वार्ड नं. 1 के सभासद अमजद अली के नेतृत्व में कई सभासदों ने मुख्य चिकित्साधिकारी हरिद्वार को पत्र भेजकर पूरे मामले की जांच और नगर पंचायत को भवन उपलब्ध कराने की मांग उठाई है।
सभासदों का कहना है कि वर्तमान में प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र का संचालन नए भवन में किया जा रहा है, जिसके चलते पुराना भवन या उसके कई कमरे खाली पड़े हैं। आरोप है कि स्वास्थ्य विभाग द्वारा उक्त भवन अथवा उसके कुछ हिस्से को किसी निजी व्यक्ति को कार्य संचालन के लिए अनुमति दी गई है। इस सूचना के सामने आने के बाद नगर पंचायत प्रतिनिधियों में भारी नाराजगी देखी जा रही है।
पत्र में स्पष्ट रूप से कहा गया है कि सरकारी भवन को किसी निजी व्यक्ति को देना कानून और जनहित दोनों के खिलाफ है। सभासदों ने मांग की है कि यदि भवन खाली है तो उसे नगर पंचायत पिरान कलियर को सौंपा जाए, ताकि वहां नगर पंचायत कार्यालय अथवा जन्म-मृत्यु प्रमाण पत्र कार्यालय संचालित किया जा सके।
सभासदों ने बताया कि वर्तमान समय में नगर पंचायत पिरान कलियर का अपना स्थायी भवन नहीं है, जिसके कारण जनता से जुड़े कई महत्वपूर्ण कार्य प्रभावित हो रहे हैं। लोगों को छोटे-छोटे प्रमाण पत्र और प्रशासनिक कार्यों के लिए इधर-उधर भटकना पड़ता है। ऐसे में खाली पड़े सरकारी भवन का उपयोग जनहित में किया जाना अधिक जरूरी है।
इस मांग पत्र पर वार्ड नं. 1 के सभासद अमजद अली के अलावा वार्ड नं 2 से दिलबाग त्यागी, वार्ड नं. 3 के नाजिम त्यागी, वार्ड नं. 5 के मौ. राशिद, वार्ड नं. 6 की रेशमा परवीन, वार्ड नं. 8 के दानिश साबरी, वार्ड नं. 9 की महरूबा समेत कई जनप्रतिनिधियों के हस्ताक्षर मौजूद हैं। इससे साफ है कि मामला अब केवल एक वार्ड तक सीमित नहीं बल्कि पूरे नगर पंचायत क्षेत्र का मुद्दा बन चुका है।
स्थानीय लोगों का कहना है कि यदि सरकारी भवनों का उपयोग निजी कार्यों के लिए होने लगेगा तो आम जनता का सरकारी व्यवस्था से विश्वास उठ जाएगा। वहीं अब लोगों की नजर स्वास्थ्य विभाग और जिला प्रशासन की कार्रवाई पर टिकी हुई है कि आखिर सरकारी भवन को लेकर उठे इस विवाद में क्या निर्णय लिया जाता है।



