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विधायक मौ. शहजाद का पलटवार: ‘बिना तथ्य व सबूत के खबर चलाकर छवि खराब करने की कोशिश का आरोप,, “मानहानि का नोटिस भेजने की तैयारी, बोले- ‘15 दिन में खंडन नहीं हुआ तो होगी कानूनी कार्रवाई’” “‘मदरसा’ शब्द के इस्तेमाल पर भी उठाए सवाल, कहा- ‘ये धार्मिक मदरसा संस्थान नहीं बल्कि शिक्षा एवं पोषण केंद्र हैं’”

इन्तजार रजा हरिद्वार- “विधायक मौ. शहजाद का पलटवार: ‘बिना तथ्य व सबूत के खबर चलाकर छवि खराब करने की कोशिश का आरोप,,

“मानहानि का नोटिस भेजने की तैयारी, बोले- ‘15 दिन में खंडन नहीं हुआ तो होगी कानूनी कार्रवाई’”

“‘मदरसा’ शब्द के इस्तेमाल पर भी उठाए सवाल, कहा- ‘ये धार्मिक मदरसा संस्थान नहीं बल्कि शिक्षा एवं पोषण केंद्र हैं’”

हरिद्वार जनपद में प्रकाशित एक खबर को लेकर लक्सर विधायक मोहम्मद शहजाद ने कड़ा विरोध दर्ज कराया है। विधायक ने संबंधित समाचार को भ्रामक, तथ्यहीन और राजनीतिक साजिश से प्रेरित बताते हुए मानहानि का नोटिस भेजने की बात कही है।

अपने अधिवक्ता उस्मान आरिफ के कार्यालय पहुंचे विधायक मोहम्मद शहजाद ने कहा कि उनके खिलाफ बिना किसी प्रमाण और बिना उनका पक्ष जाने खबर प्रकाशित की गई। उन्होंने आरोप लगाया कि इस प्रकार की खबरों के जरिए उनकी सामाजिक और राजनीतिक छवि को नुकसान पहुंचाने का प्रयास किया जा रहा है।

विधायक मौ शहजाद ने कहा कि जिस मामले को लेकर उनका नाम जोड़ा गया है, उसकी जांच 18 मार्च से चल रही थी, लेकिन अचानक मई माह में अचानक उनका नाम सामने लाकर विवाद खड़ा किया गया है। उन्होंने इसे राजनीतिक द्वेष का परिणाम बताते हुए कहा कि कुछ लोग उनकी बढ़ती लोकप्रियता से परेशान हैं।उन्होंने कहा कि वह लगातार सामाजिक मुद्दों को मजबूती से उठाते रहे हैं और इसी वजह से उन्हें निशाना बनाया जा रहा है। विधायक ने आरोप लगाया कि मुस्लिम समाज को भ्रमित और विभाजित करने के उद्देश्य से इस प्रकार की खबरें प्रचारित की जा रही हैं।

मोहम्मद शहजाद ने “मदरसा” शब्द के इस्तेमाल पर भी आपत्ति जताई। उन्होंने कहा कि जिन संस्थानों को मदरसा बताया जा रहा है, वे वास्तव में प्रधानमंत्री पोषण योजना और एनसीईआरटी पाठ्यक्रम के तहत संचालित शिक्षा केंद्र/पोषण केन्द्र हैं। इन केंद्रों में सामान्य शिक्षा और मिड-डे मील योजना संचालित होती है।

उन्होंने कहा कि वास्तविक मदरसे वे होते हैं जहां धार्मिक शिक्षा दी जाती है और मुफ्ती, मौलवी, कारी तथा हाफिज बच्चों को तालीम देते हैं। ऐसे में इन शिक्षा/पोषण केंद्रों को मदरसा कहना गलत और भ्रामक है।विधायक की ओर से तैयार किए गए विधिक नोटिस में कहा गया है कि प्रकाशित खबर पूरी तरह निराधार और मनगढ़ंत है। नोटिस में आरोप लगाया गया कि बिना तथ्यात्मक पुष्टि के खबर प्रकाशित कर विधायक की प्रतिष्ठा को नुकसान पहुंचाया गया है।

नोटिस में यह भी कहा गया है कि खबर के सोशल मीडिया पर प्रसारित होने से विधायक की राजनीतिक और सामाजिक छवि प्रभावित हुई है। विधायक मौ. शहजाद पक्ष ने 15 दिनों के भीतर खबर का खंडन प्रकाशित करने और सार्वजनिक रूप से माफी मांगने की मांग की है।साथ ही चेतावनी दी गई है कि यदि तय समय सीमा के भीतर ऐसा नहीं किया गया तो मानहानि का आपराधिक मुकदमा दर्ज कराने के साथ-साथ सिविल क्षतिपूर्ति की कार्रवाई भी की जाएगी।

इस घटनाक्रम के बाद जिले के राजनीतिक और सामाजिक हलकों में चर्चा तेज हो गई है। अब आगे इस मामले में क्या मोड़ आता है, इस पर सभी की नजरें टिकी हुई हैं।

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