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हरिद्वार बनेगा ‘एक्सपोर्ट पावरहाउस’! डीएम मयूर दीक्षित की अगुवाई में जिला प्रशासन की बड़ी पहल, निर्यात हब बनाने को तैयार हुआ नया रोडमैप,, “DEH योजना के तहत टेक्सटाइल, MSMEs, SHGs और FPOs को निर्यात से जोड़ने की रणनीति पर मंथन — जिलाधिकारी मयूर दीक्षित ने दिए सख्त निर्देश” “निर्यातकों की समस्याओं, लॉजिस्टिक सपोर्ट, क्रेडिट लिंकिंग और कृषि निर्यात पर फोकस — हरिद्वार को राष्ट्रीय निर्यात मानचित्र पर मजबूत पहचान दिलाने की तैयारी”

इन्तजार रजा हरिद्वार- हरिद्वार बनेगा ‘एक्सपोर्ट पावरहाउस’! डीएम मयूर दीक्षित की अगुवाई में जिला प्रशासन की बड़ी पहल, निर्यात हब बनाने को तैयार हुआ नया रोडमैप,,

“DEH योजना के तहत टेक्सटाइल, MSMEs, SHGs और FPOs को निर्यात से जोड़ने की रणनीति पर मंथन — जिलाधिकारी मयूर दीक्षित ने दिए सख्त निर्देश”

“निर्यातकों की समस्याओं, लॉजिस्टिक सपोर्ट, क्रेडिट लिंकिंग और कृषि निर्यात पर फोकस — हरिद्वार को राष्ट्रीय निर्यात मानचित्र पर मजबूत पहचान दिलाने की तैयारी”

हरिद्वार को औद्योगिक और आर्थिक दृष्टि से नई पहचान दिलाने की दिशा में जिला प्रशासन ने एक महत्वपूर्ण कदम उठाया है। जनपद को निर्यात के क्षेत्र में नई ऊंचाइयों तक पहुंचाने और उसे एक मजबूत निर्यात हब के रूप में विकसित करने की मंशा के साथ जिला प्रशासन अब गंभीर रणनीति पर काम करता दिखाई दे रहा है। इसी क्रम में जिला कार्यालय सभागार में जिलाधिकारी मयूर दीक्षित की अध्यक्षता में जिला निर्यात प्रोत्साहन समिति (DEPC) की महत्वपूर्ण बैठक आयोजित की गई, जिसमें “डिस्ट्रिक्ट्स ऐज़ एक्सपोर्ट हब (DEH)” योजना के तहत कई अहम बिंदुओं पर विस्तार से चर्चा हुई।

बैठक का मुख्य उद्देश्य जनपद हरिद्वार की जिला निर्यात कार्ययोजना (DEAP) की समीक्षा, उसमें आवश्यक संशोधन और भविष्य की रणनीति तय करना रहा। जिलाधिकारी ने वर्तमान निर्यात व्यवस्था और उससे जुड़े पहलुओं की गहन समीक्षा करते हुए अधिकारियों को निर्यात से संबंधित सभी योजनाओं को अधिक प्रभावी और व्यावहारिक रूप में लागू करने के निर्देश दिए।

बैठक में टेक्सटाइल सेक्टर को विशेष प्राथमिकता दी गई। इस क्षेत्र को जनपद की संभावनाओं से जोड़ते हुए जिला निर्यात कार्ययोजना (DEAP) का प्रस्तुतीकरण किया गया। विभिन्न विभागों, उद्योग प्रतिनिधियों और हितधारकों ने इस योजना को और अधिक मजबूत और उपयोगी बनाने के लिए अपने सुझाव भी साझा किए। चर्चा के बाद योजना को आगे अनुमोदन प्रक्रिया के लिए प्रस्तुत करने की बात कही गई।

जिलाधिकारी ने कहा कि हरिद्वार में केवल बड़े उद्योग ही नहीं बल्कि छोटे और मध्यम उद्यमों (MSMEs), स्वयं सहायता समूहों (SHGs) और किसान उत्पादक संगठनों (FPOs) के माध्यम से भी निर्यात की अपार संभावनाएं मौजूद हैं। इन वर्गों को पहचान कर उन्हें निर्यात से जोड़ना भविष्य की प्राथमिकता होगी। इसके लिए जिला स्तर पर समन्वित कार्ययोजना तैयार करने के निर्देश दिए गए।

बैठक में प्रधानमंत्री रोजगार सृजन कार्यक्रम (PMEGP), मुख्यमंत्री स्वरोजगार योजना (MSY) और अन्य सरकारी योजनाओं के माध्यम से निर्यात आधारित इकाइयों को प्राथमिकता देने पर भी चर्चा की गई। प्रशासन का मानना है कि यदि स्वरोजगार और लघु उद्योगों को निर्यात से जोड़ा जाए तो स्थानीय स्तर पर रोजगार के अवसर बढ़ेंगे और आर्थिक गतिविधियों को नई गति मिलेगी।

बैठक के दौरान निर्यातकों की व्यावहारिक समस्याओं और चुनौतियों को भी गंभीरता से सुना गया। उद्योग प्रतिनिधियों ने लॉजिस्टिक सपोर्ट, परिवहन सुविधाओं, प्रमाणन प्रक्रिया, ऋण सुविधा (क्रेडिट लिंकिंग) तथा विभिन्न विभागीय समन्वय में आ रही कठिनाइयों को सामने रखा। जिलाधिकारी ने इन समस्याओं को केवल सुनने तक सीमित न रखते हुए संबंधित विभागों को बाधाओं की पहचान कर समाधान सुनिश्चित करने के स्पष्ट निर्देश दिए।

विशेष रूप से कृषि निर्यात की संभावनाओं पर भी विस्तार से चर्चा हुई। अधिकारियों ने बताया कि यदि कृषि उत्पादों को बेहतर गुणवत्ता, पैकेजिंग और विपणन से जोड़ा जाए तो हरिद्वार के किसानों को भी बड़ा लाभ मिल सकता है। इस दिशा में कृषि और उद्यान विभाग को अन्य विभागों के साथ समन्वय स्थापित कर योजनाएं तैयार करने के निर्देश दिए गए।

बैठक में विभिन्न हितधारकों ने अपने अनुभव साझा करते हुए सुझाव दिए कि जिला निर्यात कार्ययोजना को केवल कागजों तक सीमित न रखकर जमीनी स्तर पर लागू किया जाना चाहिए। साथ ही उद्योगों को समय पर सहायता, प्रमाणन और वित्तीय सहयोग सुनिश्चित करना भी जरूरी है।

जिलाधिकारी मयूर दीक्षित ने बैठक के अंत में स्पष्ट कहा कि हरिद्वार में निर्यात की असीम संभावनाएं हैं और यदि सभी विभाग आपसी समन्वय के साथ कार्य करें तो जनपद को एक मजबूत निर्यात हब के रूप में विकसित किया जा सकता है। उन्होंने सभी संबंधित विभागों को समयबद्ध कार्यवाही सुनिश्चित करने के निर्देश दिए।

बैठक में मुख्य विकास अधिकारी डॉ. ललित नारायण मिश्र, महाप्रबंधक उद्योग उत्तम कुमार तिवारी, जिला परियोजना प्रबंधक संजय सक्सेना, मुख्य कृषि अधिकारी गोपाल सिंह भंडारी, मुख्य उद्यान अधिकारी तेजपाल सिंह सहित विभिन्न विभागों के अधिकारी, उद्योग प्रतिनिधि और निर्यातक उपस्थित रहे।अब देखने वाली बात यह होगी कि जिला प्रशासन की यह पहल केवल बैठकों तक सीमित रहती है या आने वाले समय में हरिद्वार वास्तव में निर्यात के क्षेत्र में एक नई पहचान बनाकर प्रदेश की आर्थिक ताकत बनता है।

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