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काट्टा पीर मेले पर सोशल मीडिया से उठी ‘बहिष्कार’ की आवाज! वायरल पोस्ट ने सुल्तानपुर में बढ़ाई हलचल,, “61 लाख के ठेके और महंगाई का हवाला देकर मेले से दूरी बनाने की अपील” — फेसबुक पोस्ट के बाद गांव-गांव में तेज हुई चर्चा,, “झगड़े-फसाद की आशंका, बढ़ती कीमतें और जनता पर बोझ का दावा — वायरल संदेश ने काट्टा पीर मेले को बहस के केंद्र में ला खड़ा किया”

इन्तजार रजा हरिद्वार- काट्टा पीर मेले पर सोशल मीडिया से उठी ‘बहिष्कार’ की आवाज! वायरल पोस्ट ने सुल्तानपुर में बढ़ाई हलचल,,

“61 लाख के ठेके और महंगाई का हवाला देकर मेले से दूरी बनाने की अपील” — फेसबुक पोस्ट के बाद गांव-गांव में तेज हुई चर्चा,,

“झगड़े-फसाद की आशंका, बढ़ती कीमतें और जनता पर बोझ का दावा — वायरल संदेश ने काट्टा पीर मेले को बहस के केंद्र में ला खड़ा किया”

सुल्तानपुर क्षेत्र के चर्चित काट्टा पीर मेले को लेकर सोशल मीडिया पर एक पोस्ट इन दिनों चर्चा का बड़ा विषय बनी हुई है। फेसबुक पर एक व्यक्ति द्वारा साझा की गई अपील ने स्थानीय स्तर पर नई बहस छेड़ दी है। पोस्ट में क्षेत्रवासियों से मेले का पूर्ण बहिष्कार करने, परिवार को मेले में न ले जाने और इस संदेश को अधिक से अधिक लोगों तक पहुंचाने की अपील की गई है।

वायरल हो रही पोस्ट में दावा किया गया है कि मेले के आयोजन से जुड़ा ठेका इस बार काफी महंगा हो गया है। पोस्ट के अनुसार पहले जो ठेका करीब 20 से 30 लाख रुपये में छोड़ा जाता था, वह अब बढ़कर लगभग 61 लाख रुपये तक पहुंच गया है। पोस्ट साझा करने वाले व्यक्ति ने सवाल उठाया कि जब ठेका राशि इतनी अधिक होगी तो उसका बोझ दुकानदारों पर पड़ेगा और दुकानदार अंततः उस खर्च की भरपाई आम जनता से ही करेंगे।

पोस्ट में यह भी कहा गया कि मेले के दौरान पूर्व में झगड़े और विवाद जैसी घटनाएं सामने आती रही हैं। ऐसे में लोगों को अपने परिवार और बच्चों के साथ वहां जाने से बचना चाहिए। अपील में यह संदेश भी दिया गया कि यदि जनता एकजुट होकर मेले से दूरी बनाएगी तो आयोजकों और व्यवस्था से जुड़े लोगों तक एक बड़ा संदेश पहुंचेगा।

सोशल मीडिया पर यह पोस्ट सामने आने के बाद क्षेत्र में चर्चाओं का दौर तेज हो गया है। गांव की चौपालों से लेकर मोबाइल स्क्रीन तक यही चर्चा सुनाई दे रही है कि आखिर इस अपील के पीछे असली वजह क्या है। कुछ लोग इसे महंगाई और व्यवस्था को लेकर जनता की चिंता बता रहे हैं, जबकि कुछ इसे व्यक्तिगत सोच या विरोध का हिस्सा मान रहे हैं।

हालांकि वायरल पोस्ट में किए गए दावों की अभी तक किसी प्रशासनिक अधिकारी या मेला समिति की ओर से आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है। ठेका राशि और अन्य आरोपों को लेकर भी कोई आधिकारिक दस्तावेज या बयान सार्वजनिक नहीं हुआ है।

फिलहाल इतना तय है कि सोशल मीडिया की इस एक पोस्ट ने काट्टा पीर मेले को चर्चा के केंद्र में ला दिया है। अब देखने वाली बात होगी कि प्रशासन, मेला समिति या संबंधित पक्ष इस वायरल अपील पर क्या रुख अपनाते हैं और क्या इस मामले पर कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने आती है।

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