ज्वालापुर विधानसभा के गांव गढ़ में सियासी ‘सन्नाटा’ या जनप्रतिनिधियों की चुप्पी? पंचायत सदस्य की सोशल मीडिया पोस्ट से उठा सवालों का तूफान!,, “ईदगाह मार्ग की बदहाल सड़क पर छलका दर्द — ग्राम पंचायत सदस्य राव अरशद अली बोले, ‘स्थायी नहीं तो कम से कम अस्थायी व्यवस्था ही कर दो,, “ग्राम प्रधान जावेद, जिला पंचायत सदस्य नदीम अली और स्थानीय विधायक रवि बहादुर तक को किया टैग! सोशल मीडिया पोस्ट में झलकी नाराज़गी, बोले लोग — आखिर कब जागेंगे जिम्मेदार?”

इन्तजार रजा हरिद्वार- ज्वालापुर विधानसभा के गांव गढ़ में सियासी ‘सन्नाटा’ या जनप्रतिनिधियों की चुप्पी? पंचायत सदस्य की सोशल मीडिया पोस्ट से उठा सवालों का तूफान!,,
“ईदगाह मार्ग की बदहाल सड़क पर छलका दर्द — ग्राम पंचायत सदस्य राव अरशद अली बोले, ‘स्थायी नहीं तो कम से कम अस्थायी व्यवस्था ही कर दो,,
“ग्राम प्रधान जावेद, जिला पंचायत सदस्य नदीम अली और स्थानीय विधायक रवि बहादुर तक को किया टैग! सोशल मीडिया पोस्ट में झलकी नाराज़गी, बोले लोग — आखिर कब जागेंगे जिम्मेदार?”
ज्वालापुर विधानसभा क्षेत्र के गांव गढ़ में एक बार फिर बदहाल सड़क और स्थानीय समस्याओं को लेकर जनप्रतिनिधियों की कार्यशैली सवालों के घेरे में आती दिखाई दे रही है। इस बार मामला किसी धरना-प्रदर्शन या ज्ञापन का नहीं, बल्कि सोशल मीडिया पर वायरल हो रही एक पोस्ट का है, जिसने गांव की राजनीति और विकास कार्यों को लेकर नई बहस छेड़ दी है।
ग्राम पंचायत सदस्य राव अरशद अली ने अपने सोशल मीडिया अकाउंट के माध्यम से एक भावनात्मक और तीखा संदेश साझा किया है। इस पोस्ट में उन्होंने गांव गढ़ की ईदगाह वाली सड़क की खराब स्थिति पर नाराज़गी जताते हुए स्थानीय जनप्रतिनिधियों को सीधे तौर पर संबोधित किया है। पोस्ट में ग्राम प्रधान गढ़ जावेद, जिला पंचायत सदस्य नदीम और विधायक रवि बहादुर का उल्लेख करते हुए उन्होंने सवालिया अंदाज में अपनी पीड़ा जाहिर की।
राव अरशद अली ने लिखा कि अगर सड़क का स्थायी समाधान फिलहाल संभव नहीं है, तो कम से कम अस्थायी व्यवस्था ही कर दी जाए, ताकि ईद के मौके पर नमाज अदा करने आने वाले लोगों को परेशानी न उठानी पड़े। पोस्ट की भाषा और उसमें इस्तेमाल किए गए शब्दों से साफ झलकता है कि यह सिर्फ शिकायत नहीं, बल्कि लंबे समय से जमा नाराज़गी का विस्फोट है।
सबसे बड़ी बात यह है कि सोशल मीडिया पर साझा की गई इस पोस्ट के बाद गांव में चर्चाओं का बाजार गर्म हो गया है। लोग सवाल उठा रहे हैं कि आखिर यदि एक जनप्रतिनिधि को अपनी बात रखने के लिए सार्वजनिक मंच का सहारा लेना पड़ रहा है, तो आम जनता की समस्याओं का हाल क्या होगा?
क्षेत्र में चर्चा इस बात की भी है कि क्या संबंधित सड़क का मामला पहले भी जिम्मेदारों के सामने उठाया गया था? यदि हां, तो आखिर अब तक समाधान क्यों नहीं हुआ? गांव के लोगों का कहना है कि ईद जैसे बड़े धार्मिक अवसर से पहले सड़क की व्यवस्था होना बेहद जरूरी है, क्योंकि खराब रास्ते से बुजुर्गों, महिलाओं और बच्चों को परेशानी उठानी पड़ सकती है।
हालांकि अभी तक संबंधित जनप्रतिनिधियों की ओर से इस पोस्ट पर कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है, लेकिन सोशल मीडिया पर उठी यह आवाज अब गांव की चौपालों से लेकर राजनीतिक गलियारों तक पहुंचती दिखाई दे रही है।
फिलहाल बड़ा सवाल यही है — क्या यह पोस्ट केवल एक भावनात्मक प्रतिक्रिया है या गांव गढ़ में विकास कार्यों की धीमी रफ्तार पर उठी गंभीर चेतावनी? आने वाले दिनों में जिम्मेदारों की प्रतिक्रिया और जमीनी कार्रवाई इस पूरे मामले की दिशा तय करेगी।



