तालाब किनारे बांस के पेड़ कटान पर घमासान! पहले ग्राम प्रधान पर लगे गबन के आरोप, अब प्रधान ने ही अज्ञात लोगों पर दर्ज कराई शिकायत,, “खसरा संख्या 484 की तालाब भूमि बना विवाद का केंद्र” — विक्रम सिंह बोले: बिना प्रस्ताव कटे लाखों के बांस, ग्राम प्रधान का पलटवार — पंचायत ने नहीं दिया कोई आदेश!,, “गांव में उठे कई सवाल: बांस किसने काटे? किसके इशारे पर हुआ कटान? शिकायत बनाम जवाबी तहरीर के बीच जांच पर टिकी सबकी नजर,,

इन्तजार रजा हरिद्वार- तालाब किनारे बांस के पेड़ कटान पर घमासान! पहले ग्राम प्रधान पर लगे गबन के आरोप, अब प्रधान ने ही अज्ञात लोगों पर दर्ज कराई शिकायत,,
“खसरा संख्या 484 की तालाब भूमि बना विवाद का केंद्र” — विक्रम सिंह बोले: बिना प्रस्ताव कटे लाखों के बांस, ग्राम प्रधान का पलटवार — पंचायत ने नहीं दिया कोई आदेश!,,
“गांव में उठे कई सवाल: बांस किसने काटे? किसके इशारे पर हुआ कटान? शिकायत बनाम जवाबी तहरीर के बीच जांच पर टिकी सबकी नजर,,
हरिद्वार क्षेत्र के ग्राम गढ़ में तालाब की भूमि पर खड़े बांस के पेड़ों की कटाई का मामला अब नया मोड़ लेता दिखाई दे रहा है। पहले गांव निवासी विक्रम सिंह ने तहसीलदार हरिद्वार को शिकायती पत्र देकर ग्राम प्रधान पर गंभीर आरोप लगाए थे, वहीं अब ग्राम प्रधान जावेद हसन ने भी पुलिस को तहरीर देकर पूरे मामले में खुद को निर्दोष बताते हुए अज्ञात व्यक्तियों पर कार्रवाई की मांग कर दी है। दोनों पक्षों की शिकायतों के बाद गांव में चर्चाओं और सवालों का बाजार गर्म हो गया है।
पूरा मामला ग्राम पंचायत गढ़ की खसरा संख्या 484 से जुड़ा हुआ बताया जा रहा है, जो राजस्व अभिलेखों में तालाब भूमि के रूप में दर्ज होने की बात कही जा रही है। इसी तालाब के किनारे खड़े बांस के पेड़ों की कटाई को लेकर विवाद खड़ा हुआ है। मामला अब सिर्फ पेड़ों की कटाई तक सीमित नहीं रह गया बल्कि पंचायत संपत्तियों के संरक्षण, जवाबदेही और प्रशासनिक निगरानी तक पहुंच गया है।
गांव निवासी विक्रम सिंह ने तहसीलदार को दिए गए शिकायती पत्र में आरोप लगाया था कि दिनांक 12 मई 2026 को ग्राम प्रधान द्वारा बिना ग्राम सभा प्रस्ताव और बिना किसी वैधानिक अनुमति के तालाब किनारे खड़े लाखों रुपये कीमत के बांस के पेड़ कटवा दिए गए। शिकायत में वित्तीय अनियमितता और गबन जैसी आशंकाएं भी जताई गईं। उनका कहना था कि यदि यह पंचायत अथवा सार्वजनिक संपत्ति थी तो उसके उपयोग और कटान की प्रक्रिया नियमों के अनुरूप होनी चाहिए थी।
विक्रम सिंह के आरोपों के सामने आने के बाद गांव में कई तरह की चर्चाएं शुरू हो गईं। लोग सवाल उठाने लगे कि क्या ग्राम सभा की स्वीकृति ली गई थी? क्या कटान का कोई रिकॉर्ड मौजूद है? क्या वन विभाग या राजस्व विभाग की प्रक्रिया अपनाई गई? और सबसे बड़ा सवाल— कटे हुए बांस आखिर कहां गए?
लेकिन अब इस मामले ने नया मोड़ तब ले लिया जब ग्राम प्रधान जावेद हसन ने कोतवाली रानीपुर और चौकी सुमन नगर में तहरीर देकर खुद को आरोपों से अलग बताया। ग्राम प्रधान ने अपनी शिकायत में कहा कि ग्राम पंचायत की ओर से बांस कटान के लिए कोई प्रस्ताव पारित नहीं किया गया और न ही किसी को ऐसी अनुमति दी गई थी।
प्रधान जावेद हसन ने अपनी तहरीर में कहा कि उन्हें अचानक जानकारी मिली कि खसरा संख्या 484 की तालाब भूमि के किनारे खड़े कुछ बांस अज्ञात व्यक्तियों द्वारा काट दिए गए हैं। ग्राम प्रधान का कहना है कि इस घटना की जानकारी पंचायत को पहले से नहीं थी और अब उनके खिलाफ विभिन्न प्रकार के आरोप लगाए जा रहे हैं, जबकि पंचायत की ओर से ऐसा कोई आदेश जारी नहीं हुआ।
प्रधान ने प्रथम दृष्टया किसी शरारती तत्व या अज्ञात व्यक्ति द्वारा बिना अनुमति बांस काटे जाने की आशंका जताई है। साथ ही उन्होंने पुलिस से पूरे मामले की निष्पक्ष जांच कर दोषियों के खिलाफ कानूनी कार्रवाई की मांग की है।
अब गांव में चर्चा इस बात की भी हो रही है कि यदि पंचायत ने कोई आदेश नहीं दिया, तो आखिर पेड़ों की कटाई किसने कराई? क्या किसी ने पंचायत संपत्ति पर हाथ साफ किया या फिर मामला कुछ और है? ग्रामीणों का कहना है कि अब सच्चाई सामने आना बेहद जरूरी है क्योंकि आरोप और जवाबी आरोपों के बीच वास्तविक स्थिति धुंधली होती जा रही है।
ग्रामीणों का यह भी कहना है कि यदि पंचायत की सार्वजनिक संपत्तियों की निगरानी मजबूत होती तो शायद इस तरह के विवाद सामने नहीं आते। वहीं कुछ लोगों का मानना है कि जांच के बाद ही यह स्पष्ट हो पाएगा कि मामला प्रशासनिक लापरवाही का है, अवैध कटान का या फिर किसी बड़ी साजिश का हिस्सा।
फिलहाल दोनों पक्षों की शिकायतें प्रशासन और पुलिस तक पहुंच चुकी हैं। अब निगाहें जांच एजेंसियों पर टिक गई हैं कि आखिर खसरा संख्या 484 के बांस कटान मामले की असल कहानी क्या है। गांव में हर किसी की जुबान पर अब एक ही सवाल है— क्या यह सिर्फ बांस कटान है या फिर इसके पीछे कोई बड़ा खेल छिपा है?
नोट: यह खबर शिकायतकर्ता विक्रम सिंह एवं ग्राम प्रधान जावेद हसन द्वारा दिए गए शिकायत पत्रों और आरोपों/पक्ष पर आधारित है। मामले की प्रशासनिक एवं पुलिस जांच अभी लंबित है प्रशासनिक जांच और आधिकारिक पक्ष आना अभी बाकी है।)



