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कुंभ-2027 की तैयारी में ‘हरित हरिद्वार मिशन’ का आगाज! हरिद्वार को हरा-भरा और स्वच्छ बनाने के लिए मेला प्रशासन का बड़ा अभियान शुरू,, “सिर्फ पौधे नहीं, हरियाली का भविष्य तैयार होगा” — सीडीओ डॉ. ललित नारायण मिश्रा बोले, जनभागीदारी से होगा व्यापक वृक्षारोपण और संरक्षण,, “कुंभ केवल आस्था नहीं, पर्यावरण संरक्षण का भी महाअभियान” — मेलाधिकारी सोनिका ने युवाओं, संस्थाओं और आमजन से की ‘हरित हरिद्वार अभियान’ में बढ़-चढ़कर भागीदारी की अपील,,

इन्तजार रजा हरिद्वार- कुंभ-2027 की तैयारी में ‘हरित हरिद्वार मिशन’ का आगाज! हरिद्वार को हरा-भरा और स्वच्छ बनाने के लिए मेला प्रशासन का बड़ा अभियान शुरू,,

“सिर्फ पौधे नहीं, हरियाली का भविष्य तैयार होगा” — सीडीओ डॉ. ललित नारायण मिश्रा बोले, जनभागीदारी से होगा व्यापक वृक्षारोपण और संरक्षण,,

“कुंभ केवल आस्था नहीं, पर्यावरण संरक्षण का भी महाअभियान” — मेलाधिकारी सोनिका ने युवाओं, संस्थाओं और आमजन से की ‘हरित हरिद्वार अभियान’ में बढ़-चढ़कर भागीदारी की अपील,,

हरिद्वार, 22 मई 2026। विश्व प्रसिद्ध कुंभ मेला-2027 की तैयारियों के बीच हरिद्वार को केवल धार्मिक और व्यवस्थागत रूप से ही नहीं, बल्कि पर्यावरणीय दृष्टि से भी आदर्श बनाने की दिशा में बड़ा कदम उठाया गया है। मेला प्रशासन और हरिद्वार-रूड़की विकास प्राधिकरण (एचआरडीए) की पहल पर “हरित हरिद्वार अभियान” शुरू किया जा रहा है, जिसका उद्देश्य आगामी कुंभ से पहले हरिद्वार को स्वच्छ, सुंदर और हरियाली से भरपूर बनाना है। इस महत्वाकांक्षी अभियान के तहत मानसून सत्र में कुंभ क्षेत्र सहित विभिन्न स्थानों पर बड़े पैमाने पर पौधारोपण कराया जाएगा।

इस अभियान की सबसे खास बात यह है कि इसे केवल सरकारी योजना तक सीमित नहीं रखा गया है, बल्कि आम नागरिकों, सामाजिक संगठनों, युवाओं और संस्थाओं की सक्रिय भागीदारी सुनिश्चित करने पर विशेष जोर दिया गया है। प्रशासन का मानना है कि जनसहयोग के बिना पर्यावरण संरक्षण की कोई भी पहल स्थायी सफलता हासिल नहीं कर सकती।

मेला अधिकारी एवं हरिद्वार-रूड़की विकास प्राधिकरण की उपाध्यक्ष श्रीमती सोनिका की पहल पर संचालित किए जा रहे इस अभियान के लिए मुख्य विकास अधिकारी हरिद्वार डॉ. ललित नारायण मिश्रा को समग्र नोडल अधिकारी नियुक्त किया गया है। अभियान की रूपरेखा साझा करते हुए डॉ. मिश्रा ने कहा कि “हरित हरिद्वार अभियान” सिर्फ पौधे लगाने तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि लगाए गए पौधों की सुरक्षा, संरक्षण और दीर्घकालिक देखभाल भी सुनिश्चित की जाएगी।

उन्होंने कहा कि अक्सर वृक्षारोपण अभियान केवल फोटो और कार्यक्रम तक सीमित रह जाते हैं, लेकिन इस अभियान में पौधों को जीवित रखना सबसे बड़ी प्राथमिकता होगी। इसके लिए संरक्षण व्यवस्था और स्थानीय सहभागिता पर विशेष फोकस किया जाएगा।

डॉ. मिश्रा ने बताया कि इच्छुक व्यक्ति, संस्थाएं, स्कूल, कॉलेज, स्वयंसेवी संगठन और सामाजिक समूह ऐसे स्थानों की पहचान कर सकते हैं जहां पौधारोपण कराया जाना है। संबंधित स्थानों की सूचना प्राधिकरण को उपलब्ध कराने पर विभागीय स्तर पर समन्वय स्थापित कर पौधारोपण और उसके संरक्षण की व्यवस्था सुनिश्चित की जाएगी।

उन्होंने कहा कि हरिद्वार जैसे धार्मिक और सांस्कृतिक महत्व वाले शहर में पर्यावरण संरक्षण का संदेश केवल स्थानीय लोगों तक नहीं, बल्कि देश-दुनिया से आने वाले करोड़ों श्रद्धालुओं तक पहुंचेगा। ऐसे में “हरित हरिद्वार अभियान” एक पर्यावरणीय जनआंदोलन का स्वरूप ले सकता है।

अधिकारियों का कहना है कि कुंभ मेला-2027 केवल आस्था और धार्मिक अनुष्ठानों का आयोजन नहीं होगा, बल्कि यह स्वच्छता, पर्यावरण जागरूकता और सामाजिक सहभागिता का भी बड़ा मंच बनेगा। प्रशासन चाहता है कि कुंभ क्षेत्र में आने वाले श्रद्धालु एक ऐसे हरिद्वार को देखें जो स्वच्छ हो, व्यवस्थित हो और हरियाली से भरपूर हो।

मेला अधिकारी श्रीमती सोनिका ने आमजन, सामाजिक संस्थाओं, स्वयंसेवी संगठनों और युवाओं से अपील करते हुए कहा कि यह केवल प्रशासन का कार्यक्रम नहीं बल्कि हर नागरिक की जिम्मेदारी है। यदि समाज का हर वर्ग इस अभियान में भागीदारी निभाए तो हरिद्वार को नई पहचान दी जा सकती है।

उन्होंने कहा कि पौधारोपण केवल एक दिन का कार्यक्रम नहीं होना चाहिए, बल्कि यह जिम्मेदारी का संकल्प बनना चाहिए। पौधा लगाना जितना जरूरी है, उससे कहीं अधिक जरूरी उसकी देखभाल और संरक्षण करना है।

अभियान से जुड़ने और अधिक जानकारी प्राप्त करने के लिए मेला प्रशासन की ओर से संपर्क नंबर भी जारी किए गए हैं। इच्छुक नागरिक 9084700675 और 9084700674 पर संपर्क कर अभियान से जुड़ सकते हैं।

हरिद्वार में कुंभ-2027 को लेकर प्रशासनिक तैयारियां लगातार गति पकड़ रही हैं। एक ओर जहां आधारभूत सुविधाओं को मजबूत किया जा रहा है, वहीं अब पर्यावरण संरक्षण को भी प्राथमिकता देकर हरिद्वार को नई पहचान देने की कोशिश शुरू हो चुकी है। अब देखना यह होगा कि “हरित हरिद्वार अभियान” प्रशासनिक योजना से आगे बढ़कर जनआंदोलन बन पाता है या नहीं।

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