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ग्राम समाज की जमीन पर कब्जे का जिन्न फिर बाहर! गढ़ गांव में मार्केट निर्माण को लेकर डीएम से शिकायत,, राजस्व अभिलेखों में हेरफेर और अवैध कब्जे की जांच की मांग,, ग्रामीण बोले- ग्राम समाज की संपत्ति बचाए प्रशासन, दोषियों पर हो कड़ी कार्रवाई,,

ग्राम समाज की जमीन पर कब्जे का जिन्न फिर बाहर! गढ़ गांव में मार्केट निर्माण को लेकर डीएम से शिकायत,,

राजस्व अभिलेखों में हेरफेर और अवैध कब्जे की जांच की मांग,,

ग्रामीण बोले- ग्राम समाज की संपत्ति बचाए प्रशासन, दोषियों पर हो कड़ी कार्रवाई,,

वाजिद अली हरिद्वार …हरिद्वार जनपद के गढ़ गांव में ग्राम समाज की भूमि को लेकर पुराना विवाद एक बार फिर तूल पकड़ता नजर आ रहा है। जिलाधिकारी हरिद्वार को सौंपे गए शिकायत पत्र में ग्रामीणों ने आरोप लगाया है कि ग्राम समाज की भूमि पर कब्जा कर बाजार और दुकानों का निर्माण किया गया, जिससे वर्षों से निजी लाभ अर्जित किया जा रहा है। शिकायत के बाद गांव में चर्चाओं का बाजार गर्म हो गया है।

शिकायतकर्ताओं का आरोप है कि गांव की सार्वजनिक उपयोग वाली भूमि पर कथित रूप से “राव जुबेर मार्केट” का निर्माण कराया गया। उनका कहना है कि यह भूमि ग्राम समाज के नाम दर्ज है, लेकिन उस पर निजी स्वामित्व की तरह निर्माण और व्यवसायिक गतिविधियां संचालित की जा रही हैं। शिकायत में आरोप लगाया गया है कि संबंधित लोगों ने भूमि पर कब्जा जमाकर दुकानों से आर्थिक लाभ प्राप्त किया है।

ग्रामीणों ने अपने प्रार्थना पत्र में राजस्व अभिलेखों की भी जांच कराने की मांग की है। उनका कहना है कि भूमि से संबंधित दस्तावेजों और रिकॉर्ड की निष्पक्ष जांच कराई जाए ताकि यह स्पष्ट हो सके कि विवादित भूमि की वास्तविक स्थिति क्या है। शिकायतकर्ताओं ने आशंका जताई है कि यदि समय रहते कार्रवाई नहीं हुई तो भूमि के स्वामित्व को लेकर और अधिक विवाद खड़ा हो सकता है।

शिकायत में प्रशासन से मांग की गई है कि ग्राम समाज की भूमि को कब्जामुक्त कराया जाए तथा यदि आरोप सही पाए जाते हैं तो संबंधित व्यक्तियों के खिलाफ राजस्व और विधिक कार्रवाई अमल में लाई जाए। साथ ही कथित रूप से भूमि से अर्जित आय की जांच कर आवश्यक कार्रवाई करने की भी मांग उठाई गई है।

मामला प्रशासन तक पहुंचने के बाद ग्रामीणों की नजरें अब जिला प्रशासन की कार्रवाई पर टिकी हैं। हालांकि शिकायत में लगाए गए आरोपों की अभी तक आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है और न ही संबंधित पक्ष का कोई पक्ष सार्वजनिक रूप से सामने आया है। ऐसे में पूरे मामले की सच्चाई प्रशासनिक जांच के बाद ही स्पष्ट हो सकेगी।

(नोट: यह समाचार शिकायत पत्र में लगाए गए आरोपों पर आधारित है। आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है। प्रशासनिक जांच और संबंधित पक्ष का पक्ष सामने आने के बाद स्थिति स्पष्ट होगी।)

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