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दरगाह में ड्यूटी फेरबदल से मची हलचल! मलाईदार जिम्मेदारियों पर रसूखदारों की नजर, देहरादून तक पहुंची पैरवी की घंटियां,, नई व्यवस्था लागू होते ही शुरू हुआ दबाव का खेल, प्रभावशाली लोगों के फोन से गूंज रहा प्रबंधन कार्यालय,, सुधार की पहल या रसूख की लड़ाई? चहेते सुपरवाइजरों को लाभ दिलाने की कोशिशों ने बढ़ाई चर्चाएं,,

दरगाह प्रशासन द्वारा हाल ही में जारी नई ड्यूटी चार्ट में व्यवस्थाओं को चुस्त-दुरुस्त करने के उद्देश्य से कई महत्वपूर्ण फेरबदल किए गए हैं। विभिन्न सुपरवाइजरों और कर्मचारियों को नई जिम्मेदारियां सौंपी गई हैं ताकि जायरीनों को बेहतर सुविधाएं मिल सकें और दरगाह की व्यवस्थाएं अधिक पारदर्शी एवं प्रभावी बन सकें।

दरगाह में ड्यूटी फेरबदल से मची हलचल! मलाईदार जिम्मेदारियों पर रसूखदारों की नजर, देहरादून तक पहुंची पैरवी की घंटियां,,

नई व्यवस्था लागू होते ही शुरू हुआ दबाव का खेल, प्रभावशाली लोगों के फोन से गूंज रहा प्रबंधन कार्यालय,,

सुधार की पहल या रसूख की लड़ाई? चहेते सुपरवाइजरों को लाभ दिलाने की कोशिशों ने बढ़ाई चर्चाएं,,

पिरान कलियर दरगाह की व्यवस्थाओं में सुधार और जवाबदेही बढ़ाने के लिए जारी किए गए नए ड्यूटी चार्ट के बाद दरगाह प्रशासनिक गलियारों में हलचल तेज हो गई है। लंबे समय से एक ही स्थान और एक ही प्रकार की जिम्मेदारियों पर जमे कर्मचारियों और सुपरवाइजरों के कार्यक्षेत्र में बदलाव किए जाने के बाद अब पर्दे के पीछे रसूख और पैरवी का खेल शुरू हो गया है।

सूत्रों के अनुसार दरगाह प्रशासन ने व्यवस्थाओं को अधिक पारदर्शी और प्रभावी बनाने के उद्देश्य से कई कर्मचारियों की ड्यूटी में फेरबदल किया है। नई जिम्मेदारियों के तहत विभिन्न अनुभागों की निगरानी, लंगर व्यवस्था, दुकानों से राजस्व वसूली, वीआईपी व्यवस्थाएं, विद्युत एवं जल आपूर्ति, सफाई व्यवस्था और लेखा संबंधी कार्यों का पुनर्वितरण किया गया है।

लेकिन जैसे ही नई सूची सामने आई, वैसे ही कुछ तथाकथित “मलाईदार ड्यूटी” को लेकर अंदरखाने असंतोष की चर्चाएं शुरू हो गईं। बताया जा रहा है कि वर्षों से विशेष स्थानों पर कार्य कर रहे कुछ प्रभावशाली कर्मचारियों और उनके समर्थकों को यह फेरबदल रास नहीं आ रहा है। यही कारण है कि आदेश जारी होने के कुछ ही घंटों बाद देहरादून तक फोन की घंटियां बजने लगीं।

सूत्र बताते हैं कि एक “छोटा कद और बड़ा पद” रखने वाले प्रभावशाली व्यक्ति समेत कई रसूखदार लोग लगातार दरगाह प्रबंधन कार्यालय और उच्च अधिकारियों से संपर्क साध रहे हैं। उनका प्रयास है कि जारी आदेशों में संशोधन कर उनके पसंदीदा सुपरवाइजरों को फिर से वही जिम्मेदारियां सौंप दी जाएं, जिन्हें कर्मचारी वर्ग में “मलाईदार ड्यूटी” माना जाता है।

दरअसल दरगाह में कुछ जिम्मेदारियां ऐसी मानी जाती हैं जहां प्रतिदिन बड़ी संख्या में जायरीन, ठेकेदार, दुकानदार और अन्य व्यवस्थागत गतिविधियां जुड़ी रहती हैं। ऐसे पदों पर तैनाती को लेकर हमेशा से खींचतान और प्रतिस्पर्धा देखने को मिलती रही है। प्रशासनिक फेरबदल के बाद अब यही वर्ग सबसे अधिक सक्रिय दिखाई दे रहा है।

चर्चा यह भी है कि कुछ लोगों ने राजनीतिक और प्रशासनिक संपर्कों का सहारा लेकर आदेशों को प्रभावित करने की कोशिश शुरू कर दी है। प्रबंधन कार्यालय में लगातार फोन कॉल, सिफारिशें और संदेश पहुंचने की खबरें कर्मचारियों के बीच चर्चा का विषय बनी हुई हैं। हालांकि आधिकारिक तौर पर कोई भी अधिकारी इस विषय पर खुलकर बोलने को तैयार नहीं है।

दरगाह से जुड़े जानकारों का मानना है कि यदि सुधार के उद्देश्य से फेरबदल किया गया है तो उसे बिना किसी दबाव के लागू किया जाना चाहिए। उनका कहना है कि लंबे समय तक एक ही व्यक्ति के पास एक जैसी जिम्मेदारी रहने से पारदर्शिता प्रभावित होती है और कार्यप्रणाली पर सवाल उठने लगते हैं। ऐसे में समय-समय पर ड्यूटी रोटेशन व्यवस्था प्रशासनिक दृष्टि से आवश्यक मानी जाती है।दूसरी ओर कर्मचारियों के बीच यह चर्चा भी है कि नई व्यवस्था लागू होने से कई पुराने समीकरण प्रभावित हुए हैं। यही कारण है कि कुछ लोग हर संभव प्रयास कर रहे हैं ताकि आदेशों में बदलाव कर अपने समर्थकों को पुनः लाभकारी जिम्मेदारियां दिलाई जा सकें।

अब सबकी नजर दरगाह प्रशासन और उच्च अधिकारियों पर टिकी हुई है। यह देखना दिलचस्प होगा कि सुधार और पारदर्शिता के नाम पर जारी किए गए आदेश ज्यों के त्यों लागू रहते हैं या फिर रसूख और पैरवी के दबाव में उनमें कोई नया फेरबदल देखने को मिलता है। फिलहाल दरगाह के प्रशासनिक गलियारों में एक ही चर्चा है—क्या व्यवस्था सुधार की यह कवायद सफल होगी या फिर “मलाईदार ड्यूटी” की दौड़ एक बार फिर भारी पड़ जाएगी?

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