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फर्जी शस्त्र लाइसेंस सिंडिकेट पर STF का सबसे बड़ा वार! करोड़ों के काले कारोबार का मास्टरमाइंड दबोचा गया,, ‘अपराध मुक्त उत्तराखण्ड’ मिशन के तहत बड़ी कार्रवाई, फर्जी लाइसेंसों के सहारे हथियारों का जाल बिछाने वाले गिरोह की खुल रही परतें,, बैंक खाते में मिले 1.70 करोड़ रुपये के लेन-देन, 14 अवैध हथियार और 355 कारतूस बरामद; STF के रडार पर हजारों संदिग्ध लाइसेंस धारक,,

फर्जी शस्त्र लाइसेंस सिंडिकेट पर STF का सबसे बड़ा वार! करोड़ों के काले कारोबार का मास्टरमाइंड दबोचा गया,,

‘अपराध मुक्त उत्तराखण्ड’ मिशन के तहत बड़ी कार्रवाई, फर्जी लाइसेंसों के सहारे हथियारों का जाल बिछाने वाले गिरोह की खुल रही परतें,,

बैंक खाते में मिले 1.70 करोड़ रुपये के लेन-देन, 14 अवैध हथियार और 355 कारतूस बरामद; STF के रडार पर हजारों संदिग्ध लाइसेंस धारक,,

देहरादून/काशीपुर। उत्तराखण्ड को अपराध मुक्त बनाने की दिशा में स्पेशल टास्क फोर्स (STF) ने एक और बड़ा प्रहार करते हुए फर्जी शस्त्र लाइसेंस रैकेट के कथित मास्टरमाइंड को गिरफ्तार कर लिया है। लंबे समय से उत्तराखण्ड और उत्तर प्रदेश के बीच फैले इस नेटवर्क की तलाश कर रही STF ने सोमवार को रुद्रपुर क्षेत्र से सतानन्द शर्मा को दबोच लिया। STF का दावा है कि आरोपी वर्षों से फर्जी और कूटरचित शस्त्र लाइसेंस तैयार कर लोगों को उपलब्ध करा रहा था और इस अवैध कारोबार के जरिए करोड़ों रुपये की कमाई कर चुका है।

STF की जांच में सामने आया है कि गिरफ्तार आरोपी सतानन्द शर्मा के बैंक खाते में फर्जी शस्त्र लाइसेंसों के कारोबार से करीब 1 करोड़ 70 लाख रुपये का लेन-देन हुआ है। यह खुलासा होने के बाद जांच एजेंसियों ने आरोपी के वित्तीय नेटवर्क और उसके संपर्कों की भी पड़ताल शुरू कर दी है।

उत्तराखण्ड में हथियारों का समानांतर नेटवर्क खड़ा करने की साजिश?

STF अधिकारियों के अनुसार, बाहरी राज्यों से उत्तराखण्ड में स्थानांतरित होकर आए कई शस्त्र लाइसेंसों की जांच के दौरान बड़े पैमाने पर फर्जीवाड़े का खुलासा हुआ था। इसी आधार पर 4 जून 2026 को काशीपुर कोतवाली में मुकदमा दर्ज किया गया था। जांच आगे बढ़ी तो पूरा नेटवर्क सामने आने लगा।

एसटीएफ की अब तक की कार्रवाई में 14 अवैध शस्त्र बरामद किए जा चुके हैं, जिनमें 2 ऑटोमैटिक पम्प एक्शन गन, 2 रायफल, 9 पिस्टल और 1 रिवॉल्वर शामिल हैं। इसके अलावा 355 जिंदा कारतूस और कई फर्जी लाइसेंस भी बरामद हुए हैं। इस मामले में अब तक 9 आरोपियों को गिरफ्तार कर जेल भेजा जा चुका है।

पुराने रिकॉर्ड गायब, उसी पर तैयार हुए नए लाइसेंस!

जांच एजेंसियों के मुताबिक आरोपी सतानन्द शर्मा ने जिला मजिस्ट्रेट कार्यालय शाहजहांपुर में कार्यरत कुछ लोगों की मदद से पुराने UIN नंबरों का दुरुपयोग किया। जिन लाइसेंसों का मूल रिकॉर्ड गायब हो चुका था, उन्हें ऑनलाइन पोर्टल पर कथित रूप से अपलोड कर वैध दिखाने की कोशिश की गई।

STF का दावा है कि सतानन्द शर्मा ने उधम सिंह नगर में बड़ी संख्या में लोगों के लाइसेंस सौरभ अग्रवाल और गौरव अग्रवाल के माध्यम से तैयार करवाए। इसके बदले मोटी रकम वसूली गई। जांच में कई अन्य लोगों के नाम भी सामने आए हैं जिनके लाइसेंस संदिग्ध पाए गए हैं।

पहले भी जा चुका है जेल, फिर शुरू कर दिया खेल

गिरफ्तार आरोपी का आपराधिक इतिहास भी बेहद गंभीर बताया जा रहा है। STF के अनुसार सतानन्द शर्मा वर्ष 2019 में गाजियाबाद और शाहजहांपुर में दर्ज फर्जी शस्त्र लाइसेंस मामलों में गिरफ्तार हो चुका है। उसके खिलाफ गैंगस्टर एक्ट के तहत भी कार्रवाई की जा चुकी है।

इसके बावजूद आरोपी ने कथित रूप से अपना नेटवर्क दोबारा सक्रिय कर लिया और उत्तराखण्ड तक अपना कारोबार फैला दिया। STF का मानना है कि इस पूरे नेटवर्क में कई और लोग शामिल हो सकते हैं, जिनकी पहचान की जा रही है।

हजारों लाइसेंसों की हो रही जांच, मचा हड़कंप

इस कार्रवाई के बाद पूरे उत्तराखण्ड में हथियार लाइसेंस धारकों के बीच हड़कंप मच गया है। STF ने साफ संकेत दिए हैं कि राज्य में बाहरी राज्यों से स्थानांतरित होकर आए हजारों शस्त्र लाइसेंसों का सत्यापन किया जा रहा है। जांच में यदि कोई भी लाइसेंस फर्जी पाया जाता है तो उसके धारक के खिलाफ कठोर कानूनी कार्रवाई की जाएगी।

एसएसपी STF अजय सिंह ने कहा कि फर्जी शस्त्र लाइसेंस राष्ट्रीय सुरक्षा और कानून व्यवस्था के लिए गंभीर खतरा हैं। ऐसे मामलों में उत्तराखण्ड पुलिस जीरो टॉलरेंस की नीति पर काम कर रही है और किसी भी दोषी को बख्शा नहीं जाएगा।

STF की चेतावनी: अभी भी मौका है, हथियार और लाइसेंस सरेंडर करें

STF ने उन लोगों को भी चेतावनी दी है जिनके पास संदिग्ध या फर्जी लाइसेंस हैं। अधिकारियों का कहना है कि ऐसे लोग स्वेच्छा से पुलिस के सामने अपने हथियार और लाइसेंस प्रस्तुत कर सकते हैं। भविष्य में जांच में दोषी पाए जाने पर कठोर कार्रवाई तय है।

STF ने आम जनता से भी अपील की है कि यदि किसी को फर्जी या संदिग्ध शस्त्र लाइसेंसों के बारे में कोई जानकारी हो तो तत्काल STF को सूचित करें। सूचनाकर्ता की पहचान पूरी तरह गोपनीय रखी जाएगी।

उत्तराखण्ड में फर्जी शस्त्र लाइसेंसों के खिलाफ चल रही इस मुहिम को अब तक की सबसे बड़ी कार्रवाई माना जा रहा है। STF की अगली कार्रवाई पर पूरे प्रदेश की नजरें टिकी हुई हैं, क्योंकि जांच की आंच अब कई और लोगों तक पहुंच सकती है।

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