कलियर शरीफ दरगाह की गोलक मे गबन कांड पर फिर उठे सवाल! जांच में दोषी ठहराए जाने के दावों के बावजूद कार्रवाई क्यों नहीं, अब SIT जांच की मांग तेज,, आस्था के दान पर कथित गड़बड़ी का मामला फिर चर्चा में, भदौरिया अधिवक्ताओं ने एसएसपी को सौंपा शिकायती प्रार्थना पत्र,, जांच, स्पष्टीकरण और कार्रवाई की संस्तुति के बाद भी क्यों नहीं दर्ज हुआ मुकदमा? संरक्षण, रसूख और पारदर्शिता पर खड़े हुए बड़े सवाल,, क्या बहाली पर फिर मंथन की जरूरत
जांच हुई, जवाब तलब हुआ, कार्रवाई की संस्तुति भी बनी... फिर किसके दबाव में थम गई फाइल?

कलियर शरीफ दरगाह की गोलक मे गबन कांड पर फिर उठे सवाल! जांच में दोषी ठहराए जाने के दावों के बावजूद कार्रवाई क्यों नहीं, अब SIT जांच की मांग तेज,,
आस्था के दान पर कथित गड़बड़ी का मामला फिर चर्चा में, भदौरिया अधिवक्ताओं ने एसएसपी को सौंपा शिकायती प्रार्थना पत्र,,
जांच, स्पष्टीकरण और कार्रवाई की संस्तुति के बाद भी क्यों नहीं दर्ज हुआ मुकदमा? संरक्षण, रसूख और पारदर्शिता पर खड़े हुए बड़े सवाल,, क्या बहाली पर फिर मंथन की जरूरत

विश्व प्रसिद्ध दरगाह हज़रत साबिर पाक कलियर शरीफ में श्रद्धालुओं द्वारा चढ़ाए जाने वाले दान और चढ़ावे को लेकर एक बार फिर गंभीर सवाल उठने लगे हैं। देश ही नहीं बल्कि विदेशों से आने वाले लाखों जायरीन की आस्था के केंद्र इस दरगाह में गोलक गिनती प्रक्रिया से जुड़े एक पुराने मामले को लेकर अब नई कानूनी लड़ाई शुरू हो गई है। हरिद्वार के अधिवक्ता अरुण भदोरिया, कमल भदोरिया और एलएलबी छात्र चेतन भदोरिया ने वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक हरिद्वार नवनीत सिंह भुल्लर को प्रार्थना पत्र देकर मामले में मुकदमा दर्ज करने और विशेष जांच दल (SIT) गठित करने की मांग उठाई है।
प्रार्थना पत्र में कहा गया है कि 11 जुलाई 2025 को पीरान कलियर स्थित साबरी गेस्ट हाउस में गोलक गिनती का कार्य चल रहा था। उस दौरान तहसील प्रशासन, अमीन, लेखाकार और अन्य जिम्मेदार अधिकारी मौजूद थे। शिकायतकर्ताओं का आरोप है कि गिनती के दौरान तैनात एक सुपरवाइजर ने कथित रूप से गोलक से निकली धनराशि में से कुछ रकम अपनी जेब में रख ली थी। जब मौजूद अधिकारियों ने उनसे जवाब-तलब और तलाशी की बात कही तो वह मौके से चले गए।
बताया गया है कि घटना की सूचना तत्कालीन एसडीएम रुड़की को दी गई थी, जिसके बाद वक्फ बोर्ड कार्यालय द्वारा संबंधित सुपरवाइजर से स्पष्टीकरण मांगा गया। बाद में उनका जवाब प्राप्त हुआ, लेकिन शिकायतकर्ताओं का दावा है कि अधिकारियों ने उसे संतोषजनक नहीं माना और कार्रवाई की संस्तुति भी की थी। यह जानकारी सूचना का अधिकार अधिनियम के तहत प्राप्त दस्तावेजों में सामने आने का दावा किया गया है।
मामले में सबसे बड़ा सवाल यह उठाया जा रहा है कि यदि जांच के बाद कार्रवाई की सिफारिश की गई थी तो फिर आज तक किसी प्रकार की आपराधिक कार्रवाई क्यों नहीं हुई? आखिर वह कौन सी वजह रही कि मामला जांच और पत्राचार तक ही सीमित रह गया? इसी प्रश्न को लेकर अब अधिवक्ताओं ने पुलिस से हस्तक्षेप की मांग की है।
शिकायतकर्ताओं का कहना है कि कलियर शरीफ दरगाह केवल एक धार्मिक स्थल नहीं बल्कि देश की गंगा-जमुनी तहजीब और साझा आस्था का प्रतीक है। यहां हिंदू और मुस्लिम दोनों समुदायों के लोग बड़ी श्रद्धा के साथ पहुंचते हैं। पाकिस्तान, इराक और अन्य देशों से भी जायरीन दरगाह में हाजिरी लगाने आते हैं। ऐसे में यदि गोलक गिनती जैसी संवेदनशील प्रक्रिया पर सवाल उठते हैं तो यह केवल प्रशासनिक मामला नहीं बल्कि लाखों श्रद्धालुओं के विश्वास से जुड़ा विषय बन जाता है।
प्रार्थना पत्र में यह भी उल्लेख किया गया है कि इससे पहले भी गोलक गिनती से जुड़ा एक वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हुआ था। उस समय भी जांच और कार्रवाई की चर्चाएं हुई थीं, लेकिन शिकायतकर्ताओं के अनुसार कोई ठोस परिणाम सामने नहीं आया। यही कारण है कि अब पूरे मामले की स्वतंत्र और निष्पक्ष जांच की मांग जोर पकड़ रही है।
इस बीच मामले को लेकर एक और चर्चा यह है कि बाद में संबंधित सुपरवाइजर को पुनः बहाल कर दिया गया था। इसके बाद से स्थानीय स्तर पर कई तरह की अटकलें और चर्चाएं सामने आती रही हैं। हालांकि इन चर्चाओं की आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है, लेकिन पारदर्शिता को लेकर उठ रहे सवाल लगातार बने हुए हैं।
भदोरिया एडवोकेट एसोसिएट ने एसएसपी हरिद्वार से मांग की है कि पूरे मामले की SIT से जांच कराई जाए, गोलक गिनती से जुड़े सभी दस्तावेज, वीडियो रिकॉर्डिंग और प्रशासनिक पत्राचार की पड़ताल की जाए तथा यदि किसी प्रकार की अनियमितता सामने आती है तो संबंधित व्यक्तियों के खिलाफ तत्काल मुकदमा दर्ज किया जाए।
अब निगाहें हरिद्वार पुलिस और प्रशासन पर टिकी हैं। करोड़ों रुपये के चढ़ावे और लाखों श्रद्धालुओं की आस्था से जुड़े इस मामले में आगे क्या कार्रवाई होती है, यह आने वाले दिनों में साफ होगा। फिलहाल एक बार फिर कलियर शरीफ की गोलक व्यवस्था, पारदर्शिता और जवाबदेही को लेकर बहस तेज हो गई है।



