पिरान कलियर से मौलाना अरशद मदनी का बड़ा संदेश! बोले- मोहब्बत, इंसाफ और भाईचारे से ही मजबूत होगा हिंदुस्तान,, जमीयत उलेमा-ए-हिन्द के प्रदेश अधिवेशन में गूंजी एकता की आवाज, देश की साझी विरासत और संविधान की ताकत पर दिया जोर,, 70 मेधावी छात्रों का सम्मान, युवाओं से शिक्षा और समाज सेवा के जरिए देश निर्माण में भागीदारी की अपील

पिरान कलियर से मौलाना अरशद मदनी का बड़ा संदेश! बोले- मोहब्बत, इंसाफ और भाईचारे से ही मजबूत होगा हिंदुस्तान,,
जमीयत उलेमा-ए-हिन्द के प्रदेश अधिवेशन में गूंजी एकता की आवाज, देश की साझी विरासत और संविधान की ताकत पर दिया जोर,,
70 मेधावी छात्रों का सम्मान, युवाओं से शिक्षा और समाज सेवा के जरिए देश निर्माण में भागीदारी की अपील
पिरान कलियर। सूफी संत हजरत साबिर पाक की नगरी पिरान कलियर रविवार को उस समय राष्ट्रीय चर्चा का केंद्र बन गई, जब जमीयत उलेमा-ए-हिन्द के राष्ट्रीय अध्यक्ष मौलाना सय्यद अरशद मदनी ने प्रदेश कार्यकारिणी अधिवेशन में देश की एकता, भाईचारे और इंसानियत का मजबूत संदेश दिया। हजारों लोगों की मौजूदगी में आयोजित कार्यक्रम में मौलाना मदनी ने कहा कि भारत की असली पहचान उसकी विविधता, गंगा-जमुनी तहजीब और आपसी प्रेम में बसती है। उन्होंने कहा कि मुल्क को आगे बढ़ाने का रास्ता नफरत नहीं, बल्कि मोहब्बत, इंसाफ और आपसी सम्मान से होकर गुजरता है।
जमीयत उलेमा-ए-हिन्द के प्रदेश अधिवेशन में प्रदेशभर से आए उलेमा, सामाजिक कार्यकर्ता, पदाधिकारी और कार्यकर्ताओं ने हिस्सा लिया। कार्यक्रम के दौरान सामाजिक, शैक्षिक और राष्ट्रीय मुद्दों पर विस्तार से चर्चा की गई। अपने संबोधन में मौलाना मदनी ने कहा कि जमीयत उलेमा-ए-हिन्द हमेशा से देश की एकता, अखंडता और सामाजिक सौहार्द की पक्षधर रही है। संगठन ने हर दौर में इंसानियत और देशहित को सर्वोच्च प्राथमिकता दी है।
मौलाना मदनी ने कहा कि किसी भी समाज की मजबूती उसके लोगों के आपसी विश्वास और भाईचारे पर निर्भर करती है। जब समाज में प्रेम और सम्मान का वातावरण होता है, तभी विकास और खुशहाली का रास्ता खुलता है। उन्होंने लोगों से अपील की कि वे धर्म, जाति और भाषा के नाम पर पैदा होने वाले मतभेदों से ऊपर उठकर देशहित में सोचें।उन्होंने कहा कि भारत दुनिया का सबसे बड़ा लोकतंत्र है और इसकी सबसे बड़ी ताकत संविधान है। संविधान सभी नागरिकों को बराबरी का अधिकार देता है और यही व्यवस्था देश को मजबूत बनाती है। उन्होंने कहा कि देश के हर नागरिक की जिम्मेदारी है कि वह सामाजिक सद्भाव बनाए रखने में अपनी भूमिका निभाए।
अपने संबोधन के दौरान मौलाना मदनी ने देश की आजादी और विकास में विभिन्न समुदायों के योगदान का भी उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि भारत की आजादी और निर्माण की कहानी सभी वर्गों की साझी कुर्बानियों और संघर्षों से जुड़ी हुई है। इसलिए देश की एकता और अखंडता को बनाए रखना हम सभी की सामूहिक जिम्मेदारी है।
उन्होंने नबी-ए-पाक की शिक्षाओं का जिक्र करते हुए कहा कि इंसानियत, सेवा और अच्छे व्यवहार से बढ़कर कोई संदेश नहीं है। पड़ोसी चाहे किसी भी धर्म या समुदाय का हो, उसके साथ सम्मान और प्रेम का व्यवहार करना हर इंसान का कर्तव्य है। जरूरतमंदों की मदद और समाज के कमजोर वर्गों के साथ खड़ा होना ही असली इंसानियत है।
अधिवेशन में शिक्षा के क्षेत्र में उत्कृष्ट प्रदर्शन करने वाले 70 जहीन तलबा (मेधावी छात्रों) को सम्मानित किया गया। इस अवसर पर छात्रों को सम्मान पत्र और पुरस्कार प्रदान किए गए। मौलाना मदनी ने कहा कि शिक्षा किसी भी समाज की सबसे बड़ी ताकत होती है और युवा पीढ़ी को आधुनिक शिक्षा के साथ नैतिक मूल्यों को भी अपनाना चाहिए। उन्होंने युवाओं से देश और समाज के विकास में सक्रिय भूमिका निभाने का आह्वान किया।
कार्यक्रम में मौजूद वक्ताओं ने भी सामाजिक सौहार्द, शिक्षा और राष्ट्रीय एकता के महत्व पर अपने विचार रखे। उन्होंने कहा कि वर्तमान समय में समाज को जोड़ने वाले संदेशों की सबसे अधिक आवश्यकता है। पिरान कलियर की धरती से दिया गया यह संदेश प्रेम, शांति और भाईचारे को मजबूत करने की दिशा में महत्वपूर्ण प्रयास है।
कार्यक्रम के समापन पर देश में अमन-चैन, तरक्की और आपसी भाईचारे के लिए विशेष दुआ की गई। अधिवेशन में मौजूद लोगों ने भी सामाजिक एकता और इंसानियत के मूल्यों को आगे बढ़ाने का संकल्प लिया।
पिरान कलियर से उठी यह आवाज एक बार फिर यह संदेश दे गई कि मजबूत राष्ट्र की नींव प्रेम, सम्मान, शिक्षा और सामाजिक सौहार्द पर ही टिकती है। यही वह रास्ता है जो देश को विकास, शांति और समृद्धि की ओर ले जा सकता है।



