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हरिद्वार से गूंजा सामाजिक सौहार्द का संदेश, मुफ्ती समून काज़मी बोले— “हम सबके पूर्वज एक हैं, श्रीराम हमारे पूर्वज हैं,, पूर्व मदरसा बोर्ड अध्यक्ष ने मानवता और ‘वसुधैव कुटुम्बकम’ की भावना को बताया भारतीय संस्कृति की सबसे बड़ी पहचान,, बाबा रामदेव और आचार्य बालकृष्ण की मौजूदगी में भाईचारे, एकता और राष्ट्रहित का दिया प्रेरक संदेश

हरिद्वार से गूंजा सामाजिक सौहार्द का संदेश, मुफ्ती समून काज़मी बोले— “हम सबके पूर्वज एक हैं, श्रीराम हमारे पूर्वज हैं,,

पूर्व मदरसा बोर्ड अध्यक्ष ने मानवता और ‘वसुधैव कुटुम्बकम’ की भावना को बताया भारतीय संस्कृति की सबसे बड़ी पहचान,,

बाबा रामदेव और आचार्य बालकृष्ण की मौजूदगी में भाईचारे, एकता और राष्ट्रहित का दिया प्रेरक संदेश

हरिद्वार। सामाजिक समरसता और राष्ट्रीय एकता का संदेश देने वाला एक कार्यक्रम इन दिनों चर्चा का विषय बना हुआ है। योगगुरु बाबा रामदेव और आचार्य बालकृष्ण की मौजूदगी में उत्तराखंड मदरसा बोर्ड के पूर्व अध्यक्ष एवं पूर्व राज्यमंत्री मुफ्ती समून काज़मी ने ऐसा संदेश दिया, जिसे कई लोग भाईचारे और आपसी सम्मान की भावना को मजबूत करने वाला बता रहे हैं।

अपने संबोधन में मुफ्ती समून काज़मी ने कहा कि “हम सबके पूर्वज एक हैं। मर्यादा पुरुषोत्तम श्रीराम हमारे पूर्वज हैं। हम सभी ईश्वर की संतान हैं और ‘वसुधैव कुटुम्बकम’ भारतीय संस्कृति का मूल मंत्र है, जो पूरी दुनिया को एक परिवार मानने की प्रेरणा देता है।” उन्होंने कहा कि मानवता से बड़ा कोई धर्म नहीं है और समाज में प्रेम, सद्भाव और आपसी सम्मान ही सबसे बड़ी ताकत है।

मुफ्ती समून काज़मी ने पतंजलि परिवार द्वारा योग और आयुर्वेद के माध्यम से देश-विदेश में स्वास्थ्य जागरूकता फैलाने के प्रयासों की भी सराहना की। उन्होंने कहा कि बाबा रामदेव और आचार्य बालकृष्ण का कार्य करोड़ों लोगों के लिए प्रेरणा का स्रोत है।

कार्यक्रम के दौरान एक रोचक और आत्मीय पल भी देखने को मिला। जब मुफ्ती समून काज़मी मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी की ओर से सम्मान का उल्लेख कर रहे थे, तभी आचार्य बालकृष्ण ने मुस्कुराते हुए कहा, “अपने पद से बोलिए।” इस पर मुफ्ती समून काज़मी ने हंसते हुए जवाब दिया, “मैं राज्यमंत्री हूँ।” उनके इस जवाब पर मंच पर मौजूद सभी लोग ठहाका लगाकर हंस पड़े और बाबा रामदेव ने भी स्नेहपूर्वक उनके कंधे पर हाथ रखकर आत्मीयता का परिचय दिया।

कार्यक्रम का यह वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से साझा किया जा रहा है। कई लोग इसे भारत की साझा सांस्कृतिक विरासत, गंगा-जमुनी तहजीब और सामाजिक सौहार्द का सकारात्मक उदाहरण बता रहे हैं। मंच से दिया गया संदेश यह दर्शाता है कि संवाद, सम्मान और मानवता की भावना समाज को जोड़ने का सबसे प्रभावी माध्यम है।

कार्यक्रम ने यह संदेश भी दिया कि विभिन्न आस्थाओं और विचारों के लोग जब एक मंच पर प्रेम, भाईचारे और राष्ट्रहित की बात करते हैं, तो वह समाज के लिए प्रेरणा का विषय बन जाता है। यही भारत की सांस्कृतिक शक्ति और “वसुधैव कुटुम्बकम” की जीवंत भावना है।

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