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लाव-लश्कर के साथ उत्तराखंड लौटे हरीश रावत, वापसी ने गरमाई सियासत,, इस्तीफे की अटकलों के बीच नारसन से हरिद्वार तक दिखा समर्थकों का हुजूम, बोले—“लोगों के आशीर्वाद से आज वापस आया हूं”

लाव-लश्कर के साथ उत्तराखंड लौटे हरीश रावत, वापसी ने गरमाई सियासत,,

इस्तीफे की अटकलों के बीच नारसन से हरिद्वार तक दिखा समर्थकों का हुजूम, बोले—“लोगों के आशीर्वाद से आज वापस आया हूं”

हरिद्वार। उत्तराखंड की सियासत में रविवार को एक बार फिर हलचल तेज हो गई। करीब तीन महीने बाद पूर्व मुख्यमंत्री और वरिष्ठ कांग्रेस नेता हरीश रावत उत्तराखंड लौटे तो उनके स्वागत में कांग्रेस कार्यकर्ताओं और समर्थकों का बड़ा हुजूम उमड़ पड़ा। रामपुर तिराहा से शुरू हुई उनकी वापसी यात्रा नारसन, रुड़की होते हुए हरिद्वार तक पहुंची। इस दौरान जगह-जगह कार्यकर्ताओं ने उनका स्वागत किया और उनके काफिले के साथ बड़ी संख्या में कांग्रेस नेता नजर आए। रावत की वापसी ऐसे समय हुई है, जब पिछले दिनों उनके कांग्रेस के संगठनात्मक पदों से इस्तीफे की पेशकश को लेकर प्रदेश की राजनीति में चर्चाओं का दौर तेज था।

“परिस्थितियों में फंस गया था, जनता के आशीर्वाद ने वापस बुलाया”

उत्तराखंड पहुंचने के बाद हरीश रावत ने कहा कि वह कुछ परिस्थितियों में फंस गए थे और बीमारी से भी जूझ रहे थे। उन्होंने कहा कि लोगों की दुआओं, आशीर्वाद और उत्तराखंड की धरती के आशीर्वाद से आज वह वापस लौटे हैं।

रावत ने अपनी इस यात्रा को “धन्यवाद यात्रा” का नाम दिया। उनका कहना था कि रामपुर तिराहा से हरिद्वार तक की यात्रा के जरिए वह उत्तराखंड की जनता का आभार व्यक्त कर रहे हैं।रविवार को उनके कार्यक्रम में रामपुर तिराहा स्थित राज्य आंदोलन के शहीद स्मारक पर श्रद्धांजलि, हरिद्वार में मां गंगा की पूजा और देहरादून में शहीद स्मारक पर श्रद्धासुमन अर्पित करने के कार्यक्रम शामिल रहे।

नारसन से रुड़की तक शक्ति प्रदर्शन जैसा नजारा

हरीश रावत के उत्तराखंड लौटने की खबर के बाद नारसन से लेकर रुड़की तक कांग्रेस कार्यकर्ताओं में खासा उत्साह दिखाई दिया। उनके काफिले के साथ बड़ी संख्या में पार्टी नेता और समर्थक मौजूद रहे।

सड़क पर उमड़ी भीड़ और स्वागत के बीच रावत लगातार कार्यकर्ताओं का अभिवादन करते दिखाई दिए। उनके समर्थकों के लिए यह सिर्फ एक नेता की वापसी नहीं, बल्कि लंबे अंतराल के बाद अपने पुराने राजनीतिक चेहरे की सार्वजनिक मौजूदगी का मौका भी था।देहरादून पहुंचने पर भी रायपुर विधानसभा क्षेत्र के कांग्रेस कार्यकर्ताओं ने रावत का जोरदार स्वागत किया।

इस्तीफे की चर्चाओं के बीच लौटे रावत

हरीश रावत की वापसी को इसलिए भी महत्वपूर्ण माना जा रहा है क्योंकि 12 सितंबर को उन्होंने कांग्रेस में अपने संगठनात्मक पदों से इस्तीफे की पेशकश की थी। यह घटनाक्रम उनके एक पूर्व सहयोगी के यहां प्रवर्तन निदेशालय की कार्रवाई और बरामदगी से जुड़े विवाद के बीच सामने आया था। रावत ने कहा था कि वह नहीं चाहते कि उनकी वजह से कांग्रेस के भ्रष्टाचार के खिलाफ संघर्ष पर सवाल उठे।इस्तीफे की चर्चाओं के बाद अब रावत का सार्वजनिक तौर पर प्रदेश में लौटना कांग्रेस की राजनीति में नए सवाल खड़े कर रहा है। हालांकि उनकी रविवार की यात्रा को उन्होंने मुख्य रूप से जनता के प्रति आभार और धन्यवाद यात्रा के तौर पर पेश किया।

“शेर फिर वापस आ चुका है”—कांग्रेस नेता का दावा

रावत के स्वागत में पहुंचे वरिष्ठ कांग्रेस नेता सचिन गुप्ता ने उनकी वापसी को लेकर जोशीला बयान दिया। उन्होंने कहा कि हरीश रावत के इस्तीफे को लेकर अफवाहें फैलाने वालों को अब जवाब मिल गया है। उनके मुताबिक रावत की वापसी के बाद आलोचना करने वालों के मुंह पर ताला लग जाएगा।

गुप्ता ने यहां तक कहा कि “शेर एक बार फिर वापस आ चुका है।”

यह बयान कांग्रेस नेता की राजनीतिक प्रतिक्रिया है और इसे हरीश रावत की ओर से किसी नए पद या राजनीतिक भूमिका की औपचारिक घोषणा नहीं माना जा सकता।

दिल्ली यूनिवर्सिटी चुनाव पर भी बोले रावत

वापसी के दौरान हरीश रावत ने दिल्ली यूनिवर्सिटी छात्रसंघ चुनाव को लेकर भी प्रतिक्रिया दी। उन्होंने NSUI के छात्र कार्यकर्ताओं को बधाई देते हुए कहा कि छात्रों ने मजबूती से चुनाव लड़ा है।

उनका यह बयान कांग्रेस की छात्र राजनीति और युवा वर्ग से जुड़े मुद्दों के संदर्भ में आया।

इंदौर की ‘छात्रों की गूंज’ पर मिमिक्री विवाद में रावत की एंट्री

इंदौर में राहुल गांधी के ‘छात्रों की गूंज’ कार्यक्रम के दौरान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और अन्य राजनीतिक व्यक्तित्वों की मिमिक्री को लेकर भाजपा और कांग्रेस के बीच विवाद खड़ा हो गया है। कार्यक्रम 19 सितंबर को हुआ था और इसके बाद भाजपा नेताओं ने मंच पर हुई प्रस्तुति को लेकर सवाल उठाए। कांग्रेस की ओर से इसे राजनीतिक व्यंग्य और कार्यक्रम के संदर्भ में देखा गया।

इस विवाद पर हरीश रावत ने कहा कि राजनीति और संसदीय लोकतंत्र में इस तरह की प्रक्रिया स्वाभाविक है। उन्होंने कहा कि इसका जवाब भी उसी तरीके से दिया जाना चाहिए। रावत के मुताबिक राजनीतिक दलों के बीच इस तरह के जवाबी राजनीतिक रंग देखने को मिलते रहने चाहिए।

2027 से पहले रावत की वापसी से बढ़ी हलचल

उत्तराखंड में विधानसभा चुनाव 2027 की राजनीतिक तैयारियां धीरे-धीरे तेज हो रही हैं। ऐसे समय में हरीश रावत की करीब तीन महीने बाद प्रदेश में वापसी ने कांग्रेस की अंदरूनी राजनीति और प्रदेश की सियासत को फिर चर्चा के केंद्र में ला दिया है।

एक तरफ इस्तीफे की चर्चाएं, दूसरी तरफ समर्थकों का बड़ा जमावड़ा और अब रावत की सार्वजनिक सक्रियता—इन तीनों घटनाक्रमों ने राजनीतिक गलियारों में चर्चाओं को हवा दे दी है।

हालांकि रावत ने अपनी वापसी को फिलहाल जनता का धन्यवाद और आभार व्यक्त करने की यात्रा बताया है, लेकिन जिस तरह नारसन से हरिद्वार और फिर देहरादून तक उनके स्वागत में कार्यकर्ताओं की मौजूदगी दिखाई दी, उसने उनकी राजनीतिक सक्रियता को लेकर चर्चाएं जरूर तेज कर दी हैं।

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