कांवड़ियों के लिए ‘संजीवनी’ बना कोर अस्पताल का नि:शुल्क चिकित्सा शिविर, 10 हजार से ज्यादा शिवभक्तों को मिला उपचार,, रोजाना 1200 से 1400 मरीज पहुंच रहे कैंप में, हार्ट अटैक और किडनी स्टोन जैसे गंभीर मामलों को भी डॉक्टरों ने संभाला; 10 हजार मरीजों को मिला उपचार, तीन दिन और जारी रहेगी चिकित्सा सेवा राजस्थान से आए कांवड़ियों ने की डॉक्टरों की जमकर सराहना, बोले—“भोले के भक्तों के लिए ऐसा शिविर किसी वरदान से कम नहीं, इलाज मिला तो फिर यात्रा पर निकल पड़े”

कांवड़ियों के लिए ‘संजीवनी’ बना कोर अस्पताल का नि:शुल्क चिकित्सा शिविर, 10 हजार से ज्यादा शिवभक्तों को मिला उपचार,,
रोजाना 1200 से 1400 मरीज पहुंच रहे कैंप में, हार्ट अटैक और किडनी स्टोन जैसे गंभीर मामलों को भी डॉक्टरों ने संभाला; 10 हजार मरीजों को मिला उपचार, तीन दिन और जारी रहेगी चिकित्सा सेवा
राजस्थान से आए कांवड़ियों ने की डॉक्टरों की जमकर सराहना, बोले—“भोले के भक्तों के लिए ऐसा शिविर किसी वरदान से कम नहीं, इलाज मिला तो फिर यात्रा पर निकल पड़े”
रुड़की/हरिद्वार। कांवड़ मेला 2026 में हरिद्वार आने वाले शिवभक्तों की सेवा के लिए कोर विश्वविद्यालय की ओर से संचालित कोर अस्पताल रुड़की का नि:शुल्क चिकित्सा शिविर इन दिनों कांवड़ियों के लिए किसी संजीवनी से कम साबित नहीं हो रहा है। 30 जुलाई से शुरू हुए इस चिकित्सा शिविर में अब तक करीब 10 हजार मरीजों को उपचार और चिकित्सकीय परामर्श दिया जा चुका है। शिविर में प्रतिदिन लगभग 1200 से 1400 मरीज स्वास्थ्य जांच और उपचार के लिए पहुंच रहे हैं।
कांवड़ यात्रा के अंतिम चरण में भी शिवभक्तों की भारी भीड़ हरिद्वार की ओर से अपने गंतव्य की तरफ लौट रही है। लंबी पैदल यात्रा के कारण कांवड़ियों को पैरों में दर्द, झनझनाहट, कमजोरी, थकान, चोट, डिहाइड्रेशन सहित कई तरह की स्वास्थ्य समस्याओं का सामना करना पड़ रहा है। ऐसे में हाईवे पर स्थित कोर अस्पताल में उपलब्ध नि:शुल्क चिकित्सा सुविधा उनके लिए बड़ी राहत बनी हुई है।
30 जुलाई से शुरू हुआ शिविर, तीन दिन और जारी रहेगी सेवा
कोर अस्पताल की ओर से दी गई जानकारी के अनुसार पवित्र सावन मास और कांवड़ मेला 2026 को देखते हुए यह विशेष चिकित्सा शिविर 30 जुलाई से शुरू किया गया था। 9 अगस्त तक हजारों कांवड़ियों को यहां उपचार मिल चुका है और आने वाले तीन दिनों तक शिविर जारी रहेगा।शिविर के संचालन में कोर विश्वविद्यालय के साथ-साथ कोर अस्पताल के चिकित्सकों, नर्सिंग स्टाफ, आरएमओ, पैथोलॉजिस्ट, फार्मासिस्ट और प्रशिक्षु विद्यार्थियों की महत्वपूर्ण भूमिका है। अंतिम वर्ष और इंटर्नशिप कर रहे विद्यार्थी भी दिन-रात मरीजों की सेवा में जुटे हुए हैं।
शिविर से जुड़े चिकित्सकीय प्रतिनिधि ने बताया कि इस सेवा को विश्वविद्यालय के चेयरमैन के आशीर्वाद और प्रेरणा स्रोत श्री श्रेयांश जैन के मार्गदर्शन से संचालित किया जा रहा है। उन्होंने कहा कि पूरे विश्वविद्यालय और अस्पताल परिवार का इस सेवा में महत्वपूर्ण सहयोग मिल रहा है।
रोजाना 1200 से 1400 मरीज, अब तक करीब 10 हजार का उपचार
चिकित्सा शिविर में मरीजों की संख्या का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि प्रतिदिन करीब 1200, 1300 और कई बार 1400 तक मरीज उपचार के लिए पहुंच रहे हैं। 30 जुलाई से 9 अगस्त तक यह आंकड़ा करीब 10 हजार मरीजों तक पहुंच चुका है।
खास बात यह है कि शिविर में केवल सामान्य स्वास्थ्य समस्याओं वाले मरीज ही नहीं पहुंचे, बल्कि कुछ गंभीर मामलों को भी चिकित्सकों ने समय रहते संभाला। चिकित्सकों के अनुसार यहां मायोकार्डियल इन्फार्क्शन (MI) यानी हार्ट अटैक के तीन मरीज सामने आए। इनमें से दो मरीजों को तत्काल आवश्यक चिकित्सा देकर अस्पताल स्तर पर स्थिर किया गया, जबकि एक मरीज को आगे के उपचार के लिए एसडीएच रुड़की रेफर किया गया। रेफर किए गए मरीज की स्थिति भी स्थिर बताई गई। इसके अलावा किडनी स्टोन यानी गुर्दे की पथरी से परेशान कांवड़ियों का भी उपचार किया गया। इससे साफ है कि कांवड़ यात्रा के दौरान यह शिविर केवल प्राथमिक उपचार तक सीमित नहीं रहा, बल्कि जरूरत के अनुसार मरीजों को चिकित्सकीय जांच, उपचार और रेफरल की सुविधा भी दी जा रही है।
राजस्थान के कांवड़ियों ने कहा—“इलाज मिला, दर्द गया और फिर यात्रा पर निकल पड़े”
भरतपुर, राजस्थान से कांवड़ लेकर लौट रहे ब्रजमोहन शर्मा ने बताया कि यात्रा के दौरान उनके पैर में थोड़ी परेशानी हुई। इसी दौरान उन्हें कोर अस्पताल का चिकित्सा शिविर दिखाई दिया। उन्होंने डॉक्टरों को दिखाया और यहां उन्हें बेहतर उपचार मिला। ब्रजमोहन शर्मा ने कहा कि डॉक्टरों और पूरे स्टाफ ने अच्छी सुविधा दी। उन्होंने शिवभक्तों के लिए इस तरह का शिविर लगाए जाने की सराहना करते हुए कहा कि भोले के भक्तों के लिए इस तरह की चिकित्सा सेवा बेहद अच्छी पहल है।
वहीं रविंद्र कुमार ने बताया कि उनके पैरों में झनझनाहट की समस्या हो रही थी। शिविर में उपचार मिलने के बाद उन्हें काफी राहत मिली और धीरे-धीरे समस्या समाप्त हो गई। उन्होंने कहा कि वे हरिद्वार से कांवड़ लेकर राजस्थान की ओर जा रहे थे और रास्ते में चिकित्सा सुविधा मिलने से उन्हें काफी मदद मिली।
रविंद्र कुमार ने कहा कि डॉक्टर और स्टाफ बहुत अच्छे हैं तथा यहां इलाज की व्यवस्था भी अच्छी है। उन्होंने इच्छा जताई कि हर बार कांवड़ यात्रा के दौरान इसी तरह की चिकित्सा सुविधा उपलब्ध हो, ताकि भोले बाबा के भक्तों को रास्ते में स्वास्थ्य संबंधी परेशानी होने पर तत्काल उपचार मिल सके।
किडनी स्टोन से परेशान कांवड़िए को मिला इलाज, दो घंटे बाद फिर यात्रा के लिए तैयार
शिविर में पहुंचे एक अन्य कांवड़िए के साथी को किडनी स्टोन की समस्या थी। दर्द के कारण उन्हें रास्ते में रुकना पड़ा। करीब दो घंटे तक अस्पताल में उपचार और चिकित्सकीय देखभाल मिलने के बाद उनकी हालत में सुधार हुआ और वे दोबारा यात्रा पर निकलने के लिए तैयार हो गए।
कांवड़ियों ने कोर अस्पताल की व्यवस्था की भी जमकर तारीफ की। उन्होंने कहा कि बाहर से देखने पर यह कैंप नजर आता है, लेकिन अंदर आने पर “पूरा अस्पताल” जैसी व्यवस्था दिखाई देती है। डॉक्टर, नर्सिंग स्टाफ और अन्य स्वास्थ्यकर्मी मरीजों की सेवा में लगातार जुटे हुए हैं।
कांवड़ियों की सेवा में जुटा पूरा अस्पताल परिवार
कांवड़ मेला जैसे बड़े धार्मिक आयोजन में स्वास्थ्य सेवाओं की भूमिका बेहद महत्वपूर्ण होती है। लाखों शिवभक्त लंबी दूरी तय करके हरिद्वार पहुंचते हैं और वापस अपने राज्यों की ओर रवाना होते हैं। ऐसे में रास्ते में यदि किसी कांवड़िए की तबीयत बिगड़ जाए तो समय पर चिकित्सा सुविधा मिलना बेहद जरूरी है।
कोर अस्पताल का यह नि:शुल्क शिविर इसी जिम्मेदारी को निभाता नजर आ रहा है। चिकित्सकों से लेकर नर्सिंग स्टाफ और प्रशिक्षु विद्यार्थियों तक की टीम लगातार कांवड़ियों की सेवा में लगी हुई है। करीब 10 हजार मरीजों को उपचार मिलना इस शिविर की पहुंच और उपयोगिता को दर्शाता है।
आने वाले तीन दिनों तक भी शिविर जारी रहने के कारण हरिद्वार से लौटने वाले हजारों कांवड़ियों को इसका लाभ मिलने की उम्मीद है। शिवभक्तों की सेवा में लगा यह चिकित्सा शिविर कांवड़ यात्रा की मानवीय तस्वीर को भी सामने ला रहा है—जहां दर्द में राहत, बीमारी में उपचार और यात्रा के बीच स्वास्थ्य सुरक्षा के साथ शिवभक्त अपने घरों की ओर लौट रहे हैं।
कैम्प में सेवा दे रहे डॉक्टर्स टीम में
डॉ. बी.एस. राजपूत, डॉ. अंजलि के. सिंह, डॉ. अनामिका, डॉ. अरविन, डॉ. कीर्ति, डॉ. तेजवंत।
नर्सिंग स्टाफ
यू.एस. पाल, उस्मान, अंकु, शाहरुख, सुनील, आकाश, दानिश, अजय, ममता रानी, शायली, सारिका, दीपिका, शालू, मानसी, जन्नत।
इंटर्न स्टूडेंट
अंकुर कुमार, सारितोष, रोहित देवारे, अक्षिता मेहता, रूपाक्षी बिष्ट, श्रुति गोयल, विक्रम, पार्नव, रजनीश। शामिल है



