कलियर उर्स में VIP कल्चर पर ‘फुल एक्शन’! वाहन पास का खेल खत्म, आम जायरीनों की राह हुई आसान,, उर्स की कहानी में इस बार ‘VIP’ नहीं CO सुमित पांडेय और मेला कोतवाल कमल मोहन भंडारी की रणनीति ने बदली पूरी तस्वीर—बड़े वाहनों पर ब्रेक, अतिक्रमण हटाकर रास्ते खोले, ‘पहले जायरीन-बाद में वाहन’ बना उर्स की नई पहचान,, SSP नवनीत सिंह भुल्लर का जनहित फैसला, मैदान में पांडेय और भंडारी का एक्शन
CO सुमित पांडेय की निगरानी, मेला प्रभारी कमल मोहन भंडारी के नेतृत्व में पुलिस टीम का दिन-रात मोर्चा

कलियर उर्स में VIP कल्चर पर ‘फुल एक्शन’! वाहन पास का खेल खत्म, आम जायरीनों की राह हुई आसान,,
उर्स की कहानी में इस बार ‘VIP’ नहीं
CO सुमित पांडेय और मेला कोतवाल कमल मोहन भंडारी की रणनीति ने बदली पूरी तस्वीर—बड़े वाहनों पर ब्रेक, अतिक्रमण हटाकर रास्ते खोले, ‘पहले जायरीन-बाद में वाहन’ बना उर्स की नई पहचान,,
SSP नवनीत सिंह भुल्लर का जनहित फैसला, मैदान में पांडेय और भंडारी का एक्शन

पिरान कलियर।
758वें सालाना उर्स में इस बार कलियर की सड़कों पर पुलिस की रणनीति ने पुरानी व्यवस्था की तस्वीर बदल दी। जिस उर्स में VIP वाहनों और पास को लेकर अक्सर आम जायरीनों की आवाजाही प्रभावित होती थी, वहां इस बार पुलिस ने VIP वाहन पास के जरिए मेला क्षेत्र में अनावश्यक वाहनों की एंट्री पर रोक लगाकर साफ संदेश दिया—उर्स में प्राथमिकता VIP वाहनों को नहीं, जायरीनों को मिलेगी।
यह बदलाव महज कागजी आदेश नहीं रहा, बल्कि मेला क्षेत्र में इसका असर जमीन पर दिखाई दिया। पिछले आयोजनों में चार पहिया और बड़े वाहनों की आवाजाही के कारण संकरे रास्तों पर जाम की स्थिति बनती थी। कई बार जायरीन घंटों भीड़ और वाहनों के बीच फंस जाते थे। इस बार पुलिस ने ‘पहले जायरीन, बाद में वाहन’ की नीति अपनाई और बड़े वाहनों की एंट्री को नियंत्रित रखा। इससे पैदल चलने वाले जायरीनों को राहत मिली।
SSP नवनीत सिंह भुल्लर का जनहित फैसला, मैदान में पांडेय और भंडारी का एक्शन
उर्स की व्यवस्था में हरिद्वार SSP नवनीत सिंह भुल्लर द्वारा सीओ सुमित पांडेय और कलियर कोतवाल कमल मोहन भंडारी को मेला कोतवाल की जिम्मेदारी देना अहम फैसला साबित हुआ। भंडारी ने उर्स से पहले ही टेंपो, मेटाडोर, होटल, मिष्ठान और मार्केट यूनियन के साथ बैठकें कीं। साथ ही सज्जादानशीन और दरगाह प्रबंधन के साथ समन्वय कर यातायात व्यवस्था की रणनीति तैयार की।
इसके बाद मेला क्षेत्र में अतिक्रमण के खिलाफ कार्रवाई कर रास्तों को अधिक सुगम बनाया गया। यानी पुलिस ने केवल वाहनों पर रोक नहीं लगाई, बल्कि जाम पैदा करने वाले दूसरे कारणों पर भी प्रहार किया।
VIP पास खत्म होते ही बदला ट्रैफिक का गेम
सबसे बड़ा बदलाव VIP वाहन पास को लेकर रहा। पास के जरिए वाहनों को मेला क्षेत्र के भीतर पहुंचने की पुरानी व्यवस्था को इस बार प्रभावी रूप से रोका गया। इसका सीधा फायदा उन रास्तों को मिला, जहां भीड़ के समय वाहन खड़े होने से यातायात व्यवस्था बिगड़ती थी।
जायरीनों के मुताबिक, वाहन कम होने से परिवार के साथ चलना आसान रहा। बुजुर्गों और महिलाओं को भीड़ के बीच वाहनों से बचते हुए आगे बढ़ने में अपेक्षाकृत कम परेशानी हुई।
CO सुमित पांडेय की निगरानी, मेला प्रभारी कमल मोहन भंडारी के नेतृत्व में पुलिस टीम का दिन-रात मोर्चा
भगवानपुर CO सुमित पांडेय के नेतृत्व और निगरानी में पुलिस टीम ने यातायात व्यवस्था को नियंत्रित रखने पर विशेष जोर दिया। मेला कोतवाल कमल मोहन भंडारी ने मौके की परिस्थितियों के अनुसार फैसले लेते हुए व्यवस्था संभाली। वहीं SP देहात शेखर चंद सुयाल भी लगातार मेला क्षेत्र का निरीक्षण करते रहे।
वरिष्ठ उपनिरीक्षक राजेश बिष्ट समेत पुलिसकर्मियों ने अलग-अलग स्थानों पर दिन-रात ड्यूटी संभाली। भीड़ बढ़ने के बावजूद अनावश्यक वाहनों की आवाजाही पर नियंत्रण बनाए रखने का प्रयास किया गया।
उर्स की कहानी में इस बार ‘VIP’ नहीं, जायरीन ही हीरो
कलियर उर्स की इस बार की यातायात व्यवस्था का सबसे बड़ा संदेश यही रहा कि धार्मिक आयोजन में व्यवस्था का केंद्र आम जायरीन होना चाहिए। VIP वाहन पास पर रोक, बड़े वाहनों का नियंत्रण और अतिक्रमण हटाने की कार्रवाई ने मिलकर मेला क्षेत्र में यातायात का दबाव कम करने में मदद की।
कुल मिलाकर, CO सुमित पांडेय और मेला कोतवाल कमल मोहन भंडारी की रणनीति ने उर्स की यातायात व्यवस्था में एक नया मॉडल पेश किया है—जहां VIP सुविधा से पहले जायरीन की सुविधा को प्राथमिकता दी गई।



