कानून की उड़ा दी धज्जियां! ₹10 हजार जुर्माने की चेतावनी के बावजूद एक ट्रांसपोर्ट एसोशिएशन का कांग्रेस समर्थित पोस्टर-बैनर हुआ चस्पा,, दीवार पर साफ लिखा है—पोस्टर-बैनर लगाने पर होगी कानूनी कार्रवाई, फिर भी ट्रांसपोर्ट एसोसिएशन के नाम से कांग्रेस नेताओं की तस्वीरों वाला पोस्टर लगाया,, जिस दीवार पर ₹10 हजार जुर्माने की चेतावनी, वहीं लगा दिया पोस्टर
पथरी पुल सुपर पैसेज ऊपरी गंगा नहर की सार्वजनिक दीवार पर चेतावनी लिखी थी—“कानूनी कार्रवाई होगी”, लेकिन उसके नीचे ही पोस्टर चिपक गया। अब असली परीक्षा चेतावनी लिखने वालों की नहीं, बल्कि उस चेतावनी को लागू कराने वाले जिम्मेदार अधिकारियों की है

कानून की उड़ा दी धज्जियां! ₹10 हजार जुर्माने की चेतावनी के बावजूद एक ट्रांसपोर्ट एसोशिएशन का कांग्रेस समर्थित पोस्टर-बैनर हुआ चस्पा,,
दीवार पर साफ लिखा है—पोस्टर-बैनर लगाने पर होगी कानूनी कार्रवाई, फिर भी ट्रांसपोर्ट एसोसिएशन के नाम से कांग्रेस नेताओं की तस्वीरों वाला पोस्टर लगाया,, जिस दीवार पर ₹10 हजार जुर्माने की चेतावनी, वहीं लगा दिया पोस्टर

हरिद्वार/रुड़की। सार्वजनिक दीवारों को पोस्टर और बैनर से बदरंग करने के खिलाफ प्रशासन की चेतावनी के बावजूद नियमों की खुलेआम अनदेखी का मामला सामने आया है। तस्वीरों में जिस दीवार पर स्पष्ट रूप से लिखा है कि “दीवार पर पोस्टर, बैनर, विज्ञापन आदि लिखने व चिपकाने पर कानूनी कार्रवाई होगी, अर्थदंड ₹10,000”, उसी क्षेत्र में एक नया पोस्टर चस्पा किया गया है।

बताया जा रहा है कि यह पोस्टर ऑल ट्रांसपोर्ट वेलफेयर एसोसिएशन हरिद्वार उत्तराखंड के नाम से लगाया गया है। पोस्टर में कांग्रेस से जुड़े नेताओं की तस्वीरें दिखाई दे रही हैं और कांग्रेस समर्थित राजनीतिक और धार्मिक संदेश के तौर पर इसका प्रचार किया गया है। ऐसे में मामला केवल दीवार पर पोस्टर चिपकाने तक सीमित नहीं रह जाता, बल्कि सार्वजनिक स्थान पर राजनीतिक प्रचार सामग्री लगाए जाने को लेकर भी सवाल खड़े हो रहे हैं।
जिस दीवार पर ₹10 हजार जुर्माने की चेतावनी, वहीं लगा दिया पोस्टर
सबसे बड़ा सवाल यही है कि जब संबंधित दीवार पर पहले से ही पोस्टर, बैनर और विज्ञापन लगाने पर ₹10 हजार अर्थदंड और कानूनी कार्रवाई की चेतावनी लिखी हुई है, तो इसके बावजूद पोस्टर किसकी अनुमति से लगाया गया?

यदि सार्वजनिक संपत्ति पर पोस्टर लगाने की अनुमति नहीं ली गई है, तो उत्तराखंड सार्वजनिक संपत्ति विरूपण निवारण अधिनियम, 2003 के तहत कार्रवाई की जा सकती है। अधिनियम में सार्वजनिक संपत्ति में दीवार आदि शामिल हैं और सार्वजनिक दृश्य में पोस्टर चिपकाने को विरूपण के दायरे में रखा गया है। कानून के तहत दोष सिद्ध होने पर एक वर्ष तक की सजा या ₹10 हजार तक जुर्माना या दोनों का प्रावधान है। यह अपराध संज्ञेय भी है।
पोस्टर लगाने वाले से लेकर लाभार्थी तक पर उठ सकते हैं सवाल
कानून में यह भी प्रावधान है कि यदि सार्वजनिक संपत्ति का विरूपण किसी व्यक्ति, संस्था या एसोसिएशन के लाभ के लिए किया गया है, तो संबंधित जिम्मेदार पदाधिकारी या व्यक्ति भी परिस्थितियों के अनुसार कार्रवाई के दायरे में आ सकता है, जब तक वह यह साबित न करे कि पोस्टर उसकी जानकारी या सहमति के बिना लगाया गया था।
ऐसे में प्रशासन के सामने अब कई सवाल हैं—पोस्टर किसने लगवाया? किसकी अनुमति से लगाया गया? पोस्टर लगाने वाले व्यक्ति की पहचान हुई या नहीं? संबंधित एसोसिएशन की इसमें क्या भूमिका है? और सार्वजनिक संपत्ति को विरूपित करने के मामले में क्या कार्रवाई की जाएगी?

राजनीतिक चेहरों वाले पोस्टर ने बढ़ाई चर्चा
पोस्टर में कांग्रेस नेताओं की तस्वीरें होने के कारण राजनीतिक चर्चाएं भी तेज हो गई हैं। हालांकि केवल किसी राजनीतिक नेता की तस्वीर पोस्टर पर होने से अपने आप कोई अपराध सिद्ध नहीं होता, लेकिन यदि पोस्टर बिना अनुमति सार्वजनिक संपत्ति पर लगाया गया है, तो राजनीतिक संबद्धता से अलग सार्वजनिक संपत्ति विरूपण संबंधी कानून लागू हो सकता है।
उत्तराखंड में सार्वजनिक संपत्ति पर पोस्टर-पैम्फलेट चिपकाने को लेकर प्रशासनिक निकायों को कार्रवाई सुनिश्चित करने के निर्देश भी दिए जा चुके हैं। उत्तराखंड हाईकोर्ट ने भी सार्वजनिक एवं सरकारी संपत्तियों पर पोस्टर-पैम्फलेट चिपकाने की प्रवृत्ति रोकने और संबंधित कानूनों के तहत कार्रवाई करने पर जोर दिया है।

अब निगाह प्रशासन की कार्रवाई पर
तस्वीरों ने जिम्मेदार विभागों की निगरानी व्यवस्था पर भी सवाल खड़े कर दिए हैं। यदि नियम तोड़ने वालों के खिलाफ कार्रवाई नहीं होती है तो ₹10 हजार जुर्माने की चेतावनी आखिर किस काम की?
अब देखना होगा कि संबंधित विभाग पोस्टर को हटाने के साथ-साथ ट्रांसपोर्ट एसोसिएशन के नाम से लगाए गए इस पोस्टर की अनुमति, पोस्टर लगवाने वाले व्यक्ति और जिम्मेदार संस्था की भूमिका की जांच करते हैं या नहीं।
पथरी पुल सुपर पैसेज ऊपरी गंगा नहर की सार्वजनिक दीवार पर चेतावनी लिखी थी—“कानूनी कार्रवाई होगी”, लेकिन उसके नीचे ही पोस्टर चिपक गया। अब असली परीक्षा चेतावनी लिखने वालों की नहीं, बल्कि उस चेतावनी को लागू कराने वाले जिम्मेदार अधिकारियों की है।



