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बच्चों के बीच पहुंचे डीएम मयूर दीक्षित, पढ़ाई से लेकर मिड-डे मील तक जानी हकीकत,, ज्वालापुर और कनखल के स्कूलों में औचक निरीक्षण कर डीएम ने बच्चों से की ‘मन की बात’, पाठ्यक्रम और भोजन पर सीधे लिए फीडबैक; शिक्षा व्यवस्था सुधारने को लेकर दिए जरूरी निर्देश

बच्चों के बीच पहुंचे डीएम मयूर दीक्षित, पढ़ाई से लेकर मिड-डे मील तक जानी हकीकत,,

ज्वालापुर और कनखल के स्कूलों में औचक निरीक्षण कर डीएम ने बच्चों से की ‘मन की बात’, पाठ्यक्रम और भोजन पर सीधे लिए फीडबैक; शिक्षा व्यवस्था सुधारने को लेकर दिए जरूरी निर्देश

हरिद्वार, 2 सितंबर 2026। सरकारी विद्यालयों में शिक्षा की गुणवत्ता और बच्चों को मिलने वाली सुविधाओं की वास्तविक स्थिति जानने के लिए जिलाधिकारी मयूर दीक्षित बुधवार को अचानक विद्यालयों के बीच पहुंचे। राजकीय प्राथमिक विद्यालय संख्या-3, ज्वालापुर और राजकीय प्राथमिक विद्यालय संख्या-18, कनखल के औचक निरीक्षण के दौरान डीएम ने अधिकारियों और शिक्षकों से जानकारी लेने के साथ-साथ सीधे बच्चों के बीच पहुंचकर उनसे बातचीत की। जिलाधिकारी का बच्चों के साथ सहज संवाद निरीक्षण का खास आकर्षण रहा।

डीएम मयूर दीक्षित ने बच्चों से उनकी पढ़ाई, पाठ्यक्रम, कक्षा में पढ़ाए जा रहे विषयों और मध्याह्न भोजन को लेकर सवाल किए। उन्होंने बच्चों से जानना चाहा कि उन्हें स्कूल में क्या पढ़ाया जा रहा है, पढ़ाई समझ में आ रही है या नहीं और मिड-डे मील नियमित रूप से मिल रहा है या नहीं। बच्चों से सीधे फीडबैक लेकर जिलाधिकारी ने विद्यालयी व्यवस्था की जमीनी हकीकत समझने का प्रयास किया।

बच्चों के बीच पहुंचकर डीएम ने जाना उनकी ‘मन की बात’

निरीक्षण के दौरान जिलाधिकारी का अंदाज केवल अधिकारी के तौर पर जांच करने तक सीमित नहीं रहा। उन्होंने बच्चों के साथ सहज वातावरण में बातचीत की और उनकी बात ध्यान से सुनी। बच्चों से सवाल-जवाब करते हुए उन्होंने उनकी शैक्षणिक प्रगति को परखा।

डीएम ने कहा कि बच्चों के उज्ज्वल भविष्य के लिए उन्हें गुणवत्तापूर्ण शिक्षा देना सभी शिक्षकों की नैतिक जिम्मेदारी है। उन्होंने शिक्षकों से पूरी निष्ठा और संवेदनशीलता के साथ बच्चों के सर्वांगीण विकास के लिए कार्य करने को कहा।

जिलाधिकारी ने कहा कि बच्चे देश का भविष्य हैं और उनके भविष्य को बेहतर बनाने के लिए सरकारी विद्यालयों में शिक्षा का स्तर लगातार मजबूत किया जाना जरूरी है। यही वजह है कि जिला प्रशासन की ओर से विद्यालयों का औचक निरीक्षण कर व्यवस्थाओं की वास्तविक स्थिति का जायजा लिया जा रहा है।

मिड-डे मील पर डीएम की पैनी नजर, हरी सब्जी शामिल करने के निर्देश

निरीक्षण के दौरान डीएम ने मध्याह्न भोजन की गुणवत्ता को भी गंभीरता से परखा। बच्चों से भोजन को लेकर सीधे जानकारी लेने के बाद उन्होंने संबंधित अधिकारियों और शिक्षकों को स्पष्ट निर्देश दिए कि मिड-डे मील में गुणवत्ता से किसी भी स्तर पर समझौता नहीं होना चाहिए।

उन्होंने बच्चों को स्वच्छ, पौष्टिक और निर्धारित मानकों के अनुरूप भोजन उपलब्ध कराने के निर्देश दिए। साथ ही भोजन में हरी सब्जियों को शामिल करने पर भी जोर दिया। उन्होंने कहा कि बच्चों के बेहतर स्वास्थ्य और पढ़ाई के लिए पौष्टिक भोजन बेहद जरूरी है।

334 बच्चे पंजीकृत, 204 मिले उपस्थित

राजकीय प्राथमिक विद्यालय संख्या-3, ज्वालापुर में प्रधान अध्यापक श्रीमती सरिता रानी चौधरी ने जिलाधिकारी को विद्यालय की स्थिति की जानकारी दी। उन्होंने बताया कि विद्यालय में कुल 334 छात्र-छात्राएं अध्ययनरत हैं, जबकि निरीक्षण के दिन 204 विद्यार्थी उपस्थित थे।

प्रधान अध्यापक के अनुसार विद्यालय में कुल 12 शिक्षक कार्यरत हैं। निरीक्षण के दौरान यह जानकारी भी जिलाधिकारी के संज्ञान में आई कि शिक्षक प्रमुद अहमद 4 फरवरी 2025 से विद्यालय से अनुपस्थित चल रहे हैं।

विद्यालय में विद्यार्थियों और शिक्षकों की उपस्थिति से संबंधित जानकारी लेते हुए जिलाधिकारी ने शिक्षा व्यवस्था में नियमितता और जवाबदेही सुनिश्चित करने पर जोर दिया।

‘सिर्फ पढ़ाना नहीं, बच्चों का भविष्य बनाना है’

डीएम मयूर दीक्षित ने शिक्षकों से कहा कि विद्यालय केवल पाठ्यक्रम पूरा करने की जगह नहीं हैं, बल्कि बच्चों के भविष्य को आकार देने का महत्वपूर्ण माध्यम हैं। उन्होंने शिक्षकों से बच्चों की व्यक्तिगत जरूरतों और सीखने की क्षमता पर भी ध्यान देने को कहा।

उन्होंने कहा कि शिक्षक बच्चों के साथ संवाद बढ़ाएं और उनकी समस्याओं को समझें, ताकि पढ़ाई के प्रति उनमें रुचि पैदा हो सके। बच्चों की नियमित उपस्थिति और शैक्षणिक प्रगति पर भी लगातार नजर रखने के निर्देश दिए गए।

अभिभावकों से भी संवाद बढ़ाने पर जोर

जिलाधिकारी ने शिक्षकों को छात्र-छात्राओं के अभिभावकों के साथ समय-समय पर बैठक करने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि बच्चों की शिक्षा में विद्यालय और अभिभावकों की संयुक्त भूमिका महत्वपूर्ण है।

डीएम ने कहा कि यदि किसी बच्चे की उपस्थिति कम है या उसकी पढ़ाई में किसी तरह की परेशानी सामने आती है तो शिक्षक अभिभावकों से संपर्क कर समस्या का समाधान निकालें। इससे बच्चों की उपस्थिति और शैक्षणिक प्रदर्शन दोनों में सुधार लाया जा सकता है।

स्कूलों में स्वच्छता को लेकर भी सख्ती

निरीक्षण के दौरान जिलाधिकारी ने विद्यालय परिसर, कक्षाओं, शौचालयों और पेयजल व्यवस्था की स्थिति का भी जायजा लिया। उन्होंने निर्देश दिए कि स्कूलों में नियमित साफ-सफाई सुनिश्चित की जाए और बच्चों को स्वच्छ एवं सुरक्षित वातावरण उपलब्ध कराया जाए।

उन्होंने कहा कि बेहतर शिक्षा के साथ-साथ बच्चों को स्वच्छ वातावरण और आवश्यक मूलभूत सुविधाएं मिलना भी जरूरी है।

पुराने स्कूल भवनों के कायाकल्प की तैयारी

जिलाधिकारी ने कहा कि निरीक्षण के दौरान विद्यालयों में जो भी कमियां सामने आ रही हैं, उन्हें प्राथमिकता के आधार पर दूर कराया जाएगा। पुराने विद्यालय भवनों की मरम्मत और रखरखाव के लिए CSR के माध्यम से कार्ययोजना तैयार करने के निर्देश भी दिए गए हैं।

उन्होंने कहा कि मजबूत आधारभूत ढांचा बच्चों को बेहतर शैक्षणिक वातावरण देने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। जिला प्रशासन सरकारी विद्यालयों में सुविधाओं के विस्तार और गुणवत्ता सुधार के लिए लगातार प्रयास कर रहा है।

जनहित में औचक निरीक्षण जारी रहेगा

डीएम मयूर दीक्षित ने कहा कि जनपद के सरकारी विद्यालयों में शिक्षा की गुणवत्ता और बच्चों को मिलने वाली सुविधाओं को बेहतर बनाना जिला प्रशासन की प्राथमिकताओं में शामिल है। विद्यालयों का नियमित और औचक निरीक्षण आगे भी जारी रहेगा।

इस दौरान डीएम का बच्चों के बीच पहुंचना और उनसे सीधे बातचीत कर उनकी बात सुनना अभिभावकों और शिक्षकों के लिए भी संदेश देता नजर आया कि विद्यालयी व्यवस्था का सबसे महत्वपूर्ण केंद्र बच्चा है और उसकी शिक्षा, स्वास्थ्य एवं भविष्य से किसी भी स्तर पर समझौता नहीं किया जा सकता।

जिलाधिकारी ने अधिकारियों और शिक्षकों को निर्देशित किया कि बच्चों के हित को सर्वोच्च प्राथमिकता देते हुए पूरी जिम्मेदारी और संवेदनशीलता के साथ कार्य करें।

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