चोरी की बाइकों का ‘गुप्त नेटवर्क’ बेनकाब! किरवी चौक की चेकिंग से खुला पूरा राज,, एसपी क्राइम निशा यादव ने प्रेसवार्ता के दौरान किया खुलासा,, सिडकुल पुलिस ने शातिर वाहन चोर को दबोचा, बंद पड़ी खाद फैक्ट्री में छिपी मिलीं 9 बाइक और पार्ट्स—सिडकुल, रानीपुर और बहादराबाद तक फैले नेटवर्क की पड़ताल तेज,, पूछताछ में सामने आया गुप्त ठिकाना; फरार साथी की तलाश में जुटी पुलिस

चोरी की बाइकों का ‘गुप्त नेटवर्क’ बेनकाब! किरवी चौक की चेकिंग से खुला पूरा राज,, एसपी क्राइम निशा यादव ने प्रेसवार्ता के दौरान किया खुलासा,,
सिडकुल पुलिस ने शातिर वाहन चोर को दबोचा, बंद पड़ी खाद फैक्ट्री में छिपी मिलीं 9 बाइक और पार्ट्स—सिडकुल, रानीपुर और बहादराबाद तक फैले नेटवर्क की पड़ताल तेज,,
पूछताछ में सामने आया गुप्त ठिकाना; फरार साथी की तलाश में जुटी पुलिस
हरिद्वार। सिडकुल और आसपास के इलाकों में दोपहिया वाहन चोरी की वारदातों को लेकर चल रही पुलिस की पड़ताल को बड़ी कामयाबी मिली है। एसएसपी नवनीत सिंह भुल्लर के निर्देश पर चलाए जा रहे सघन चेकिंग अभियान के दौरान सिडकुल पुलिस ने एक संदिग्ध वाहन सवार को पकड़कर पूछताछ की तो चोरी की बाइकों के एक गुप्त नेटवर्क का राज सामने आया।
पुलिस की कार्रवाई में गिरफ्तार आरोपी की निशानदेही पर बंद पड़ी पुरानी खाद फैक्ट्री के भीतर झाड़ियों में छिपाकर रखी गई 8 मोटरसाइकिल और एक मोटरसाइकिल के पार्ट्स बरामद हुए। जिस मोटरसाइकिल से आरोपी को पकड़ा गया था, उसे मिलाकर कुल 9 चोरी की मोटरसाइकिल और एक बाइक के पार्ट्स पुलिस के हाथ लगे हैं।
मामले की जांच अब बरामद बाइकों तक सीमित नहीं है। पुलिस यह पता लगाने में जुटी है कि चोरी के इन वाहनों को कहां खपाया जाता था और इस नेटवर्क में आरोपी के अलावा और कौन-कौन लोग शामिल हैं।
किरवी चौक पर शुरू हुई कहानी, जांच पहुंची बंद फैक्ट्री तक
घटना 14 सितंबर 2026 की है। सिडकुल पुलिस की टीम किरवी चौक पर वाहनों की चेकिंग कर रही थी। इसी दौरान पॉलिटेक्निक की तरफ से एक बाइक सवार आता दिखाई दिया।
पुलिस ने उसे चेकिंग के लिए रुकने का संकेत दिया। पुलिस के अनुसार संदिग्ध ने अचानक बाइक वापस मोड़कर निकलने का प्रयास किया। पुलिस टीम ने तत्काल सक्रियता दिखाते हुए उसे रोक लिया और पूछताछ शुरू की।
इसके बाद मोटरसाइकिल की बारीकी से जांच की गई। इंजन नंबर, चेसिस नंबर और वाहन संख्या का सत्यापन किया गया तो पुलिस के सामने बड़ा सुराग आया।
मोटरसाइकिल चोरी की थी और उसके संबंध में थाना सिडकुल में मुकदमा अपराध संख्या 388/2026 दर्ज था।
यहीं से पुलिस ने आरोपी से सख्ती से पूछताछ शुरू की और वाहन चोरी के नेटवर्क की अगली कड़ी तक पहुंचने की कोशिश शुरू हुई।
बंद पड़ी खाद फैक्ट्री बनी चोरी की बाइकों का ठिकाना
पूछताछ के दौरान मिली जानकारी के आधार पर पुलिस टीम एक बंद पड़ी पुरानी खाद फैक्ट्री तक पहुंची। फैक्ट्री परिसर में झाड़ियों के बीच तलाशी अभियान चलाया गया।
तलाशी के दौरान पुलिस को वहां से 8 मोटरसाइकिल और एक मोटरसाइकिल के पार्ट्स बरामद हुए।
पहले पकड़ी गई बाइक को मिलाकर कुल बरामदगी 9 मोटरसाइकिल और एक मोटरसाइकिल के पार्ट्स की हुई।
बंद फैक्ट्री के भीतर इस तरह वाहनों का छिपाकर रखा जाना पुलिस की जांच का अहम बिंदु बन गया है। अब पुलिस यह पता कर रही है कि यह ठिकाना कब से इस्तेमाल किया जा रहा था और यहां कितने वाहनों को लाकर छिपाया गया।
सिडकुल से रानीपुर और बहादराबाद तक था निशाना
पुलिस की प्रारंभिक पड़ताल में सामने आया है कि गिरफ्तार आरोपी अपने साथी के साथ मिलकर सिडकुल, रानीपुर और बहादराबाद क्षेत्र में दोपहिया वाहनों को निशाना बनाता था।
चोरी के बाद वाहनों को किसी सुनसान और सुरक्षित स्थान पर छिपाकर रखने का तरीका अपनाए जाने की बात सामने आई है।
अब पुलिस बरामद सभी मोटरसाइकिलों के इंजन और चेसिस नंबर का सत्यापन कर रही है। इनका मिलान अलग-अलग थानों में दर्ज वाहन चोरी के मुकदमों से किया जा रहा है।
अगर बरामद वाहनों का संबंध अन्य मुकदमों से सामने आता है तो वाहन चोरी की कई और घटनाओं का भी खुलासा हो सकता है।

गिरफ्तार आरोपी की पहचान श्रवण पुत्र रमेश, निवासी ग्राम दौलतपुर, थाना बहादराबाद, जनपद हरिद्वार, उम्र करीब 30 वर्ष के रूप में हुई है।
पुलिस के अनुसार आरोपी के खिलाफ हरिद्वार, देहरादून और उत्तर प्रदेश के देवबंद में कई मुकदमे दर्ज हैं।
उसके आपराधिक इतिहास में चोरी, लूट, हथियार अधिनियम, एनडीपीएस एक्ट और गैंगस्टर एक्ट से जुड़े मामले शामिल बताए गए हैं।
पुलिस रिकॉर्ड के मुताबिक थाना डोईवाला, देहरादून में वर्ष 2025 के दो मुकदमे दर्ज हैं। थाना लक्सर में भी कई मामले दर्ज हैं, जिनमें गैंगस्टर एक्ट का मामला शामिल है। थाना बहादराबाद और सिडकुल में भी उसका आपराधिक इतिहास सामने आया है।
उत्तर प्रदेश के थाना देवबंद, सहारनपुर में वर्ष 2020 के चार मुकदमे दर्ज होने की जानकारी पुलिस ने दी है, जिनमें गैंगस्टर एक्ट का मामला भी शामिल है।
अब असली सवाल—बाइकें चोरी के बाद कहां जाती थीं?
सिडकुल पुलिस की कार्रवाई के बाद अब जांच का सबसे अहम हिस्सा शुरू हो गया है।
क्या चोरी की बाइकें सीधे बेची जाती थीं? क्या उनके पार्ट्स अलग-अलग करके खपाए जाते थे? क्या किसी दूसरे शहर में इनका खरीदार नेटवर्क सक्रिय था?
इन सवालों के जवाब तलाशने के लिए पुलिस बरामद वाहनों की जानकारी जुटा रही है। साथ ही आरोपी से पूछताछ के आधार पर उसके संपर्कों और फरार साथी की भूमिका की भी जांच की जा रही है।
पुलिस के मुताबिक इस मामले में एक अन्य आरोपी फरार है। उसकी तलाश में संभावित ठिकानों पर दबिश दी जा रही है।
एक संदिग्ध बाइक से खुला पूरा नेटवर्क
सिडकुल पुलिस के लिए यह कार्रवाई इसलिए महत्वपूर्ण है क्योंकि मामला सिर्फ एक चोरी की बाइक बरामद होने तक सीमित नहीं रहा। एक संदिग्ध बाइक से शुरू हुई जांच बंद फैक्ट्री में छिपी नौ चोरी की मोटरसाइकिलों तक पहुंच गई।
बरामदगी के आधार पर संबंधित मुकदमों में धारा 317(2) बीएनएस की बढ़ोतरी की गई है। आरोपी के खिलाफ आवश्यक कानूनी कार्रवाई की जा रही है और उसे न्यायालय के समक्ष पेश किया जाएगा।
अब पुलिस की नजर उस फरार साथी पर है, जिसके पकड़े जाने के बाद चोरी की बाइकों के इस पूरे नेटवर्क में शामिल अन्य चेहरों, चोरी के तरीके और वाहनों को खपाने के रास्तों का खुलासा होने की उम्मीद है।
थानाध्यक्ष अजय शाह, वरिष्ठ उपनिरीक्षक प्रवीण बिष्ट, अपर उपनिरीक्षक अनिल कुमार सैनी, हेड कांस्टेबल जितेंद्र मलिक, संजय, सोहन राणा, कांस्टेबल प्रमोद गोस्वामी, रिपेंद्र कैंतुरा तथा होमगार्ड आफताब मलिक कार्रवाई में शामिल रहे। 
09 मोटरसाइकिल + 01 मोटरसाइकिल के पार्ट्स।
एक आरोपी पुलिस की गिरफ्त में है, दूसरा फरार। अब जांच की अगली कड़ी इस सवाल पर टिकी है कि चोरी की इन बाइकों का अंतिम ठिकाना कौन था और इनके पीछे कितने चेहरे छिपे हैं।




