जनसुनवाई में जनता की समस्याओं पर सख्त तेवर, 38 शिकायतें पहुंचीं—18 का मौके पर निस्तारण,, सीएम हेल्पलाइन की 274 शिकायतें अब भी लंबित, 36 दिन से अटकी शिकायतों पर CDO ने अधिकारियों को लगाई फटकार—लापरवाही पर कार्रवाई की चेतावनी,, हरिद्वार में जनसुनवाई के दौरान नाली, जलभराव, अतिक्रमण, भूमि विवाद, बिजली और पेयजल से जुड़ी समस्याओं का उठा मुद्दा

जनसुनवाई में जनता की समस्याओं पर सख्त तेवर, 38 शिकायतें पहुंचीं—18 का मौके पर निस्तारण,,
सीएम हेल्पलाइन की 274 शिकायतें अब भी लंबित, 36 दिन से अटकी शिकायतों पर CDO ने अधिकारियों को लगाई फटकार—लापरवाही पर कार्रवाई की चेतावनी,,
हरिद्वार में जनसुनवाई के दौरान नाली, जलभराव, अतिक्रमण, भूमि विवाद, बिजली और पेयजल से जुड़ी समस्याओं का उठा मुद्दा
हरिद्वार, 15 सितंबर…. जनता की समस्याओं के त्वरित समाधान को लेकर जिलाधिकारी मयूर दीक्षित के निर्देशन में सोमवार को जिला कार्यालय सभागार में आयोजित जनसुनवाई में अधिकारियों के सामने फरियादियों ने समस्याओं का पिटारा खोल दिया। मुख्य विकास अधिकारी डॉ. ललित नारायण मिश्र की अध्यक्षता में हुई जनसुनवाई में विभिन्न विभागों से जुड़ी 38 शिकायतें एवं समस्याएं दर्ज की गईं। इनमें से 18 शिकायतों का मौके पर ही निस्तारण किया गया, जबकि शेष शिकायतों को संबंधित विभागों के अधिकारियों को कार्रवाई के लिए भेजा गया।
जनसुनवाई में सामने आई शिकायतों से साफ हुआ कि शहर से लेकर ग्रामीण क्षेत्रों तक लोगों को आज भी बुनियादी सुविधाओं के लिए सरकारी दफ्तरों के चक्कर काटने पड़ रहे हैं। कहीं नालियां लोगों के घरों तक पहुंचने में बाधा बन रही हैं तो कहीं सड़क और नाली के गलत लेवल से जलभराव का खतरा पैदा हो गया है। कई जगह गंदे पानी की निकासी नहीं होने, अतिक्रमण और भूमि विवाद की शिकायतें भी अधिकारियों के सामने पहुंचीं।
नाली खुली छोड़ी तो घर तक वाहन पहुंचना हुआ मुश्किल
नवोदय नगर स्थित गणेश इंक्लेव गली नंबर-6 के निवासियों ने शिकायत दर्ज कराई कि पीडब्ल्यूडी की ओर से गली के समीप नाली का निर्माण कराया गया है, लेकिन नाली को ऊपर से खुला छोड़ दिया गया है। इससे स्थानीय लोगों को अपने वाहनों को घर तक ले जाने में परेशानी हो रही है। गलीवासियों ने नाली को कवर कराने की मांग की।
वहीं, ज्ञानलोक कॉलोनी गली नंबर-10 के निवासियों ने आरोप लगाया कि बगल में काटी गई कॉलोनी से निकलने वाले गंदे पानी की उचित निकासी नहीं की गई है। पानी उनके घरों के पीछे छोड़े जाने के कारण बारिश अथवा निकासी के समय घरों में जलभराव की स्थिति बन जाती है। लोगों ने तत्काल समस्या का समाधान कराने की मांग की।
रुड़की में ऊंची सड़क और नाली से जलभराव का खतरा
कृष्णा नगर रुड़की के गली नंबर-16 के निवासियों ने भी अपनी समस्या अधिकारियों के सामने रखी। स्थानीय लोगों का कहना था कि गली में सड़क और नाली का निर्माण जरूरत से अधिक ऊंचे स्तर पर किया जा रहा है, जिससे आसपास बने मकानों में जलभराव का खतरा बढ़ गया है। लोगों ने सड़क एवं नाली को उचित लेवल पर बनाए जाने की मांग की।
वहीं ग्राम मजाहिंदपुर सतीवाला निवासी हरेंद्र सिंह ने नदी का कटाव गांव की ओर बढ़ने की शिकायत करते हुए जल्द तटबंध बनाए जाने की मांग की। शिकायतकर्ता ने आशंका जताई कि समय रहते सुरक्षा के इंतजाम नहीं किए गए तो नदी का कटाव ग्रामीण आबादी के लिए गंभीर खतरा बन सकता है।
गंगाजी की जमीन पर अवैध कब्जे का मामला भी पहुंचा
जनसुनवाई में जमीन से जुड़े विवाद भी प्रमुखता से उठे। वेदपाल पुत्र चरण सिंह ने गंगाजी के खसरा नंबर 443/12 की भूमि पर अवैध कब्जे को हटाने के संबंध में शिकायत दर्ज कराई। वहीं सरबतिया ने अपने पिता स्वर्गीय नगरे की अचल संपत्ति में अपना नाम दर्ज कराने की मांग की।
देवभूमि पूर्व सैनिक कल्याण समिति ने मिलन केंद्र एवं शहीद स्मारक से संबंधित मांग रखी। इसके अलावा दि बुद्धिस्ट सोसाइटी ऑफ इंडिया ने हरिद्वार स्थित बौद्ध विहार के पुनर्निर्माण के लिए भूमि उपलब्ध कराने का प्रार्थना पत्र दिया।
सीएम हेल्पलाइन पर 274 शिकायतें लंबित, 36 दिन से पुरानी शिकायतों पर सख्ती
जनसुनवाई के साथ ही सीएम हेल्पलाइन पर दर्ज शिकायतों की भी समीक्षा की गई। इस दौरान लंबित शिकायतों का आंकड़ा सामने आने पर अधिकारियों को स्पष्ट निर्देश दिए गए कि जनता की शिकायतों को फाइलों में दबाकर न रखा जाए।
सीडीओ डॉ. ललित नारायण मिश्र ने अधिकारियों को निर्देश दिए कि 36 दिन से अधिक समय से लंबित शिकायतों का प्राथमिकता के आधार पर निस्तारण किया जाए। समीक्षा में सामने आया कि एल-1 स्तर पर 216 और एल-2 स्तर पर 58 शिकायतें लंबित हैं। यानी कुल 274 शिकायतें विभिन्न स्तरों पर निस्तारण की प्रतीक्षा में हैं।
सीडीओ ने अधिकारियों को निर्देशित किया कि सीएम हेल्पलाइन में दर्ज प्रत्येक शिकायत को गंभीरता और संवेदनशीलता से लिया जाए। उन्होंने स्पष्ट किया कि शिकायतों का निस्तारण केवल कागजों तक सीमित नहीं रहना चाहिए, बल्कि जरूरत पड़ने पर मौके पर जाकर वास्तविक स्थिति की जांच की जाए।
“लापरवाही मिली तो होगी कार्रवाई”
मुख्य विकास अधिकारी ने अधिकारियों को दो टूक कहा कि जनसुनवाई में जनता की ओर से दर्ज कराई गई शिकायतों का समयबद्ध और गुणवत्तापूर्ण निस्तारण सुनिश्चित किया जाए। किसी भी स्तर पर लापरवाही या शिथिलता बर्दाश्त नहीं की जाएगी।
उन्होंने कहा कि जिन शिकायतों में स्थलीय निरीक्षण जरूरी है, उनमें संबंधित अधिकारी आपसी समन्वय स्थापित कर मौके पर जाएं और समस्या का वास्तविक समाधान कराएं। सिर्फ रिपोर्ट बनाकर शिकायत को निस्तारित दिखाने की बजाय शिकायतकर्ता को राहत मिलना प्राथमिकता होनी चाहिए।
सीडीओ ने अधिकारियों को यह भी स्पष्ट किया कि जनता की शिकायतों को शीर्ष प्राथमिकता और संवेदनशीलता के साथ लिया जाए। प्रशासन का उद्देश्य केवल शिकायतें सुनना नहीं बल्कि उनका धरातल पर समाधान कर जनता को राहत देना है।
जनसुनवाई में अपर जिलाधिकारी प्रशासन जितेंद्र कुमार, अपर जिलाधिकारी वित्त एवं राजस्व वैभव गुप्ता, अपर मुख्य चिकित्साधिकारी डॉ. अनिल वर्मा, जिला विकास अधिकारी कमलेश कुमार पंत, मुख्य शिक्षा अधिकारी अमित कुमार चन्द, जिला खाद्य सुरक्षा अधिकारी महिमानंद जोशी, जिला पर्यटन अधिकारी सुशील नौटियाल, जिला अर्थ एवं संख्या अधिकारी नलिनी ध्यानी, जिला प्रोवेशन अधिकारी अविनाश भदौरिया, जिला आपदा प्रबंधन अधिकारी मीरा रावत, उप मुख्य नगर अधिकारी एमके यादव, एलडीएम दिनेश गुप्ता, परियोजना निदेशक उरेडा वाईएस बिष्ट सहित विभिन्न विभागों के जिला स्तरीय अधिकारी मौजूद रहे।
जनता गैराज: जनसुनवाई में 38 शिकायतें आना यह बताता है कि स्थानीय स्तर पर सड़क, नाली, जलभराव, भूमि और बुनियादी सुविधाओं से जुड़ी समस्याएं अभी भी बड़ी चुनौती बनी हुई हैं। अब असली परीक्षा अधिकारियों की है कि जनसुनवाई में दिए गए निर्देश जमीन पर कितनी जल्दी दिखाई देते हैं। खासकर सीएम हेल्पलाइन की 274 लंबित शिकायतों में 36 दिन से पुरानी शिकायतों का निस्तारण प्रशासन की कार्यप्रणाली की अगली बड़ी कसौटी होगा।



