संतों पर ब्यानबाजी से मचा बवाल! साध्वी कंचन गिरि को 7 दिन का कानूनी अल्टीमेटम, अरुण भदौरिया एसोसिएट अधिवक्ताओ ने भेजा मानहानि नोटिस,, कैलाशानंद गिरि, रविंद्र पुरी और हरि गिरि पर कथित आपत्तिजनक टिप्पणियों का आरोप—वीडियो हटाने, लिखित खेद जताने और ब्यान का आधार बताने की मांग; जवाब नहीं मिला तो हरिद्वार न्यायालय में मुकदमा दाखिल करने की चेतावनी,, ‘वीडियो हटाइए, खेद जताइए, वरना कोर्ट में होगी लड़ाई’

संतों पर ब्यानबाजी से मचा बवाल! साध्वी कंचन गिरि को 7 दिन का कानूनी अल्टीमेटम, अरुण भदौरिया एसोसिएट अधिवक्ताओ ने भेजा मानहानि नोटिस,,
कैलाशानंद गिरि, रविंद्र पुरी और हरि गिरि पर कथित आपत्तिजनक टिप्पणियों का आरोप—वीडियो हटाने, लिखित खेद जताने और ब्यान का आधार बताने की मांग; जवाब नहीं मिला तो हरिद्वार न्यायालय में मुकदमा दाखिल करने की चेतावनी,,
‘वीडियो हटाइए, खेद जताइए, वरना कोर्ट में होगी लड़ाई’
हरिद्वार। संत समाज से जुड़े विवाद ने अब कानूनी मोड़ ले लिया है। साध्वी कंचन गिरि द्वारा निरंजनी पीठाधीश्वर आचार्य महामंडलेश्वर स्वामी कैलाशानंद गिरि महाराज, श्री पंचायती अखाड़ा निरंजनी के सचिव श्री रविंद्र पुरी जी महाराज तथा जूना अखाड़े के सचिव श्री हरि गिरि जी महाराज के संबंध में कथित रूप से लगातार आपत्तिजनक और अपमानजनक बयान दिए जाने को लेकर हरिद्वार के अधिवक्ता अरुण भदौरिया ने कानूनी नोटिस भेजा है। यह नोटिस उनके अधिवक्ता कमल भदौरिया और सुमेधा भदौरिया के माध्यम से भेजे जाने की जानकारी दी गई है।
नोटिस में आरोप लगाया गया है कि साध्वी कंचन गिरि ने वीडियो बनाकर सोशल मीडिया और मीडिया के माध्यम से ऐसे बयान प्रसारित किए, जिनसे संतों की सामाजिक, धार्मिक एवं सार्वजनिक छवि प्रभावित होने के साथ-साथ श्रद्धालुओं की धार्मिक भावनाओं को भी ठेस पहुंची है। नोटिस में कथित वीडियो के बयानों को लेकर सात दिन के भीतर स्पष्टीकरण देने की मांग की गई है।
‘थाईलैंड-मसाज’ वाली टिप्पणी पर बवाल, ‘केंचुआनंद’ शब्द को लेकर भी जताई कड़ी आपत्ति
अधिवक्ता अरुण भदौरिया की ओर से जारी नोटिस के अनुसार, उन्होंने 12 सितंबर 2026 को अपने निवास पर संबंधित वीडियो देखा और सुना। नोटिस में दावा किया गया है कि वीडियो में स्वामी कैलाशानंद गिरि महाराज की थाईलैंड यात्राओं को लेकर सवाल उठाए गए तथा मसाज को लेकर भी टिप्पणियां की गईं। इसके अलावा थाईलैंड को लेकर कथित रूप से आपत्तिजनक बातें कही गईं और अन्य देशों एवं भारत के कुछ राज्यों का उल्लेख किया गया।
नोटिस में यह भी आरोप लगाया गया है कि वीडियो में निरंजनी अखाड़े के सचिव रविंद्र पुरी और जूना अखाड़े के सचिव हरि गिरि महाराज के संबंध में भी कथित रूप से अमर्यादित भाषा का प्रयोग किया गया। विशेष रूप से ‘केंचुआनंद’ जैसे कथित अपमानजनक शब्द के सार्वजनिक वीडियो में इस्तेमाल किए जाने पर कड़ी आपत्ति दर्ज कराई गई है।
अरुण भदौरिया का कहना है कि धार्मिक संतों और महामंडलेश्वरों के प्रति श्रद्धा रखने वाले लोगों के लिए इस प्रकार की सार्वजनिक टिप्पणी केवल किसी व्यक्ति की व्यक्तिगत प्रतिष्ठा का विषय नहीं है, बल्कि इससे धार्मिक भावनाएं भी प्रभावित होती हैं।
‘बिना प्रमाण चरित्र पर टिप्पणी क्यों?’—नोटिस में सात दिन में मांगा जवाब
कानूनी नोटिस में साध्वी कंचन गिरि से सीधे सवाल किया गया है कि स्वामी कैलाशानंद गिरि महाराज के निजी आचरण, चरित्र, विदेश यात्राओं और मसाज से संबंधित टिप्पणियां किस आधार पर की गईं। नोटिस के माध्यम से कथित बयानों के समर्थन में सत्यापित दस्तावेज अथवा प्रमाण प्रस्तुत करने को कहा गया है।
नोटिस में यह भी कहा गया है कि यदि किसी व्यक्ति के निजी एवं नैतिक आचरण को लेकर सार्वजनिक मंच से ऐसी बातें कही जाती हैं, जिनसे आम जनता और श्रद्धालुओं की धारणा प्रभावित हो सकती है, तो उसके लिए संबंधित व्यक्ति को अपने कथनों का आधार स्पष्ट करना चाहिए।
अरुण भदौरिया ने अपने पक्ष में स्वामी कैलाशानंद गिरि महाराज की धार्मिक एवं सामाजिक गतिविधियों का उल्लेख करते हुए कहा है कि दक्षिण काली सिद्ध पीठ मंदिर आश्रम में नियमित रूप से भंडारे का आयोजन होता है, जिसमें बड़ी संख्या में लोग शामिल होते हैं। नोटिस में गरीब कन्याओं के विवाह, जरूरतमंद बच्चों की शिक्षा एवं अनाथ बच्चों के भरण-पोषण सहित विभिन्न सामाजिक कार्यों का भी उल्लेख किया गया है।
नोटिस में भगवान शिव की साधना, पूजा और धार्मिक अनुष्ठानों का भी उल्लेख करते हुए कहा गया है कि स्वामी कैलाशानंद गिरि महाराज के प्रति बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं की धार्मिक आस्था जुड़ी हुई है।
‘वीडियो हटाइए, खेद जताइए, वरना कोर्ट में होगी लड़ाई’
कानूनी नोटिस में साध्वी कंचन गिरि से संबंधित कथित वीडियो को तत्काल हटाने तथा सार्वजनिक रूप से श्रद्धालुओं की धार्मिक भावनाओं को पहुंची कथित ठेस के लिए लिखित रूप से खेद व्यक्त करने की मांग की गई है।
साथ ही सात दिन के भीतर यह स्पष्ट करने को कहा गया है कि संतों के लिए अमर्यादित शब्दों का प्रयोग किस आधार और उद्देश्य से किया गया। थाईलैंड यात्रा, मसाज तथा निजी आचरण से संबंधित कथित टिप्पणियों के समर्थन में प्रमाण और दस्तावेज भी मांगे गए हैं।
अधिवक्ता अरुण भदौरिया की ओर से स्पष्ट चेतावनी दी गई है कि यदि निर्धारित अवधि में संतोषजनक जवाब नहीं दिया गया और कथित वीडियो हटाकर खेद व्यक्त नहीं किया गया, तो साध्वी कंचन गिरि के विरुद्ध हरिद्वार न्यायालय में मुकदमा दायर करने की कार्रवाई की जाएगी।
फिलहाल इस पूरे मामले ने संत समाज और धार्मिक हलकों में चर्चा तेज कर दी है। मामला अब केवल बयानबाजी तक सीमित नहीं दिख रहा, बल्कि कानूनी कार्रवाई की दिशा में बढ़ चुका है। हालांकि, नोटिस में लगाए गए आरोपों पर साध्वी कंचन गिरि का पक्ष सामने आना अभी बाकी है।



